Akshaya Tritiya 2026: 19 अप्रैल को बन रहा अबूझ मुहूर्त, जानें क्यों माना जाता है ये सबसे शुभ दिन?

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया और अन्य अबूझ मुहूर्त जीवन में नई शुरुआत और समृद्धि के सबसे शुभ अवसर माने जाते हैं. इस समय किए गए कामों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है और सफलता के योग मजबूत होते हैं. चाहे विवाह हो, निवेश हो या नया व्यवसाय, यह दिन हर दिशा में शुभ फल देने वाला माना जाता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है.

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इन तिथियों पर भी होता है अबूझ मुहूर्त (Photo: ITG) इन तिथियों पर भी होता है अबूझ मुहूर्त (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया, इस बार 19 अप्रैल को मनाया जाएगा. यह पर्व बहुत ही पवित्र माना जाता है. 'अक्षय' का अर्थ होता है- जो कभी समाप्त न हो. मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, जप, तप और शुभ कार्यों का फल कभी खत्म नहीं होता, बल्कि जीवनभर और कई जन्मों तक बढ़ता रहता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. यह दिन बिना किसी मुहूर्त के शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार शुरू करना या खरीदारी जैसे कार्य इस दिन विशेष फलदायी माने जाते हैं.

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ज्योतिषियों की मानें तो, अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में अबूझ मुहूर्त के रूप में भी जाना जाता है. अबूझ मुहूर्त का अर्थ होता है ऐसा शुभ समय, जिसमें किसी भी कार्य को करने के लिए अलग से पंचांग या विशेष मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है. यानी इस दिन पूरा समय ही शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि हर शुभ कार्य सिद्ध हो जाता है. यही वजह है कि इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार शुरू करना, सोना-चांदी खरीदना या निवेश करना बेहद शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं साल में कब-कब अबूझ मुहूर्त होता है और इस दौरान क्या-क्या काम किए जा सकते हैं.

अबूझ मुहूर्त कब-कब होता है?

1. अक्षय तृतीया

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यह सबसे प्रसिद्ध अबूझ मुहूर्त है. इस दिन विवाह, निवेश, नया काम शुरू करना और खरीदारी जैसे सभी शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे किए जा सकते हैं.

2. बसंत पंचमी
मां सरस्वती की उपासना का दिन बसंत पंचमी भी अबूझ मुहूर्त माना जाता है. इस दिन शिक्षा, कला और नए कार्यों की शुरुआत शुभ मानी जाती है.

3. विजयादशमी (दशहरा)
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक यह पर्व भी अबूझ मुहूर्त होता है. इस दिन नए कार्य, व्यापार और वाहन खरीदना शुभ माना जाता है.

4. देवउठनी एकादशी (तुलसी विवाह के बाद)
इस दिन से विवाह और मांगलिक कार्यों की शुरुआत शुभ मानी जाती है. इसे विवाह सीजन की शुरुआत भी कहा जाता है.

5. गुरु पुष्य योग (विशेष संयोग)
जब पुष्य नक्षत्र गुरुवार को आता है, तो इसे भी अत्यंत शुभ अबूझ मुहूर्त माना जाता है. इस दिन निवेश, खरीदारी और नए कार्य शुरू करना लाभदायक होता है.

क्यों माना जाता है इन्हें अबूझ मुहूर्त?

इन दिनों को इसलिए विशेष माना जाता है क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार इन तिथियों पर नकारात्मक प्रभाव कम और सकारात्मक ऊर्जा अधिक होती है. इसलिए, लोग बिना किसी ज्योतिषीय गणना के भी शुभ कार्य आरंभ कर सकते हैं. 

अबूझ मुहूर्त में क्या करें? 

अबूझ मुहूर्त में नया व्यवसाय, दुकान, स्टार्टअप या किसी भी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत करना बहुत शुभ माना जाता है. इससे काम में स्थिरता और सफलता मिलने की मान्यता होती है.

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इस समय विवाह, सगाई और अन्य पारिवारिक मांगलिक कार्य बिना मुहूर्त देखे भी किए जा सकते हैं. इसे रिश्तों की शुरुआत के लिए बेहद शुभ समय माना जाता है.

सोना-चांदी, जमीन, मकान या अन्य किसी संपत्ति में निवेश करना इस समय लाभदायक माना जाता है. माना जाता है कि ऐसे निवेश लंबे समय में अच्छा फल देते हैं.

अबूझ मुहूर्त में दान-पुण्य, पूजा-पाठ और मंदिर दर्शन करना विशेष फलदायी माना जाता है. इससे सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है.

इस समय वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान या अन्य कीमती वस्तुओं की खरीदारी भी शुभ मानी जाती है.

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