महाशिवरात्रि का पर्व केवल भगवान शिव की उपासना का दिन नहीं है, बल्कि यह पूरे शिव परिवार की एक साथ पूजा का दिन भी बन जाता है. वैसे भी शिवजी की पूजा कभी अकेले होती ही नहीं है. बल्कि शिवजी की पूजा, शिव पंचायत और शिव परिवार के साथ ही होती है. शिव पंचायत में पांच देवता शामिल हैं, जबकि शिव परिवार में उनके परिवार समेत उनके सभी गण भी शामिल हैं. कुछ तो बहुत प्रमुख रूप से और कुछ प्रतीकों के रूप में उनसे जुड़े हैं.
सबसे बड़ी बात है कि शिवजी के प्रतीक शिवलिंग में ही शिवजी का पूरा परिवार समाया हुआ है. इस तरह यह कहा जाता है कि शिवजी के अरघे में ही सारा शिव परिवार समाया हुआ है. इसे थोड़े और व्यापक तरीके से देखें तो शिवलिंग के अरघे में ही ब्रह्मांड की मौजूदगी मिलती है.
शिवलिंग में समाया है पूरा परिवार
महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शिवलिंग में केवल महादेव ही नहीं, बल्कि उनका पूरा परिवार विराजमान माना जाता है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार शिवलिंग का ऊपरी भाग स्वयं भगवान शिव का स्वरूप है. इसके चारों ओर स्थित गोल जलाधारी माता पार्वती का प्रतीक मानी जाती है, जो शक्ति और ऊर्जा का आधार हैं. जलाधारी के दाईं ओर भगवान गणेश और बाईं ओर भगवान कार्तिकेय का स्थान माना जाता है. वहीं, बीच की धारा वाली रेखा पर माता अशोक सुंदरी का वास बताया जाता है. शिवलिंग के निचले भाग को माता पार्वती का ‘हस्तकमल’ भी कहा जाता है. ऊपर से गिरती जलधारा शिव की जटाओं से निकली मां गंगा और मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का प्रतीक मानी जाती है.
शिवलिंग के ऊपर मौजूद नाग उनके गण वासुकि हैं, जो सभी नागजाति को साथ लेकर शिवजी के साथ मौजूद हैं. शिवलिंग के ठीक सामने शांत मुद्रा में बैठे नंदी हैं. माता पार्वती अपने वाहन सिंह के साथ हैं.
शिवलिंग के तीन मुख्य भाग हैं. इनमें ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों को देखा जाता है.
शिवलिंग का सबसे निचला भाग (ब्रह्म-भाग): यह चौकोर भाग सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा का प्रतीक माना जाता है.
मध्य भाग (विष्णु-भाग): यह अष्टकोणीय भाग, जिसे वेदी कहते हैं, पालनकर्ता भगवान विष्णु का प्रतीक है.
ऊपरी भाग (शिव-भाग): यह बेलनाकार भाग सबसे प्रमुख है, जो संहारकर्ता भगवान शिव को दर्शाता है.
इसलिए महाशिवरात्रि पर जब भक्त शिवलिंग पर जल, दूध या बेलपत्र अर्पित करते हैं, तो मान्यता है कि वे केवल शिव ही नहीं, बल्कि पूरे शिव परिवार की पूजा करते हैं. यही कारण है कि इस दिन की गई पूजा को विशेष फलदायी और घर में सुख-शांति लाने वाला माना गया है.
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