Kajari Teej 2024: कजरी तीज का व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त पूजन विधि और चंद्रोदय का समय

Kajari Teej 2024: कजरी तीज का व्रत व्रत गुरुवार, 22 अगस्त यानी आज रखा जाएगा. हिंदू पंचांग के अनुसार, कजरी तीज की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5:50 से सुबह 7:30 के बीच रहेगा.

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 कजरी तीज के दिन महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं. झूला झूलती हैं और भगवान शिव, माता पार्वती की पूजा करती हैं. कजरी तीज के दिन महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं. झूला झूलती हैं और भगवान शिव, माता पार्वती की पूजा करती हैं.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 5:30 AM IST

Kajari Teej 2024: आज कजरी तीज है. कजरी तीज उत्तर भारत में मनाए जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है. इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए निर्जला उपवास करती हैं. जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति की कामना के लिए व्रत रखती हैं. कजरी तीज के दिन महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं. झूला झूलती हैं और भगवान शिव, माता पार्वती की पूजा करती हैं. इस दिन नीमड़ी माता की पूजा का भी विधान है. आइए जानते हैं कि कजरी तीज पर आज पूजन विधि और शुभ मुहूर्त क्या है.

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कजरी तीज का शुभ मुहूर्त
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 21 अगस्त को शाम 5.06 बजे से 22 अगस्त को दोपहर 1.46 बजे तक रहेगी. कजरी तीज का व्रत व्रत गुरुवार, 22 अगस्त यानी आज रखा जाएगा. हिंदू पंचांग के अनुसार, कजरी तीज की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5:50 से सुबह 7:30 के बीच रहेगा.

स्नान और व्रत का संकल्प
कजरी तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. व्रत का संकल्प लेने के बाद मन ही मन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करें.

शिव-पार्वती की पूजन विधि
कजरी तीज पर पूजा के लिए साफ-सुथरा स्थान चुनें और वहां एक चौकी रखें. चौकी पर एक साफ कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें. भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियों या चित्रों को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर) से स्नान कराएं. इसके बाद जल से स्नान कराएं और उन्हें वस्त्र अर्पित करें. चंदन, रोली, मौली, सिंदूर, कुमकुम और फूलों से शिव-पार्वती का श्रृंगार करें. बेलपत्र, धतूरा, और पुष्प अर्पित करें. मिठाई और नैवेद्य का भोग लगाएं.

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नीमड़ी माता की पूजा
कजरी तीज के दिन नीमड़ी माता की पूजा भी की जाती है. इसके लिए दीवार पर मिट्टी व गोबर से एक तालाब जैसी आकृति बनाएं. इसके पास ही एक नीम की टहनी को रोप दें. तालाब में कच्चा दूध और जल डालते हैं और किनारे पर एक दीया जलाकर रखते हैं. फिर नीमड़ी माता को जल की छींटे दें और उन्हें रोली, अक्षत व मोली अर्पित करें. इसके बाद पूजा के कलश पर रोली से टीका लगाएं और कलावा बांधें. फिर नीमड़ी माता के पीछे दीवार पर अंगुली से मेहंदी, रोली और काजल की 13-13 बिंदिया लगाएं.

रोली और मेहंदी की बिंदी अनामिका अंगुली और काजल की बिंदी तर्जनी अंगुली से लगाएं. इसके बाद नीमड़ी माता को इच्छानुसार किसी एक फल के साथ दक्षिणा चढ़ाएं. फिर नीमड़ी माता से पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करें. इसके बाद किसी तालाब के किनारे दीपक के उजाले में नींबू, नीम की डाली, ककड़ी, नाक की नथ और साड़ी का पल्लू देखें. आखिर में चंद्रमा को अर्घ्य दें और सुख-संपन्नता के लिए प्रार्थना करें.

चंद्रोदय का समय
कजरी तीज पर शाम को नीमड़ी माता की पूजा के बाद चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, कजरी तीज के दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 20 मिनट पर होगा.

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