छठ पूजा भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है. ये त्योहार बिहार, उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में और नेपाल के भी कुछ भागों में मनाया जाता है. चार दिनों तक चलने वाला ये छठ पर्व सूर्य देवता को समर्पित है. इस पर्व में डूबते और उगते दोनों सूरज को अर्घ्य दिया जाता है. चौथे दिन, कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उदियमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है.
परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति में सुधार की कामना से महिलाएं ये व्रत करती हैं. छठ पर्व व्रत के दौरान भगवान सूर्य के उदय और अस्त होते समय अर्घ्य दिया जाता है. इसके साथ ही गंगा में डुबकी लगाकर ये त्योहार मनाया जाता है.
छठ में दूसरे अर्घ्य का क्या है महत्व?
छठ पर्व पर पहला अर्घ्य डूबते सूर्य को दिया जाता है. इस समय जल में दूध डालकर सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य दिया जाता है. इससे भगवान शिव और सूर्यनारायण की कृपा से उत्तम संतान का महावरदान मिलता है. वहीं इसके अगले दिन उगते सूरत को अर्घ्य दिया जाता है. सुबह के समय जल देने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है.
सुबह के समय सूर्यदेव को जल चढ़ाने से शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति बढ़ जाती है. सूर्य की रौशनी से मिलने वाला विटामिन डी शरीर में पूरा होता है और त्वचा के रोग कम होते हैं. भगवान सूर्य के अर्घ्यदान की विशेष महत्ता है. प्रतिदिन प्रात:काल रक्त चंदनादि से युक्त लाल पुष्प, चावल आदि ताम्रमय पात्र (तांबे के पात्र में) जल भरकर प्रसन्न मन से सूर्य मंत्र का जाप करते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पुष्पांजलि देनी चाहिए.
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