2019 के महाराष्ट्र चुनावों के बाद जब महाविकास अघाड़ी (MVA) का गठन हुआ था. बीजेपी संग गठबंधन में चुनाव लड़ चुकी शिवसेना एनडीए से अलग होकर तब विपक्षी सेक्युलर दलों के साथ जा मिली. महा विकास अघाड़ी में सबसे कमजोर कांग्रेस की ताकत महज तीसरे सहयोगी भर की ही रह गई थी. 288 सीटों वाली विधानसभा में उसके महज 44 ही विधायक थे. लेकिन कहा जाता है कि राजनीति अनंत संभावनाओं का खेल है. लोकसभा चुनावों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन के कारण कांग्रेस आज ऐसी स्थिति में है कि गठबंधन के लिए पार्टी अपने सीएम कैंडिडेट के नाम पर चुनाव लड़ना चाहती है. पांच साल पहले इसी राज्य में कांग्रेस डिप्टी सीएम तक की डिमांड नहीं कर सकती थी. पर मुश्किल यह है कि कांग्रेस की अतिमहत्वाकांक्षा के चलते कहीं ऐसा न हो कि महाविकास अघाड़ी में दरार पड़ जाए. क्योंकि उद्धव ठाकरे अभी अपने को भविष्य का सीएम मानकर चल रहे हैं. और सबसे बड़ी बात यह है शरद पवार भी इस बार कम में संतोष करने के मूड में नहीं हैं. आइये देखते हैं कि क्यों कांग्रेस की मजबूती महाविकास अघाड़ी की कमजोर कड़ी क्यों बन सकती है.
1-कांग्रेस अति उत्साह में सीएम पद के लिए कर रही दावा
इंडियन एक्सप्रेस अखबार के अनुसार महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए मुख्यमंत्री पद पर कांग्रेस अपनी नजरें गड़ाए हुए है.अभी कुछ दिनों पहले की ही बात है कि कांग्रेस विधायक दल के नेता बालासाहेब थोराट ने कहा था कि अगला मुख्यमंत्री कांग्रेस से होगा. फिर, नागपुर में हाल ही में हुए एक पार्टी कार्यक्रम में कई नेताओं ने राज्य कांग्रेस नेता नाना पटोले को महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री के रूप में पेश करने लगे. अगर लोकसभा चुनावों के रिजल्ट को देखें तो एमवीए के तीनों दलों में सबसे बेहतरीन प्रदर्श कांग्रेस का ही रहा है. जाहिर है कि 17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़कर 13 संसदीय सीटें जीतने वाली पार्टी उत्साह में तो रहेगी ही.
यही नहीं ऐसे दौर में जब केंद्र में दूसरी पार्टी की सरकार है सांगली के निर्दलीय सांसद विशाल प्रकाशबाबू पाटिल ने भी कांग्रेस को अपना समर्थन दिया है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने 21 सीटों पर चुनाव लड़ा और नौ लोकसभा सीटें जीतीं, जबकि शरदचंद्र पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने 10 सीटों में से आठ पर जीत हासिल की. एक्सप्रेस अपने सूत्रों के हवाले से लिखता है कि एमवीए में कांग्रेस कुल 288 में से 110-115 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है, जबकि शिवसेना (यूबीटी) के लिए 90-95 सीटें और एनसीपी (एसपी) के लिए 80-85 सीटें छोड़ रही है. हालांकि अभी तक कुछ भी तय नहीं हुआ है, लेकिन कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि पार्टी हाईकमान 100 सीटों से कम पर सहमत होने की संभावना नहीं है.
2- उद्धव ठाकरे कमजोर हुए, महत्वाकांक्षाएं नहीं
उद्धव ठाकरे को अपनी पार्टी और चुनाव चिह्न दोनों गंवानी पड़ी है . लोकसभा चुनावों में भी शिवसेना शिंदे उनसे केवल 2 सीटें कम है. इसके बावजूद ठाकरे खुद को महाराष्ट का अगला सीएम ही मानते हैं. 2019 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी-शिवसेना एक साथ चुनाव लडकर क्रमशः 105 और 56 सीटें जीतने में सफल हुए. पर उद्धव ठाकरे के सीएम बनने की जिद ने गठबंधन तोड़ दिया. उद्धव ठाकरे की यह जिद अभी भी बरकरार है. कांग्रेस द्वारा कराए गए आंतरिक सर्वेक्षणों से पता चला है कि उद्धव ठाकरे की लोकप्रियता एमवीए के भीतर घट रही है. इस बीच, उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात की और मुख्यमंत्री पद के फॉर्मूले में बदलाव की मांग की. उनका तर्क है कि सबसे अधिक सीटें पाने वाली पार्टी को मुख्यमंत्री पद देने का परंपरागत फॉर्मूला गठबंधन को कमजोर करता है.
हालांकि लोकसभा चुनावों के बाद एमवीए के भीतर समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. सर्वाधिक सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद, शिवसेना (यूबीटी) की स्थिति अब कमजोर मानी जा रही है. कांग्रेस ने 17 में से 13 सीटें जीतीं, जबकि शिवसेना (यूबीटी) ने 21 में से केवल 9 सीटें हासिल कीं. शरद पवार की एनसीपी ने 10 में से 8 सीटें जीतकर सबसे मजबूत स्थिति में खुद को बनाए रखा.
अगस्त की शुरुआत में, उद्धव ठाकरे सीट-बंटवारे पर चर्चा करने के लिए दिल्ली गए थे. कहा जा रहा है कि उन्होंने लगभग 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग की. हालांकि अब उनको अपनी ताकत का अंदाजा लग चुका है.
3-शरद पवार की ताकत आधी रह गई, पर सीएम पद पर कांग्रेस के दावे से कलह बढ़ेगी
महाराष्ट्र में पार्टी और चुनाव चिह्न उद्धव ठाकरे की तरह शरद पवार के हाथ से भी जा चुका है. पर ठाकरे की तरह पवार भी अपने को किसी से कम नहीं समझते हैं. अपने भतीजे अजित पवार को आने वाले विधानसभा चुनावों में हराने के लिए वो चाणक्य की तरह हर रोज नई नई योजनाओं पर काम कर रहे हैं. एनसीपी अजित पवार के मंत्रियों को हराने के लिए एक-एक कैंडिडेट पर काम कर रहे हैं. 2024 में महाविकास अघाड़ी के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, इसको लेकर एनसीपी शरद पवार पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार के संकेत से सियासी गर्मी बढ़ रही है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अभी कुछ दिनों पहले शरद पवार ने अपने एक और भतीजे रोहित पवार के लिए बैटिंग कर दी है. शरद पवार रोहित पवार के निर्वाचन क्षेत्र जामखेड तालुका के खारदा में विभिन्न विकास कार्यों के भूमिपूजन और समर्पण समारोह में पहुंचे थे, जहां उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कुछ ऐसी बातें कहीं जिसके बाद यह माना जाने लगा कि एनसीपी (SP) से रोहित पवार मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं. लोकसभा चुनावों में महाविकास अघाड़ी में सफलता का रेशियो सबसे अधिक एनसीपी शरद पवार का ही रहा . एनसीपी (एसपी) ने कुल 10 सीटों पर चुनाव लड़ा और 8 सीटों पर चुनाव जीतने में सफलता पवार की लोकप्रियता की दुहाई दे रही है.
4-अच्छी छवि वाले नेताओं की मौजूदगी से कांग्रेस एमवीए के अन्य सहयोगियों पर भारी
वर्तमान में, कांग्रेस ही एमवीए में एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसका पूरे महाराष्ट्र में व्यापक प्रभाव है और विभिन्न समुदायों के स्थानीय नेताओं की दूसरी पंक्ति भी तैयार है. एनसीपी ( शरद पवार ) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के बारे में ये नहीं कहा जा सकता. ये दोनों पार्टियों महाराष्ट्र के कुछ खास इलकाों में बहुत मजबूत हैं तो कुछ इलाकों में बेहद कमजोर हैं. इसके साथ ही इन पार्टियों के स्थानीय नेता खत्म हो चुके हैं. शिवसेना शिंदे और एनसीपी (अजीत पवार) की महाराष्ट्र में सरकार होने के चलते सारे मजबूत कार्यकर्ता और नेता इन पार्टियों में आ गए . शिवसेना उद्धव ठाकरे और एनसीपी शरद पवार के साथ अब मुट्ठी भर लोग ही रह गए हैं.
संयम श्रीवास्तव