केरल में एक 26 सेकंड के वीडियो ने न केवल एक निर्दोष आदमी की जान ले ली, बल्कि महिला सुरक्षा के गंभीर मुद्दे को भी सोशल मीडिया की सनसनीखेज दुनिया में दफन कर दिया. शिमजिथा मुस्तफा नामक एक महिला द्वारा बनाया गया यह वीडियो, जिसे उसने जानबूझकर वायरल करने की अपील की, एक ट्रेजडी में बदल गया. इस घटना ने दिखाया कि कैसे इंटरनेट पर वायरल होने की लालसा किसी के जीवन को तबाह कर सकती है और एक अहम और जरूरी सामाजिक बहस को गलत दिशा दे सकती है.
घटना 16 जनवरी 2026 को कोझीकोड से पय्यानुर जा रही एक भीड़भाड़ वाली बस में हुई. जिसमे सवार थी 35 वर्षीय शिमजिथा मुस्तफा. वो एक सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर है और पूर्व में पंचायत सदस्य रही है. उसने बस में रिकॉर्डेड अपने एक वीडियो के जरिये दावा किया कि एक व्यक्ति (दीपक यू) ने उन्हें कई बार अनुचित तरीके से छुआ. वीडियो की फ्रेम्स से पता चलता है कि बस में कई यात्री खड़े हैं. जिनके बीच खड़ी शिमजिथा एक आदमी को फोकस करते हुए मोबाइल कैमरे से रिकॉर्ड करती जा रही है. फिर उसे हाइलाइट करके बताया कि कैसे यह पुरुष उसे गलत ढंग से छू रहा था.
वीडियो में दिखता है कि बस हिल रही है, कई यात्री एक-दूसरे से सटे खड़े हैं. पुरुष का हाथ ऊपर उठा है, लेकिन फ्रेम्स देखकर साफ होता है कि शिमजिथा खुद उसकी ओर बढ़ीं, शायद वीडियो बनाने के लिए. उन्होंने वीडियो में कहा कि यह 'दुर्घटना या गलतफहमी नहीं, बल्कि गंभीर साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम' है. बाद में एक लंबे वीडियो (लगभग 2.45 मिनट) में उन्होंने सफाई दी कि यह व्यूज के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता के लिए है. उन्होंने कहा, 'इसका उद्देश्य अधिकतम लोगों तक पहुंचना था ताकि समाज और उनका परिवार पूछे, और व्यवहार सुधरे.' उन्होंने स्पष्ट रूप से वीडियो को वायरल करने की अपील की, ताकि 'समाज में शर्मिंदगी से बदलाव आए.' हालांकि, वीडियो देखकर लगता है कि संपर्क बस की भीड़ के कारण था, न कि जानबूझकर. यह भी देखने में आया कि वीडियो में शिमजिथा जरा भी असहज नहीं है, बल्कि मुस्कुरा रही है. यह वीडियो इंस्टाग्राम और फेसबुक पर वायरल हो गया. इसे दो मिलियन यानी 20 लाख बार देखा गया.
और हमेशा के लिए बुझ गया दीपक
41 वर्षीय सेल्स मैनेजर दीपक यू एक टेक्सटाइल कंपनी में काम करते थे. उन्हें शायद पता नहीं था कि वे बस में शिमजिथा नहीं, अपनी मौत के कारण के साथ सफर कर रहे हैं. गोविंदपुरम के रहने वाले दीपक अपने बुजुर्ग माता-पिता का एकमात्र सहारा थे. दोस्तों, सहकर्मियों और पड़ोसियों के मुताबिक, दीपक शराब या सिगरेट नहीं पीते थे. काम के बाद सीधे घर जाते थे, और जरूरतमंद की मदद करते थे. उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था. वीडियो वायरल होने के बाद दीपक पर सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग की बाढ़ आ गई. लोग उन्हें 'छेड़छाड़ करने वाला' कहकर अपमानित करने लगे. उनकी मां कन्यका ने शिकायत में कहा कि आरोप पूरी तरह झूठे थे, और वीडियो सिर्फ वायरल होने के लिए बनाया गया था. दीपक ने कहा था, 'इस अपमान के बाद जीने का कोई मतलब नहीं.' 18 जनवरी को उन्होंने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. बस के सीसीटीवी फुटेज और अन्य यात्रियों के बयानों से पता चला कि उनकी कोई गलती नहीं थी. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
महिला पर लगे आरोप, 14 दिन की हिरासत
शिमजिथा पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज हुआ. आरोप हैं कि उन्होंने व्यूज पाने की चाह में वीडियो बनाया. जानबूझकर दीपक को छुआ. और वायरल करने की अपील की. शिमजिथा मुस्लिम लीग सदस्य हैं, इसलिए कुछ ने इसको धार्मिक और राजनीतिक साजिश भी कहा. मौत के बाद वो अकाउंट डिलीट कर छिप गईं, लेकिन वडकारा में उसे गिरफ्तार कर 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. उसके मोबाइल की जांच हो रही है कि वीडियो एडिटेड था या नहीं. इंटरनेट पर गलत तरीके से वायरल होने की चाह का आरोप प्रमुख है. उन्होंने खुद कहा कि 'यह अधिकतम लोगों तक पहुंचे'.
'यह सचमुच की पीड़ित महिलाओं से भी अन्याय है'
दीपक की मौत के बाद केरल में उबाल आ गया. लोग सड़कों पर उतर आए, पुलिस स्टेशन पर प्रदर्शन हुए. शिमजिथा की गिरफ्तारी के दौरान भीड़ ने नारे लगाए: 'क्या अब दुख हो रहा है?', 'वायरल होना चाहती थी न?'. विरोध के नए नए तरीके अपनाए गए. एक वीडियो में एक शख्स क्रिकेट पैड्स जैसे आर्म गार्ड पहनकर बस में चढ़ते दिखा. ताकि किसी को छू देने के झूठे आरोप से बच सके. एक बुजुर्ग व्यक्ति ने बस में महिलाओं के कंधे पर हाथ रखकर कहा, 'अगर वे हमें छुएंगी, तो हम भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करना जानते हैं. सिर्फ महिलाएं नहीं, पुरुष भी कर सकते हैं.' यह बहस अब पुरुष अधिकारों की ओर मुड़ गई है, जहां झूठे आरोपों की शिकायतें बढ़ रही हैं. मानवाधिकार आयोग ने जांच के आदेश दिए, और राजनीतिक कार्यकर्ता हत्या का आरोप लगाने लगे.
सोशल मीडिया पर #JusticeForDeepak ट्रेंड हुआ, जबकि कुछ महिलाओं ने इसे असली उत्पीड़न की अनदेखी बताया. तमाम प्रतिक्रियाओं में सबसे अहम रही महिला अधिकार कार्यकर्ता डॉ. रंजना कुमारी की राय, जो इस घटना के बारे में कहती हैं कि महिला सुरक्षा जैसे बेहद जरूरी मुद्दे पर इस महिला ने जो किया, उसने कई लोगों को नुकसान पहुंचाया है. एक निर्दोष व्यक्ति के साथ जो हुआ, उसे सुधारा नहीं जा सकता. लेकिन यह उन असंख्य महिलाओं के साथ भी अन्याय है जिनके साथ रोज सचमुच बदसलूकी और छेड़छाड़ की वारदात होती है. काश ये महिला कानूनी रास्ता अपनाती तो इस मामले में दूध का दूध पानी होता. सोशल मीडिया का हथियार एक दोधारी तलवार है, जिसके वार का असर सुधारा नहीं जा सकता. एक बार तीर कमान से निकला, सो निकला.
क्या हासिल हुआ इस वीडियो से
यह घटना दिखाती है कि कैसे वायरल होने की लालसा ने महिला सुरक्षा जैसे जरूरी मुद्दे को फंदे पर लटका दिया. असली उत्पीड़न के मामलों में सोशल मीडिया मददगार है, लेकिन यहां यह हथियार बन गया. शिमजिथा ने जो किया, उससे एक शख्स की जान चली गई. एक परिवार तबाह हुआ, और बहस झूठे आरोपों पर सिमट गई. आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में पुरुष आत्महत्याएं महिलाओं से दोगुनी हैं, और झूठे मामले बढ़ रहे हैं. किसी वारदात या घटना की जांच और न्याय कानूनी प्रक्रिया से होना चाहिए, लेकिन ये सोशल मीडिया का जमाना है. यहां फैसला होने में तारीख पर तारीख नहीं होती. एक वीडियो वायरल हुआ और जिंदगी इधर से उधर. केरल की घटना ने पुरुष-महिला समानता की बहस छेड़ दी है. सवाल यह है कि यह घटना सकारात्मक बदलाव लाएगी, या और बंटवारा होगा?
धीरेंद्र राय