शशि थरूर के बाद कांग्रेस क्या सलमान ख़ुर्शीद को भी अब बीजेपी का सुपर प्रवक्ता बोलेगी?

कांग्रेस के लिए दुविधा यह है कि पार्टी सलमान खुर्शीद पर कार्रवाई करे या मौन हो जाए. जाहिर है कि कार्रवाई होने से आंतरिक असंतोष बढ़ेगा. यदि कार्रवाई नहीं की जाती, तो बीजेपी इसे कांग्रेस की कमजोरी और दिशाहीनता के रूप में प्रचारित करेगी.

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सलमान खुर्शीद, राहुल गांधी और शशि थरूर. सलमान खुर्शीद, राहुल गांधी और शशि थरूर.

संयम श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2025,
  • अपडेटेड 3:26 PM IST

ऑपरेशन सिंदूर में भारत को हुई हानि-लाभ का का आंकड़ा विपक्ष चाहे जितना भी पूछ ले, पर बीजेपी सरकार ने कांग्रेस पर जो गुगली फेंकी है उससे पार्टी समझ नहीं पा रही है कि कैसे निपटे? विदेशों में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में हिस्सा बने कांग्रेस नेता एक के बाद एक मोदी सरकार की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं. सबसे पहले इसकी शुरुआत कांग्रेस नेता शशि थरूर ने की थी. थरूर के के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने भी ऐसी बात की है जो कांग्रेस को पचेगी नहीं. खुर्शीद ने इंडोनेशिया में एक मीटिंग के दौरान जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले की तारीफ की है. जाहिर है कि खुर्शीद के इस बयान को भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पर हमला करने के लिए इस्तेमाल करेगी. बीजेपी ने इसे कांग्रेस के आंतरिक अंतर्विरोध और नेतृत्व की कमजोरी के रूप में पेश किया. जबकि कांग्रेस नेताओं ने खुर्शीद के बयान को पार्टी लाइन से हटकर बताया. जाहिर है कि आज नहीं तो कल कोई कांग्रेस नेता जरूर सलमान खुर्शीद को भी शशि थरूर की तरह बीजेपी का सुपर प्रवक्ता कह सकता है. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए एक्स पर लिखा है, क्या अब सलमान खुर्शीद को भी कांग्रेस नेता बीजेपी का सुपर प्रवक्ता बताएंगे? 

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हालांकि, खुर्शीद ने अपने बयान को राष्ट्रीय हित में कही गई बात बताई है, न कि बीजेपी के समर्थन में. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर वह भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, न कि किसी पार्टी का. यह रुख उन्हें पार्टी के भीतर कुछ हद तक बचाव प्रदान करता है. हालांकि, राशिद अल्वी जैसे नेताओं ने कार्रवाई की मांग की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी का एक धड़ा उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने के पक्ष में है.

सलमान खुर्शीद और शशि थरूर के बयान

हाल ही में, सलमान खुर्शीद ने इंडोनेशिया में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के तौर पर कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने से जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद की धारणा खत्म हुई और वहां समृद्धि आई है. उन्होंने अपनी बात को वजनदार बनाने के लिए जम्मू कश्मीर में 2019 के बाद हुए चुनावों में 65% मतदान और एक निर्वाचित सरकार के गठन को सकारात्मक बदलाव के रूप में उल्लेख किया. यह बयान कांग्रेस के पारंपरिक रुख से अलग था. खुर्शीद ने 2019 में कहा था कि अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ जोड़ने का रास्ता दिखाया था, और इसे हटाना एक गलत फैसला है.

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इसी तरह, शशि थरूर भी हाल के दिनों में पार्टी लाइन से हटकर बयान देने के लिए चर्चा में रहे हैं. थरूर ने भी ऑपरेशन सिंदूर और अनुच्छेद 370 के संदर्भ में केंद्र सरकार की कुछ नीतियों की तारीफ की थी, जिसके बाद कांग्रेस ने उनको बीजेपी का सुपर प्रवक्ता कहकर तंज कसा. बीजेपी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला और आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने खुर्शीद और थरूर के बयानों को कांग्रेस के नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी, के लिए चुनौती के रूप में पेश किया है.

कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और अंतर्विरोध

लगातार चुनावों में मिल रही हार के कारण कांग्रेस पार्टी लंबे समय से आंतरिक कलह और नेतृत्व को लेकर उठते सवालों से जूझ रही है. 2020 में 23 वरिष्ठ नेताओं (जी-23) द्वारा सोनिया गांधी को लिखे पत्र में संगठनात्मक सुधारों की मांग की गई थी, जिसमें सलमान खुर्शीद और शशि थरूर जैसे नेताओं के नाम भी शामिल थे. यह समूह पार्टी में अधिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सक्रिय नेतृत्व की मांग कर रहा था. जाहिर है कि राहुल गांधी और उनके करीबी नेताओं ने इस समूह को पार्टी के खिलाफ बगावत के रूप में देखा. 

खुर्शीद और थरूर जैसे नेताओं के हालिया बयान इस आंतरिक असंतोष को और उजागर करते हैं. कांग्रेस का एक धड़ा, जिसमें जयराम रमेश और राशिद अल्वी जैसे नेता शामिल हैं, खुर्शीद के बयानों से नाराज है. राशिद अल्वी ने कहा कि जो नेता बीजेपी की तारीफ करते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि उनका रुख पार्टी को कमजोर करता है. दूसरी ओर, खुर्शीद ने अपने बयान को राष्ट्रीय हित में दी गई प्रतिक्रिया बताया, न कि किसी राजनीतिक दल की नीति के समर्थन में दिया गया बयान. उन्होंने कहा कि हम भारत का प्रतिनिधित्व करने आए हैं, किसी राजनीतिक दल का नहीं.

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कांग्रेस के लिए दुविधा यह है कि पार्टी खुर्शीद पर कार्रवाई करे या मौन हो जाए. जाहिर है कि कार्रवाई होने से आंतरिक असंतोष बढ़ेगा. यदि कार्रवाई नहीं की जाती, तो बीजेपी इसे कांग्रेस की कमजोरी और दिशाहीनता के रूप में प्रचारित करेगी.

बीजेपी की रणनीति और सुपर प्रवक्ता का तंज

बीजेपी ने खुर्शीद और थरूर के बयानों को कांग्रेस के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है. बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, सलमान खुर्शीद भी स्वीकार करते हैं कि अनुच्छेद 370 के कारण 'पाकिस्तान-परस्ती' बढ़ रही थी. अमित मालवीय ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस खुर्शीद को भी थरूर की तरह निशाना बनाएगी. बीजेपी की यह रणनीति कांग्रेस को उसके ही नेताओं के बयानों के आधार पर घेरने की है, ताकि पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठाया जा सके.

'सुपर प्रवक्ता' वाले तंज को बीजेपी कांग्रेस नेताओं को उनके ही बयानों के आधार पर पार्टी के खिलाफ खड़ा दिखाने की कोशिश करती है. यह तंज पहले शशि थरूर के लिए इस्तेमाल किया गया था, और अब खुर्शीद के बयान के बाद इसे दोहराया जा रहा है. बीजेपी का यह कदम न केवल कांग्रेस के आंतरिक मतभेदों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वह विपक्ष की एकता को कमजोर करने के लिए हर अवसर का उपयोग करना चाहती है.

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सलमान खुर्शीद का इतिहास और उनकी स्थिति

सलमान खुर्शीद एक अनुभवी राजनेता और पूर्व विदेश मंत्री हैं, जिन्होंने कांग्रेस में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उनकी छवि एक बुद्धिजीवी और विचारशील नेता की रही है. हालांकि, उनके कुछ बयानों ने पहले भी विवाद खड़ा किया है. उदाहरण के लिए, 2018 में उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कहा था कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के धब्बे हैं. जिसके बाद पार्टी को सफाई देनी पड़ी थी.

2024 में, खुर्शीद के उस बयान पर विवाद हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश जैसे हालात भारत में भी हो सकते हैं. इस बयान पर बीजेपी ने कड़ा विरोध जताया और इसे अराजकतावादी करार दिया था. बीजेपी ने इसे कांग्रेस की भारत विरोधी मानसिकता के रूप में पेश किया. इन उदाहरणों से पता चलता है कि खुर्शीद के बयान कई बार पार्टीलाइन से काफी अलग हो जाते हैं, जिससे वह विवादों में घिर जाते हैं.

क्या कांग्रेस खुर्शीद को बीजेपी का सुपर प्रवक्ता कह सकेगी

यह सवाल कि क्या कांग्रेस शशि थरूर की तरह सलमान खुर्शीद को भी बीजेपी का सुपर प्रवक्ता कहेगी? कांग्रेस में इस समय नेतृत्व और रणनीति को लेकर मतभेद स्पष्ट हैं. राहुल गांधी और उनके करीबी नेताओं, जैसे जयराम रमेश, ने बार-बार बीजेपी की नीतियों का विरोध किया है, खासकर अनुच्छेद 370 और ऑपरेशन सिंदूर जैसे मुद्दों पर. खुर्शीद और थरूर जैसे नेताओं के बयान राहुल गांधी के रुख से अलग हैं, जिसे पार्टी का एक धड़ा बगावत के रूप में देखता है. हालांकि शशि थरूर और सलमान खुर्शीद में बड़ा अंतर भी है. सलमान खुर्शीद को कांग्रेस किसी भी कीमत पर शशि थरूर की तरह ट्रीट नहीं करेगी. इसका कारण खुर्शीद का मुसलमान होना है. खुर्शीद को सुपर प्रवक्ता कहना पार्टी के लिए जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि इससे आंतरिक मतभेद और गहरा सकते हैं.

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बीजेपी इस मुद्दे को जितना संभव हो, उतना भुनाने की कोशिश कर रही है. शहजाद पूनावाला और संबित पात्रा जैसे प्रवक्ताओं ने खुर्शीद के बयान को कांग्रेस की कमजोरी के रूप में पेश किया है. यदि कांग्रेस खुर्शीद को सुपर प्रवक्ता कहती है, तो यह बीजेपी के नैरेटिव को और मजबूत करेगा, क्योंकि यह दिखाएगा कि कांग्रेस अपने नेताओं को नियंत्रित नहीं कर पा रही है.
 

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