ओडिशा के मयूरभंज जिले के करंजिया फॉरेस्ट रेंज के मिलू गांव के पास हातिसालाबेड़ा जंगल में मंगलवार को एक खौफनाक घटना हुई. 48 वर्षीय माल्डे सोरेन अपनी पत्नी 41 वर्षीय लिली सोरेन के साथ जंगल में पत्ते और साग-सब्जी इकट्ठा करने गए थे. इसी दौरान उनका सामना अचानक छह जंगली भालुओं के समूह से हो गया.
भालुओं में से एक ने अचानक माल्डे पर हमला कर दिया और उसे बुरी तरह घायल कर दिया. भालू ने उसके सिर पर गहरे घाव कर दिए, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी होकर जमीन पर गिर गया. माल्डे खून से लथपथ हालत में पड़ा था और उसकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी.
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पति पर हमला, पत्नी ने नहीं छोड़ी हिम्मत
इस खतरनाक स्थिति में लिली सोरेन घबराकर भागी नहीं. वह अपने साथ लाई पारंपरिक कुल्हाड़ी लेकर भालू के सामने डटकर खड़ी हो गईं. उन्होंने बिना डरे भालू पर बार-बार वार किया. लिली के लगातार हमलों से भालू घायल हो गया और आखिरकार पीछे हट गया.
लिली की इस बहादुरी और तुरंत फैसले ने भालू को जंगल की ओर भागने पर मजबूर कर दिया. उनकी इस हिम्मत से माल्डे की जान बच गई और भालू आगे हमला नहीं कर पाया. इस दौरान लिली को भी हल्की चोटें आईं, लेकिन उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है.
गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती, अधिकारियों ने की तारीफ
घटना के बाद गांव के लोगों की मदद से माल्डे को पहले पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे प्राथमिक इलाज दिया गया. बाद में बेहतर इलाज के लिए उसे क्योंझर जिले के बड़े अस्पताल में रेफर किया गया. सिर में गंभीर चोट होने के कारण उसकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है.
करंजिया के रेंज अधिकारी प्रशांत कुमार स्वैन सहित वन विभाग के अधिकारियों ने लिली की बहादुरी की सराहना की है. अधिकारियों ने कहा कि इतने बड़े खतरे के सामने लिली का साहस काबिल-ए-तारीफ है.
ओडिशा में बढ़ रहे इंसान-जंगली जानवरों के टकराव
ओडिशा के जंगलों वाले इलाकों में इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं. खासकर भालुओं के साथ ऐसे हमले ज्यादा सामने आ रहे हैं. इसका कारण जंगलों में इंसानी दखल और जानवरों के लिए खाने की कमी को माना जा रहा है.
यह घटना न सिर्फ खतरे को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि मुश्किल हालात में साहस और तुरंत फैसला किसी की जान बचा सकता है. लिली सोरेन की बहादुरी को इलाके में लोग मिसाल के तौर पर देख रहे हैं.
अजय कुमार नाथ