'परीक्षा से 2 घंटे पहले छात्र को जेल से किया रिहा, वह खुद सेंटर नहीं पहुंचा', शहडोल मामले में नया मोड़, कलेक्टर ने दी सफाई

Shahdol Black Flag Row: शहडोल कलेक्टर केदार सिंह ने छात्र की परीक्षा छूटने के मामले में सफाई दी है. उन्होंने बताया कि छात्र को सुबह 7 बजे से पहले रिहा कर पुलिस की निगरानी में शहडोल पहुंचाया गया था, लेकिन वह खुद परीक्षा केंद्र नहीं पहुंचा.

Advertisement
शहडोल प्रशासन का दावा- रात में ही जारी हुए थे छात्र की रिहाई के आदेश. (Photo : Pexels) शहडोल प्रशासन का दावा- रात में ही जारी हुए थे छात्र की रिहाई के आदेश. (Photo : Pexels)

aajtak.in

  • शहडोल,
  • 12 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST

मुख्यमंत्री के काफिले को काले झंडे दिखाने के मामले में गिरफ्तार छात्र की 12 बोर्ड परीक्षा छूटने की खबरों पर कलेक्टर केदार सिंह ने सफाई जारी की है. प्रशासन का कहना है कि छात्र की परीक्षा का ध्यान रखते हुए उसे विशेष प्राथमिकता पर रिहा किया गया था, लेकिन छात्र ने खुद परीक्षा में शामिल न होने का विकल्प चुना. 

कलेक्टर ने बताया, ''जिले की धनपुरी नगरपालिका में कुछ असामाजिक तत्वों ने मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने और काले झंडे दिखाने की कोशिश की. काफिले की गाड़ियों के पीछे नारेबाजी करते हुए दौड़ रहे थे. उपद्रवी लोगों के हाथों में झंडे और डंडे थे. कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखकर तत्काल उनको मौके से गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी में छात्र भी शामिल था. 

Advertisement

घटना स्थल से गिरफ्तार किए गए उपद्रवियों को पुलिस द्वारा कानून एवं शांति बनाए रखने की दृष्टि से उनके खिलाफ केस दर्ज कर तहसीलदार के समक्ष पेश किया गया. तहसीलदार ने जमानत के अभाव में उन्हें जेल भेजा दिया. 

9 फरवरी को रात्रि करीब 8:30 बजे मुझे जानकारी प्राप्त हुई कि जो लोग गिरफ्तार किए गए हैं, उनमें एक 12वीं कक्षा का छात्र है और 10 फरवरी को उसे बोर्ड परीक्षा में शामिल होना है. मैंने बुढ़ार जेलर से कॉल पर छात्र की जानकारी प्राप्त की. तहसीलदार बुढ़ार से 9 फरवरी को ही रात्रि में रिहाई आदेश जारी किया गया, जो रात्रि 10:15 बजे जेल पर तामील किया गया. 

जेल नियमावली के अनुसार बंदियों को जेल से छोड़ने की कार्यवाही शाम को सूर्यास्त के बाद और प्रातः सूर्योदय के पहले नहीं की जा सकती. छज्ञत्र को सुबह 6:55 बजे जेल से रिहा किया गया. साथ ही उसे जेल प्रहरी ज्ञान द्वारा बुढ़ार बस स्टैंड से शहडोल के लिए बस में बिठाया गया और शहडोल तक आने के लिए 50 रुपये किराया नगद दिए गए. 

Advertisement

अजाक थाना शहडोल में पदस्थ आरक्षक अशोक धुर्वे भी बुढ़ार से उसी बस में शहडोल आ रहे थे, उनको बताया गया कि इसको शहडोल लेकर जाना है. धुर्वे के साथ वह करीब 8 बजे शहडोल पहुंच गया. 

छात्र ने आरक्षक के फोन से अपने किसी परिचित को बताया गया कि प्रवेश-पत्र लेकर सीधे परीक्षा केंद्र आ जाएं, वह भी सीधे परीक्षा केंद्र पर पहुंच रहा है, परंतु छात्र शहडोल में बस से उतरकर परीक्षा केंद्र पर नहीं गया और न ही वह परीक्षा में सम्मिलित हुआ.

छात्र जानबूझकर परीक्षा में शामिल नहीं हुआ. परीक्षा केंद्र में नहीं पहुंचने और परीक्षा में शामिल नहीं होने की पुष्टि 10 फरवरी को परीक्षा केंद्र अध्यक्ष और निरीक्षण दल से कराई गई. प्रमाणीकरण के साथ परीक्षा में शामिल छात्रों की सूची भी प्राप्त की गई.

यह भी पढ़ें: CM को काले झंडे दिखाने पर छात्र को भेजा जेल, 12वीं बोर्ड का पेपर छूटा; भीड़ पर कलेक्टर ने खुद भांजी लाठी

नाबालिग होने के संबंध में पुलिस और तहसीलदार कार्यालय में किसी प्रकार का दस्तावेज छात्र या उनके वकील या फिर अन्य किसी माध्यम से पेश नहीं किया गया. गिरफ्तारी के पहले और बाद में नाबालिग होने की किसी प्रकार की पुष्टि नहीं हुई. छात्र की ओर से कोई जमानत पेश नहीं की गई है, बल्कि उसकी परीक्षा को ध्यान में रखते हुए उसके मौखिक सूचना पर रिहा किया गया.''

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement