मध्य प्रदेश के सतना जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं. ताजा घटनाक्रम की जीवंत तस्वीर बेहद चौंकाने वाली है, जहां एक रेफर किया गया गंभीर मरीज 108 एंबुलेंस में कैद होकर रह गया और आखिरकार जिला अस्पताल की चौखट तक पहुंचने पर एंबुलेंस का गेट काफी जद्दोजहद के बाद खोला जा सका. जब मरीज को बाहर निकाला गया, तो उसकी सांसें थम चुकी थीं.
इस पर जिला अस्पताल के स्वास्थ्य महकमे की दलील है कि मरीज ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया था. जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती यह तस्वीर सतना जिला अस्पताल (सरदार वल्लभभाई पटेल अस्पताल) के गेट की है, जहां आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा वाहन (108) से गंभीर बीमार मरीज राम प्रसाद को रामनगर से सतना जिला अस्पताल रेफर किया गया था.
दरअसल, 67 वर्षीय रामनगर निवासी राम प्रसाद सुबह घर के बाहर आग तापते समय अचानक बेहोश हो गए थे. परिजनों ने उन्हें आनन-फानन रामनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया, जहां कुछ देर प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने 108 एंबुलेंस से सतना जिला अस्पताल रेफर कर दिया.
खस्ताहाल 108 एंबुलेंस राम प्रसाद को लेकर सतना जिला अस्पताल की चौखट तक तो पहुंच गई, लेकिन तब तक राम प्रसाद की मौत हो चुकी थी. विडंबना देखिए कि सरकारी 'आपातकालीन' सेवा (108) मरीज को लेकर जिला अस्पताल के गेट तक तो पहुंच गई, लेकिन वहां पहुंचते ही एंबुलेंस का दरवाजा जाम हो गया.
वीडियो में कैद तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं. मरीज अंदर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था और बाहर लोग लात-घूंसों व औजारों से एंबुलेंस का गेट तोड़ने की कोशिश कर रहे थे.
एंबुलेंस चालक को खिड़की के रास्ते अंदर घुसने की कोशिश करते भी देखा जा सकता है. काफी जद्दोजहद के बाद जब गेट जबरन खोला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
स्ट्रेचर पर बाहर निकलते ही डॉक्टरों ने राम प्रसाद को मृत घोषित कर दिया. इस मामले में अब स्वास्थ्य महकमा पल्ला झाड़ते हुए दलील दे रहा है कि मरीज की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में हो गई थी.
हालांकि, मामला प्रकाश में आने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी मनोज शुक्ला ने जिला समन्वयक अधिकारी को नोटिस जारी कर कार्रवाई की बात कही है.
वेंकटेश द्विवेदी