'पुलिस को इतना मत बेचो कि ईमानदार नौकरी न कर पाए...' ये आखिरी शब्द थे नीमच की कनावटी पुलिस लाइन में पदस्थ 50 वर्षीय हेड कांस्टेबल होशियार सिंह के. रविवार को उन्होंने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. उनका सुसाइड नोट अब मध्यप्रदेश पुलिस के गलियारों में चर्चा और विवाद का केंद्र बन गया है.
होशियार सिंह ने अपने 3 पन्नों के पत्र में जो आरोप लगाए हैं, वे चौंकाने वाले हैं. रक्षित निरीक्षक (RI) विक्रम सिंह भदौरिया और हेड कांस्टेबल प्रणव तिवारी पर ड्यूटी लगाने और रोजनामा लिखने के बदले 5 से 10 हजार रुपये मांगने का आरोप है.
आरोप लगाया कि एसपी साहब के ससुर की टिकट का पैसा हो या अधिकारियों के मनोरंजन का खर्च, सब लाइन की वसूली से भरा जाता है. पत्र में लिखा गया कि जो पैसा देगा, विभाग में उसी की सुनवाई होगी.
'पापा को जबरन प्रेशर में रखा गया'
होशियार सिंह की बेटी अर्पिता और पत्नी कमलेश देवी के बयानों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं. अर्पिता ने बताया कि पिता के चार ऑपरेशन हो चुके थे. वे अपनी छुट्टी बढ़वाने और हल्का काम मांगने गए थे, लेकिन उन पर लगातार ड्यूटी का दबाव बनाया गया.
बेटी ने सवाल उठाया कि पुलिस कह रही है कि जहर का पाउच डिस्पोजल में मिला, फिर पुलिस यह कैसे कह रही है कि उनकी जेब में भी जहर मिला? दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं. परिवार ने कंट्रोल रूम के सीसीटीवी कैमरे चेक करने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
'होशियार सिंह का रिकॉर्ड खराब था'
नीमच एसपी अंकित जायसवाल ने आरोपों को सिरे से खारिज तो नहीं किया, लेकिन मृतक के चरित्र और रिकॉर्ड पर सवाल जरूर उठाए: एसपी के अनुसार, पिछले 5 महीनों में होशियार सिंह 3 महीने से ज्यादा समय तक अनुपस्थित रहे. उन्होंने बताया कि 2009-10 में वे सेवा से पृथक भी रहे थे और उन पर शराब के नशे में अभद्र व्यवहार के पुराने आरोप हैं.
पुलिस कप्तान ने कहा कि सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग और लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी. उन्होंने "हार्ड ड्यूटी" की बात को शुरुआती जांच में नकारा है.
अजय बाड़ोलिया