मध्य प्रदेश के धार जिले के कुक्षी से शिक्षा विभाग और निर्माण एजेंसी की ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए. कुक्षी के शासकीय प्राथमिक विद्यालय क्रमांक-1 में साल 2019-20 में करीब 3 लाख 12 हजार रुपये की लागत से बालिका शौचालय का निर्माण कराया गया था.
भवन की बाहरी दीवार पर निर्माण राशि, एजेंसी, लागत और तिथि साफ-साफ दर्ज है और दरवाजे के ऊपर बड़े अक्षरों में “बालिका शौचालय” लिखा हुआ है. लेकिन जैसे ही दरवाजा खुलता है, तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है. अंदर का ढांचा पुरुषों के उपयोग के अनुसार बनाया गया है. इतना ही नहीं, शौचालय के भीतर भारी गंदगी फैली हुई है. यानी कागजों और दीवारों पर यह बालिकाओं के लिए बना शौचालय है, लेकिन हकीकत में इसका स्वरूप और उपयोग कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण के छह साल बाद भी शिक्षा विभाग और आरईएस (ग्रामीण इंजीनियरिंग सेवा) विभाग के किसी अधिकारी की नजर इस गंभीर खामी पर नहीं पड़ी. न निरीक्षण में गलती दिखी, न ही सुधार की कोई पहल की गई.
रविवार को एक जागरूक नागरिक ने इस पूरी स्थिति का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर नन्हीं बच्चियों के लिए बनाए गए इस शौचालय में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? क्या निर्माण के समय निगरानी नहीं हुई या फिर कागजों में ही सब कुछ पूरा मान लिया गया?
पूरे मामले पर डीपीसी सर्व शिक्षा अभियान प्रदीप खरे का कहना है कि मामला संज्ञान में आ गया है. उन्होंने बताया कि साल 2019-20 में निर्माण एजेंसी आरईएस विभाग द्वारा शौचालय बनाया गया था. यह निश्चित रूप से गंभीर गलती है. मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
रवीश पाल सिंह