चीतों का 'हाफ सेंचुरी' प्लस स्कोर: कूनो नेशनल पार्क अब केवल घर नहीं, दुनिया का सबसे सफल ब्रीडिंग सेंटर बना

Project Cheetah Success: प्रोजेक्ट चीता की बड़ी सफलता चर्चा में है. कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हो गई है. भारत में जन्मे 27 से ज्यादा शावकों ने इतिहास रच दिया है. जानें नामीबिया से बोत्सवाना तक का पूरा सफर...

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70 साल बाद भारत की धरती पर चीतों की फौज. (File Photo:ITG) 70 साल बाद भारत की धरती पर चीतों की फौज. (File Photo:ITG)

aajtak.in

  • श्योपुर,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:43 PM IST

मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क अब चीतों के लिए केवल एक घर नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे सफल 'ग्लोबल चीता ब्रीडिंग सेंटर' बनकर उभरा है. नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते यहां की जलवायु और इकोसिस्टम में पूरी तरह से रच बस गए हैं. कूनो की धरती अब आए दिन नन्हे शावकों की किलकारियों से गूंज रही है.

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विशेषज्ञों के अनुसार, यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और पर्याप्त शिकार चीतों के प्रजनन के लिए बेहद अनुकूल सिद्ध हुए हैं. मादा चीतों का लगातार शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि वे तनावमुक्त हैं और कूनो को अपना घर मान चुकी हैं.

प्रोजेक्ट चीता की प्रगति को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है:

कुल संख्या: कूनो में चीतों और शावकों की कुल संख्या अब 57 हो गई है.

स्वदेशी पीढ़ी: इनमें से 27 से अधिक शावकों का जन्म भारत की ही धरती पर हुआ है.

जेनेटिक माइलस्टोन: भारत में जन्मी मादा चीता 'मुखी' का वयस्क होकर शावकों को जन्म देना इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी वैज्ञानिक सफलता मानी जा रही है.

प्रोजेक्ट चीता की ऐतिहासिक टाइमलाइन

17 सितंबर 2022: पीएम मोदी ने नामीबिया से आए 8 चीतों को कूनो में छोड़कर दुनिया के पहले अंतरमहाद्वीपीय बड़े मांसाहारी स्थानांतरण प्रोजेक्ट की शुरुआत की.

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27 मार्च 2023: नामीबियाई मादा चीता ज्वाला (सियाया) ने 4 शावकों को जन्म दिया.यह 70 साल बाद भारत में जन्मे पहले चीते थे.

2024 - नया रिकॉर्ड: मादा चीता गामिनी ने एक साथ 5 शावकों को जन्म देकर रिकॉर्ड बनाया.

फरवरी 2026: प्रोजेक्ट को विस्तार देते हुए बोत्सवाना से 9 नए चीते लाए गए.

अप्रैल 2026: मादा चीता गामिनी, निर्वा और ज्वाला ने नए शावकों को जन्म दिया, जिससे कुनबा तेजी से बढ़ा.

शावकों के साथ मादा चीता आशा और ज्वाला.(File Photo:ITG)

भविष्य की तैयारी: गांधी सागर बनेगा दूसरा घर
कूनो पर बढ़ते दबाव और चीतों के बेहतर प्रबंधन के लिए अब प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के दूसरे घर के रूप में विकसित किया जा रहा है.विशेषज्ञों का मानना है कि कूनो की भौगोलिक परिस्थितियां चीतों के प्रजनन के लिए दुनिया में सबसे अनुकूल साबित हुई हैं.

आर्थिक और पर्यटन को नई दिशा
कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या से श्योपुर और आसपास के जिलों में वाइल्डलाइफ टूरिज्म को जबरदस्त बूस्ट मिला है.इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुले हैं और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है.

प्रमुख चीते और उनकी पहचान

ज्वाला: भारत में नई पीढ़ी की जननी.

गामिनी: 5 शावकों को जन्म देने वाली रिकॉर्डधारी मादा.

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मुखी: भारत में जन्मी पहली 'मदर' चीता (जेनेटिक मील का पत्थर).

अग्नि और वायु: बड़े क्षेत्र में सक्रिय रहने वाली नर चीतों की प्रसिद्ध जोड़ी.

नामकरण की विशेष व्यवस्था

 कूनो में चीतों की पहचान नाम, लिंग और मूल देश के आधार पर की जाती है.

 2022-23 में आए चीतों के विदेशी नामों को बदलकर भारतीय नाम दिए गए.

नामीबिया से आए प्रमुख चीते (2022)

 आशा- सफल मातृत्व का उदाहरण

 ज्वाला- भारत में 70 साल बाद शावकों को जन्म देने वाली

 पवन- घुमक्कड़ स्वभाव

 नाभा, धात्री- शांत व सतर्क

 गौरव और शौर्य- कोएलिशन बनाकर क्षेत्र विस्तार करने वाले

दक्षिण अफ्रीका से आए चीते (2023)

 मादा: गामिनी, निर्वा, वीरा, धीरा, दक्षा

 नर: अग्नि, वायु, तेजस, सूरज, उदय, प्रभास, पावक

 अग्नि और वायु की जोड़ी बड़े क्षेत्र में सक्रिय रही

भारत में जन्मी नई पीढ़ी

मुखी: भारत में जन्मी पहली मादा चीता जिसने आगे शावकों को जन्म दिया

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