MP: स्कूल की एक गलती, 23 सपनों पर ताला, 12वीं के छात्र नहीं दे पाए पहला बोर्ड पेपर

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के भीकनगांव स्थित श्री गायत्री विद्यापीठ स्कूल की लापरवाही से 23 छात्रों की परीक्षा फीस मंडल में जमा नहीं हो सकी. 12वीं के 10 छात्र अंग्रेजी का पहला पेपर नहीं दे पाए. नाराज अभिभावकों ने प्रदर्शन और चक्काजाम किया. प्रशासन ने मंडल को पत्र लिखकर अनुमति की मांग की है.

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नाराज अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया (Photo: Screengrab) नाराज अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया (Photo: Screengrab)

रवीश पाल सिंह

  • खरगोन,
  • 12 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:57 PM IST

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से निजी स्कूल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है. भीकनगांव स्थित श्री गायत्री विद्यापीठ हायर सेकेंडरी स्कूल ने 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के परीक्षा फॉर्म तो भरवा लिए, लेकिन माध्यमिक शिक्षा मंडल में परीक्षा फीस समय पर जमा नहीं कराई. इसका खामियाजा 23 छात्रों को भुगतना पड़ा.

बताया गया कि 12वीं के 10 छात्र अंग्रेजी का पहला पेपर नहीं दे सके. परीक्षा से ठीक एक दिन पहले छात्रों को जानकारी मिली कि उनकी फीस जमा नहीं हुई है. 12वीं के छात्र पीयूष दिलावरे ने बताया कि वे जेईई की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन पेपर छूटने से उनका पूरा साल बर्बाद होने का डर है. वहीं छात्रा उज़्मा खान, जो नीट की तैयारी कर रही हैं, उन्होंने कहा कि सालभर की मेहनत के बाद परीक्षा में न बैठ पाना बेहद पीड़ादायक है.

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स्कूल प्रबंधन की चूक से 23 छात्रों की परीक्षा फीस नहीं हुई जमा

मामला सामने आते ही सैकड़ों अभिभावक स्कूल के बाहर इकट्ठा हो गए. उन्होंने प्रदर्शन किया और हाईवे पर चक्काजाम कर दिया. अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने समय पर पूरी फीस जमा कर दी थी, फिर भी बच्चों को परीक्षा से वंचित होना पड़ा.

नाराज अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर हाईवे किया जाम

जिला शिक्षा अधिकारी शैलेंद्र कानूड़े ने स्वीकार किया कि स्कूल ने 23 छात्रों की फीस समयसीमा में जमा नहीं की. मंडल ने देर से फीस स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. अब आगे की परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दिलाने के लिए मंडल सचिव को पत्र लिखा गया है. साथ ही स्कूल की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा भी की गई है. स्कूल प्रबंधन ने बाद में करीब 3 लाख 73 हजार रुपये का चालान जमा किया, लेकिन तब तक अंग्रेजी का पेपर हो चुका था. अब छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है.

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