MP में पहली बार बना 350 KM लंबा ग्रीन कॉरिडोर, 4 घंटे में जबलपुर से भोपाल पहुंचाया लिवर

मध्य प्रदेश के जबलपुर से भोपाल तक एक ब्रेन डेड पेशेंट के लिवर को ले जाने के लिए 350 किलोमीटर लंबार ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. इसके बाद लिवर को 4 घंटे में जबलपुर से भोपाल पहुंचा दिया गया. बता दें कि यहां 64 साल के बुजुर्ग को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था. इसके बाद परिजनों ने अंगदान का फैसला लिया.

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MP में बनाया गया 350 KM लंबा ग्रीन कॉरिडोर. MP में बनाया गया 350 KM लंबा ग्रीन कॉरिडोर.

धीरज शाह

  • जबलपुर,
  • 22 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 1:08 PM IST

मध्य प्रदेश में जबलपुर से भोपाल के बीच अब तक का सबसे बड़ा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. दरअसल, जबलपुर के प्राइवेट अस्पताल से देर रात ब्रेन डेड मरीज के लिवर को भोपाल ले जाया गया. इसके लिए करीब 350 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया. इसमें यातायात पुलिस की पूरी टीम जबलपुर से भोपाल तक एंबुलेंस को सुरक्षा देती रही.

जानकारी के अनुसार, भोपाल के निजी अस्पताल की टीम लीवर रिट्रीट करने के लिए जबलपुर के अस्पताल में हेलीकॉप्टर से पहुंची थी. डॉक्टरों की योजना के मुताबिक, हेलीकॉप्टर से ही ब्रेन डेड मरीज के अंगों को भोपाल ले जाना था, लेकिन मौसम खराब होने की वजह से हेलीकॉप्टर वापसी में उड़ान नहीं भर सका. इसके बाद सड़क मार्ग से ही मरीज के अंगों को ले जाने का फैसला किया गया.

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प्रदेश शासन की मदद से जबलपुर से भोपाल के बीच देर रात ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया और करीब साढ़े तीन सौ किलोमीटर का सफर 4 घंटे में पूरा हो गया. दरअसल, 64 साल के बुजुर्ग राजेश सराफ को मार्च महीने में ब्रेन ट्यूमर डिटेक्ट हुआ था. कई डॉक्टरों से इलाज कराने के बावजूद उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ.

64 साल के बुजुर्ग को घोषित कर दिया गया था ब्रेन डेड

इसके बाद ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित राजेश सराफ की हालत 19 सितंबर को उनकी हालत खराब होने लगी. परिजनों ने उन्हें जबलपुर के निजी अस्पताल में दाखिल कराया. इलाज के दौरान राजेश के ब्रेन ने काम करना बंद कर दिया था. इसके बाद परिजनों से उनके अंगों को दान करने का फैसला लिया.

जब इस बारे में जानकारी अन्य अस्पतालों तक पहुंचाई गई तो पता चला कि भोपाल में एक मरीज को अंगों की जरूरत थी. इसके बाद भोपाल के डॉक्टरों की टीम जबलपुर पहुंची और अपनी निगरानी में मरीज के अंगों को निकाला और ग्रीन कॉरिडोर के जरिए भोपाल ले गए. जहां अब दूसरे मरीज की जिंदगी बचाई जा सकेगी.

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