दिग्विजय सिंह ने पार्टी में मुख्यमंत्री पद की रेस को लेकर कयासबाजियों पर विराम लगाते हुए ये भी साफ किया कि कमलनाथ ही विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का चेहरा होंगे. दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए सत्ताधारी बीजेपी पर भी जमकर हमला बोला, सीएम शिवराज सिंह चौहान को भी निशाने पर रखा.
उन्होंने विकास यात्रा को बीजेपी की यात्रा बताया और कहा कि लोगों को धमकाया जा रहा है. बच्चों को स्कूल बंद करके इस यात्रा में शामिल कराया जा रहा है. दिग्विजय सिंह ने प्रदेश सरकार पर सूबे के करदाताओं के पैसे का दुरूपयोग करने का आरोप लगाया और कहा कि सीएमओ और पंचायत सचिवों को भोजन, माइक और पंडाल लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
दिग्विजय सिंह ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत का दावा करते हुए कहा कि इस बार बिकाऊ नहीं, टिकाऊ माल आएगा. उन्होंने सियासत में संतों की एंट्री को लेकर बीजेपी को घेरा और कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. बीजेपी धर्म को हथियार बनाती है. दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिंदू राष्ट्र के मुद्दे पर बीजेपी के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से पूछिए. जो संविधान की शपथ लेते हैं, उनसे पूछिए कि वह किसके पक्ष में हैं.
उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी हमला बोला. दिग्विजय सिंह ने कहा कि शिवराज की वर्किंग स्टाइल एकदम रद्दी है. शिवराज सिंह चौहान को खुद ही खुद को नसीहत देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार फैला है. खुद मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में भ्रष्टाचार चरम पर है. सलकनपुर मंदिर में चोरी हुई, डकैती हुई, इसका पता अबतक नहींव चल पाया. मुख्यमंत्री को शर्म आनी चाहिए.
मिलकर लड़े तो नहीं हारेगी कांग्रेस
इससे पहले, दिग्विजय सिंह के सामने ही कांग्रेस के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए. दिग्विजय सिंह को भी भड़के कार्यकर्ताओं को शांत कराने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. उन्होंने कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाया और ये भी संदेश दे दिया कि अब गुटबाजी नहीं चलेगी. दिग्विजय सिंह ने कौन तेरा, कौन मेरा करने की जगह एकजुट होकर चुनावी लड़ाई में जाने का संदेश दिया और कहा कि अगर हम मिलकर लड़े तो कांग्रेस कोई चुनाव नहीं हारेगी.
गौरतलब है कि इस सल के अंत तक मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. विपक्षी कांग्रेस विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है. दिग्विजय का बिकाऊ और टिकाऊ को लेकर आया ये बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछली बार चुनाव बाद बनी कांग्रेस सरकार की 15 महीने में ही विधायकों की बगावत के कारण विदाई हो गई थी.
शिवराज ने सिंधिया को दी थी सरकार की क्रेडिट
ज्यातिरादित्य सिंधिया के गुट के विधायकों ने कांग्रेस से बगावत कर दी थी जिसके बाद महज 15 महीने पुरानी कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई और उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को सरकार का श्रेय दिया था. शिवराज ने कहा था कि आज सिंधिया की बदौलत सीएम हूं.
लोमेश कुमार गौर