भोपाल स्मारक अस्पताल और अनुसंधान केंद्र (BMHRC) के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग में 36 वर्षीय महिला की एक दुर्लभ और जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई. सर्जरी के दौरान महिला के पैन्क्रियाज से 15 से अधिक स्टोन निकाले गए, जिनमें कुछ स्टोन का आकार लगभग 2 सेंटीमीटर तक था. विशेषज्ञों के अनुसार, पैन्क्रियाज में इतनी अधिक संख्या में स्टोन मिलना असामान्य और चिकित्सकीय रूप से गंभीर स्थिति मानी जाती है. मरीज की हालत में काफी सुधार है और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है.
बीएमएचआरसी के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग में सहयक प्रोफेसर डॉ. विशाल पाटिल ने बताया कि उत्तर प्रदेश के चित्रकूट की रहने वाली यह मरीज़ बीते क्रॉनिक पैन्क्रियाटाइटिस विद पैन्क्रियाटिक डक्ट स्टोन की समस्या से जूझ रही थींं. उन्हें लंबे समय से पेट में असहनीय दर्द रहता था. सीटी स्कैन एवं एमआरसीपी जांच के दौरान पैन्क्रियाज में स्टोन की पुष्टि हुई.
पैन्क्रियाज पेट के पीछे स्थित एक महत्वपूर्ण अंग है, जो पाचन क्रिया और शुगर नियंत्रण से जुड़े हार्मोन बनाता है. लंबे समय तक पैन्क्रियाज में सूजन रहने पर उसकी नली में स्राव गाढ़ा हो जाता है, जिससे धीरे-धीरे स्टोन बनने लगते हैं. इस बीमारी के प्रमुख कारणों में लंबे समय तक शराब का सेवन, धूम्रपान, बार-बार पेट की सूजन, हार्मोनल असंतुलन, आनुवंशिक कारण, लंबे समय तक पाचन संबंधी समस्या, पोषण की कमी आदि हो सकते हैं.
डॉ पाटिल ने बताया कि मरीज की लेटरल पैन्क्रियाटिकोजेजुनोस्टॉमी सर्जरी की गई. इस केस की सबसे खास बात यह रही कि पैन्क्रियाज़ में 15 से अधिक स्टोन पाए गए, जो सामान्य मामलों की तुलना में काफी अधिक हैं.
इतनी संख्या में स्टोन होने से मरीज को लगातार तेज दर्द, पाचन में बाधा और भविष्य में गंभीर जटिलताओं का खतरा रहता है. समय पर सर्जरी से मरीज को राहत मिली है. सर्जरी में एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कनिका सुहाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही.
बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसे मामलों में मरीज लंबे समय तक दर्द और अनिश्चितता में जीता है. बीएमएचआरसी में हमारा प्रयास रहता है कि जटिल से जटिल स्थिति में भी मरीज को सुरक्षित इलाज और बेहतर जीवन की ओर लौटने का अवसर मिले. यह सर्जरी उसी प्रयास का परिणाम है.
पैन्क्रियाज में स्टोन से बचाव के उपाय
* लंबे समय तक पेट या पीठ में दर्द होने पर उसे नजरअंदाज न करें
* संतुलित और पोषक आहार लें, अत्यधिक तला-भुना भोजन कम करें
* बार-बार पेट की सूजन या पाचन समस्या होने पर विशेषज्ञ से जांच कराएं
* कैल्शियम और पोषण से जुड़ी जांच समय-समय पर कराते रहें
* चिकित्सकीय सलाह के बिना दवाइयों का लंबे समय तक सेवन न करें
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