म्यूजिक इंडस्ट्री में कुछ आवाजें ऐसी होती हैं जो सिर्फ कानों को नहीं, सीधे दिल को छूती हैं. ऐसी ही एक जादुई आवाज है हरिहरन की. साहित्य आजतक 2026 के मंच पर दिग्गज सिंगर की शानदार जर्नी को सेलिब्रेट किया गया. हरिहरन की गजलों पर आनंद कक्कड़ ने जो किताब लिखी है 'उस्ताद-ए-ग़ज़ल हरिहरन' उसपर भी चर्चा की गई. हरिहरन ने साहित्य आजतक के मंच पर अपनी जर्नी से जुड़े कई अनसुने किस्से साझा किए. साथ ही अपनी गजलों से कार्यक्रम में जान डाल दी.
गजलों पर कैसे लिखी गई किताब?
श्वेता सिंह के साथ हुई बातचीत के दौरान, हरिहरन और आनंद ने म्यूजिक, गजल की दुनिया और इस सुरीले सफर के बारे में कुछ बहुत ही गहरी बातें शेयर कीं. हरिहरन से उनकी गजलों पर लिखी किताब पर सवाल किया गया कि गीत सुनते हैं, लेकिन किताब में गीत पढ़ना होगा. गजलों को किताब में ढालने का उनका एक्सपीरियंस कैसा रहा? इसपर हरिहरन ने कहा- मैंने कभी नहीं सोचा था कि किताब लिखी जाएगी. हम तो काम करते जा रहे हैं और इतना प्यार मिलता है.
हरिहरन ने कहा- एक दिन आनंद भाई आए मेरे पास और कहने लगे कि एक आइडिया है. आपकी गजल का जो दौर है, जो काम आपने किया है उसपर लिखा जाए. मैंने पूछा-ये तो बहुत लंबा होगा, क्योंकि 300-400 गजलें हमने कंपोज की है. हालांकि, आइडिया मुझे लगा. फिर आनंद जी ने अपनी रिसर्च दिखाई और उस वक्त पहली बार मैंने अपनी गजलों का प्रिंट देखा तो मैं सरप्राइज हुआ और मुझे मजा भी आया. फिर उन्होंने कहा हर महीने 2-3 दिन दीजिए और इस तरह से गजलों का किताब तक ढलने का सफर शुरू हुआ.
सवाल किया गया कि गजल की दुनिया में एक बड़ा सवाल हमेशा रहा है कि गजल गायिकी का आगे क्या होगा? क्या हम सिर्फ पुराने लेजेंड्स को मिमिक करेंगे? ओरिजनल गजल का क्या होगा? इसपर आनंद ने कहा कि गजल में मौलिकता की बहुत कमी हो गई थी, लेकिन हरिहरन ने इसे संभाला. हरिहरन फिल्म 'गमन' से लेकर आज तक हर बड़ी रिलीज में शामिल रहे हैं. उन्होंने पुरानी परंपराओं की इज्जत करते हुए यह रास्ता निकाला कि गजल को आम पब्लिक तक कैसे ले जाया जाए. गजल गायिकी के संसार पर लिखी गई किताब में गजल की अलग-अलग शैलियों और पुराने घरानों का जिक्र किया गया है. गजल में अब एक 'पांचवे घराने' का उदय हुआ है और वो घराना हैं खुद हरिहरन साहब. उन्होंने गजल को एक नई पहचान और एक नया स्टाइल दिया है.
गजल के बारे में क्या बोले हरिहरन?
हरिहरन का खुद का मानना है कि शब्द के पीछे जो असली जादू है. वो गायिकी और सुर का है. उनका कहना है कि शब्द को लेकर हम सुर भरते हैं और वो और भी जाग्रित हो जाता है. इस बात को साबित करने के लिए उन्होंने "गुजर गया यारों" गाकर इसका उदाहरण भी दिया. उनके मुताबिक, गजल सिर्फ पोएट्री है, यह कोई फिक्स्ड म्यूजिक नहीं है. इसे किसी भी अंदाज में गाया जा सकता है. गजल के इतिहास पर बात करते हुए उन्होंने बेगम अख्तर का खास जिक्र किया. उन्होंने कहा कि एक वक्त था जब गजलें सिर्फ छोटे प्लेटफॉर्म्स तक सीमित थीं. हरिहरन ने बताया कि यह बेगम अख्तर ही थीं, जिन्होंने गजल को बड़े स्टेज तक पहुंचाया. उनके कॉन्ट्रिब्यूशन की वजह से ही गज़ल गायिकी को वो रिस्पेक्ट और प्लेटफॉर्म मिला जो आज हम देखते हैं.
लखनऊ कनेक्शन और अवॉर्ड्स पर बोले हरिहरन
हरिहरन की तारीफ में आनंद बोले- उनका करियर ग्राफ हमेशा से शानदार रहा है. 1977 में यूपी सरकार की तरफ से उन्हें जर्नलिस्टिक अवॉर्ड मिला और 1997 में उन्होंने लखनऊ के एक खास इवेंट में शिरकत की. उन्होंने यह भी माना कि फिल्मों के अलावा, प्राइवेट गजल सिंगिंग ने उन्हें एक अलग और यूनिक पहचान दी है.
वहीं, हरिहरन ने बताया कि जिस गजल ने उन्हें असली पहचान दिलाई, वो फिल्म 'गमन' की थी- "मैं अपने साए से कल डर गया यारों...". यही वो मोड़ था जहां से उनकी आवाज और उनका यह 'पांचवां घराना' लोगों के दिलों में बस गया.
हरिहरन की म्यूजिक फिलॉसफी बहुत क्लियर है. उनका मानना है कि शब्द के पीछे जो असली जादू है, वो गायिकी और सुर का है. उनका कहना है- शब्द को लेकर हम सुर भरते हैं और वो और भी जाग्रित हो जाता है. इस बात को साबित करने के लिए उन्होंने सिर्फ बोला नहीं, बल्कि अपनी रूहानी आवाज में "गुजर गया यारों" गाकर इसका उदाहरण भी दिया. उनके मुताबिक, जब शब्दों में सुर मिलते हैं, तभी वो पोएट्री एक इमोशन बन जाती है.
सरहद पार: लाहौर में रंग, हरिहरन के संग
आनंद ने बताया कि गजल सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं है, यह पूरी दुनिया में सुनी जाती है. हरिहरन ने इस दायरे को और बढ़ाया. वो पहले ऐसे कलाकार बने जिन्होंने इंटरनेशनली रिकॉर्ड किया और बड़े उस्तादों के साथ काम किया. उन्होंने संगीत के लिए सीमाएं लांघ दीं और पाकिस्तान जाकर वहां दो महीने रहे. वहां उन्होंने लाहौर और कराची के म्यूजिशियंस के साथ एक एल्बम रिकॉर्ड किया, जिसका नाम था- 'लाहौर में रंग, हरिहरन के संग'. हरिहरन ने वहां की चीजों को गहराई से समझा और अपनी गायिकी में इनकॉर्पोरेट किया. इसमें एक बहुत ही खूबसूरत सूफियाना कलाम भी शामिल है- "मोहे अपने ही रंग में रंग दे...".
हरिहरन की 'जान मेरी' एल्बम हुई लॉन्च
मंच से हरिहरन ने अपने ऊपर लिखी गई किताब 'उस्ताद-ए- गजल - हरिहरन' को लॉन्च किया. इस किताब को आनंद ने लिखा है. अपनी ही किताब को देख हरिहरन काफी हैरान और भावुक नजर आए. उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा- 'मैं साउथ इंडिया से हूं और गजल की दुनिया में ये किताब मेरे लिए एक बहुत बड़ी टेस्टिमनी (testimony) है.' वहीं, आनंद ने इस मौके पर कहा कि यह किताब एक ब्रीज की तरह काम करेगी. उन्होंने हरिहरन की तारीफ करते हुए कहा कि ऐसे कलाकार सदियों में एक बार पैदा होते हैं.
किताब के साथ-साथ इसी मंच से हरिहरन का नया गजल एल्बम 'जान मेरी' भी रिलीज किया गया. इसे सूफीस्कोर (Sufiscore) पर सुना जा सकेगा. इस एल्बम में फरहत की लिखी पांच गजलों का खूबसूरत संकलन है. इस मौके पर गजल का वीडियो भी अनवील किया गया, जो दर्शकों के लिए एक विजुअल ट्रीट है.
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