साहित्य आजतक 2019: सेंसर बोर्ड अध्यक्ष बनकर भी कैसे विवादों से बचे प्रसून जोशी, बताया फॉर्मूला

2019 साहित्य आजतक: प्रसून जोशी ने साहित्य आजतक 2019 में बताया कि क्यों उनके सेंसर बोर्ड अध्यक्ष रहते हुए कम विवाद हो रहे हैं. साथ ही प्रसून जोशी ने CBFC अध्यक्ष बनने की चुनौती के बारे में बताया.

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साहित्य आजतक: प्रसून जोशी साहित्य आजतक: प्रसून जोशी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 8:10 AM IST

मशहूर गीतकार, कवि और सेंसर बोर्ड अध्यक्ष प्रसून जोशी ने साहित्य आजतक 2019 में शिरकत की. कार्यक्रम में प्रसून जोशी ने बताया कि क्यों उनके सेंसर बोर्ड अध्यक्ष रहते हुए कम विवाद हो रहे हैं. साथ ही प्रसून जोशी ने CBFC अध्यक्ष बनने की चुनौती के बारे में बताया.
 
सेंसर बोर्ड अध्यक्ष प्रसून का विवादों से बचने का फॉर्मूला
प्रसून जोशी से में फिल्मों को पास करने पर कहा- ''मैं मानता हूं कि एक कलाकार समाज को नुकसान पहुंचाने के लिए कलाकार नहीं बनता. इससे पहले मुझे अंदाजा नहीं था कला को किसी और नजरिए से देखने का. लेकिन सेंसर बोर्ड बनने के बाद मैंने अलग नजरिए से चीजों को देखना शुरू किया. मैंने लोगों के नजरिए से चीजों को देखना शुरू किया.''

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''मैंने विवादों की जगह विचार विमर्श का सहारा लिया. मुझे लगता है कि फिल्म इंडस्ट्री के लोगों ने मेरी बातों को सुना. इसलिए मेरे सेंसर बोर्ड अध्यक्ष कार्यकाल में आपको विवाद कम सुनने को मिले.''

सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष बनना चुनौती का काम
प्रसून जोशी ने कहा- ''जब मैं सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष बना था तब कई लोगों ने मुझे कहा था कि ये तो सिरदर्द का काम है. आपने ये जिम्मेदारी क्यों ली? मुझे ये लगा कि हम लोग आलोचना तो बहुत करते हैं लेकिन जब करने का वक्त आता है तो भाग जाते हैं. मुझे लगा कि ये एक चुनौती है.''

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