साहित्य आजतक 2018 के एक अहम सत्र में एक्टर आशुतोष राणा ने शिरकत की. इस सेशन को एंकर श्वेता सिंह ने मॉडरेट किया. उन्होंने अपनी हाल ही में आई बेस्ट सेलर बुक पर बात की. सेशन की शुरुआत उन्होंने अपनी किताब के व्यंग्य 'चित्त और वित्त' से की.
राणा ने व्यंग्य पाठन के दौरान कहा- किसी के चित्त में जगह बनानी हो तो उसका वित्त फंसा लो. चित्त के संबंध चलें न चलें, लेकिन वित्त के जरूर चलते हैं. वित्त में चित्त का वास होता है. उन्होंने कहा कि नवंबर का महीना वित्त के लिहाज से कोई नहीं भूल सकता.
राणा ने बताया कि यह पूरी किताब उन्होंने मोबाइल पर लिखी है. टाइप करके लिखी न कि बोलकर. उन्होंने बताया कि मोबाइल की स्क्रीन छोटी होती है, उन्हें चश्मा भी लगा है, इन सब कठिनाइयों के बीच उन्होंने इसे लिखा.
आशुतोष राणा ने अपनी पत्नी और एक्ट्रेस रेणुका शहाणे के बारे में कहा कि हम दोनों विपरीत ध्रुव हैं. वे अर्बन हैं और मैं ठेठ ग्रामीण, वे पंक्चुअल और मैं बेतरकीब, वे रात को 10 बजे किसी का फोन आने पर उसका नंबर ब्लॉक कर देती हैं और मेरी दिनचर्या ही रात 10 बजे शुरू होती है. मैं कविता प्रेमी हूं और उन्हें कविता बिल्कुल पसंद नहीं.
आशुतोष राणा ने बताया कि वे शादी से पहले रेणुका को रात बजे के बाद ही फोन करते थे और वे संहर्ष उसे लेती थीं. हम दो-दो तीन-तीन घंटे तक बात करते रहते थे. एक बार जब वे गोवा में शूटिंग कर रही थीं तो मैंने उन्हें एक कविता सुनाई, इसके बाद उन्होंने कहा-राणजी मैं आपके प्रेम में हूं. मैंने कहा मिलकर बात करते हैं. आज हमारी शादी को 17 साल हो चुके हैं.
आशुतोष राणा ने बाताया, "कॉलेज के दिनों में दोस्तों संग शर्त लगाने की आदत थी. उन दिनों एसी के डिब्बे नहीं होते थे ट्रेनों में. हम खिड़कियों के सहारे बाहर से लटक कर इंजन तक पहुंचते थे. ट्रेनों में गार्ड के डिब्बे से इंजन तक पहुंचते थे." शर्त वह जीतता था जो सबसे पहले इंजन तक पहुंचता. हालांकि राणा ने सलाह दी, "अब कोई ऐसा न करे. यह गलत है. मुझे भी अब फिल्मों में अगर इसे करने को कहा जाएगा तो मैं मना कर दूंगा."
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महेन्द्र गुप्ता