मई के महीने में न करें बेबी प्लान, बच्चे की सेहत को हो सकते हैं ये नुकसान

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार मई में प्रेग्नेंट हुई महिलाओं से पैदा हुए बच्चों में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें पाई जाती हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 06 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 8:07 PM IST

शादी के बाद हर कपल को घर में एक नन्हें मेहमान की चाहत होती है. हर कोई चाहता है कि उनकी जिंदगी में आने वाला बच्चा फिजिकली और मेंटली स्ट्रॉन्ग हो. लेकिन क्या आप जानते हैं, बच्चे का स्वास्थ्य और उसकी मेंटल स्ट्रेंथ कपल की प्लानिंग पर भी निर्भर करती है.

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार मई में प्रेग्नेंट हुई महिलाओं से पैदा हुए बच्चों में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें पाई जाती हैं. सही वक्त पर बच्चा कंसीव न करने के कारण इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है

दरअसल जो महिलाएं मई के महीने में प्रेग्नेंट होती हैं, उनकी डिलीवरी का वक्त जनवरी या फरवरी के महीने में आता है. ये वक्त बहुत ज्यादा सर्दी वाला होता है. ऐसे में फ्लू और इनफ्लेमेशन (सूजन) के मामले काफी बढ़ जाते हैं, जिसका कारण नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है.

बच्चों को कितना खतरा?

यह रिसर्च 14 लाख बच्चों और 657,050 महिलाओं पर किया गया है. इस अवस्था में पैदा होने वाले बच्चों को प्रीमैच्योर बेबीज कहा जाता है. इस अवधि में पैदा हुए ज्यादातर बच्चों में सांस लेने और पाचन क्रिया से जुड़ी समस्याएं देखने को मिलती है.

क्या है समाधान?

इस स्थिति में आपको फ्लू वैक्सीन को लेकर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. सीडीसी के अनुसार इस अवस्था में महिलाओं को बीमार व्यक्ति से दूर रहना चाहिए. साथ ही अपनी आंख, मुहं या नाक पर हाथ लगाने के बाद अच्छी तरह से हैंड वॉश करने चाहिए.

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