95 किलो से वजन घटाकर वह बनी बॉडी बिल्डर, दूसरों को भी बना रही फिट

जब यासमीन ने वेटलिफ्टिंग को अपना करियर चुना तो कोई उनके साथ नहीं था. लेकिन कभी बेडौल शरीर वाली यह मजबूत इरादों की रानी आज वेटलिफ्टिंग में कई सारे रिकॉर्ड्स अपने नाम किए है...

यासमीन चौहान मनक
वन्‍दना यादव
  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2016,
  • अपडेटेड 7:00 PM IST

मजबूत इरादे और दृढ़ निश्चय के बल पर इंसान अपनी तकदीर को बदल सकता है और इस बात को एक नहीं हजारों पर कई मशहूर लोगों ने सही भी साबित किया है. ऐसे ही फौलाद इरादे रखने वाली आयरन वूमन यासमीन चौहान मनक बन रही हैं लाखों लोगों की प्ररेणा...

जब लोग उन्हें बदसूरत कहते थे एक वक्त था जब वो दिखने में बेडौल और बदसूरत लगती थीं लेकिन आज वो एक खूबसूरत महिला होने के साथ साथ बॉडी बिल्डर हैं. जब यासमीन ने वेटलिफ्टिंग को अपना करियर चुना तो हर किसी ने उन्हें इसके लिए मना किया लेकिन मजबूत इरादे को बल पर आज उनके नाम वेटलिफ्टिंग में पुरुषों के बनाए कई सारे रिकॉर्डस तोड़ने का खिताब दर्ज है.

जब बनी बॉडी बिल्डिंग मिस इंडिया-2016 ‘आयरन वुमेन’ नाम से चर्चित यासमीन मनक ने इंडियन बॉडी बिल्डिंग एंड फिटनेस फेडरेशन की ओर से आयोजित मिस इंडिया-2016 को ना सिर्फ अपने नाम किया है. बल्कि आज वो गुड़गांव में नाम से अपना जिम भी चलाती हैं. यहां वह करीब 300 लड़के -लड़कियों को ट्रेनिंग देती हैं. यही नहीं, इसी जिम के नाम पर उन्होंने एक बाइकर ग्रुप भी बनाया है और वह खुद भी बहुत अच्छी बाइक चलाती हैं.

आसान नहीं था रास्ता 36 साल की यासमीन मनक आज भले ही एक चर्चित चेहरा हों लेकिन इनका बचपन काफी परेशानियों में बीता. यासमीन जब 2 साल की थी तब उनके माता-पिता का तलाक हो गया था इसलिए उनको बड़ा करने की जिम्मेदारी उनके दादा-दादी ने संभाली. यासमीन का कहना है कि बचपन में एक बीमारी के बाद से ना सिर्फ मेरा वजन बढ़ गया बल्कि शरीर भी बेडौल हो गया और इसके बाद से स्कूल में मेरे दोस्त, रिश्तेदार सब मजाक बनाने लगे. पढ़ाई पूरी करने के बाद यासमीन ने ठान लिया कि वह फिर से फिट होंगी. यासमीन के घर के पास ही एक जिम सेंटर था. इसलिए उन्होंने वहां जाकर एक्सरसाइज करना शुरू कर दिया.

मेहनत रंग लाई जिम में उनका प्रदर्शन दूसरों से बेहतर था और इसे देखते हुए उनके इंस्ट्रक्टर ने यासमीन से कहा कि वो जिम के दूसरे लोगों को लीड करें. इस तरह यासमीन ने ग्रुप के दूसरे लोगों को एक्सरसाइज सिखाने का काम शुरू कर दिया. इस बीच गुड़गांव में ‘एनर्जिक प्लाजा’ नाम से एक बड़ा जिम खुल गया था. वहां पर उनकी एक दोस्त भी काम करती थी. उसी की सिफारिश पर यासमीन को वहां पर काम मिल गया. जहां पर उन्होंने ग्रुप में लोगों की क्लासेस लेना शुरू कर दिया. इस तरह सिर्फ चार महीने बच्चों पढ़ाने के बाद वो फुल टाइम जिम इंस्ट्रक्टर बन गईं.

2003 में खुद का स्टूडियो खोल लिया 2003 में यासमीन ने अपना एक एरोबीक स्टूडियो ‘स्कल्प्ट’ नाम से खोला. उनकी ये शुरूआत बहुत अच्छी रही. साल 2007 में उन्होंने इसका विस्तार कर उसमें जिम भी खोल लिया और अब यासमीन अपने जिम में हर महीने करीब तीन सौ लड़के-लड़कियों को ट्रेनिंग देती हैं.

वेट लिफ्टिंग में कुछ यूं हई शुरुआत यासमीन ने साल 2013 में बॉडी बिल्डिंग, पॉवर लिफ्टिंग और वेट लिफ्टिंग के क्षेत्र में उतरने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने 6 दिन की खास ट्रेनिंग लेकर इन सबकी बेसिक तकनीक सीखी जिसके बाद उन्होंने बॉडी बिल्डिंग करने का सोचा. यासमीन कहती हैं, 'मेरी खासियत ये है कि मैं 66 किलो की होने के बाद भी शेप में रहते हुए भी भारी वेट उठा सकती हूं. यही वजह है कि जिस ओपन पॉवर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में मैंने हिस्सा लिया था उसमें मैंने 150 किलो वजन उठाया था. जबकि सबसे ज्यादा 180 किलो वजन उठाने वाली का वेट 95 किलो था.'

कई खिताब किए अपने नाम यासमीन ने पिछले साल मुंबई में आयोजित बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता ‘फिट फैक्टर’ में भाग लिया था. उसमें वो फर्स्ट रनर अप रहीं थी. राष्ट्रीय स्तर पर मिस इंडिया प्रतियोगिता में दो गोल्ड मेडल जीतने वाली यासमीन का प्रतियोगिता में 20 लड़कियों के साथ मुकाबला था. इस प्रतियोगिता का आयोजन आईआईबीएफ फेडरेशन की ओर से किया जाता है जो कि एक मान्यता प्राप्त संगठन है. इस प्रतियोगिता को जीतने के बाद ‘ओलम्पिया’ के लिए चयन होता है जिसमें हिस्सा लेना हर बॉडी बिल्डर का सपना होता है. फिलहाल उनकी नजर अगस्त और सितम्बर में होने वाले दो अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर है. इन दोनों ही जगहों पर वो देश का प्रतिनिधित्व करेंगी. यासमीन ग्लैडरेक्स मिसेज इंडिया-2005 का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं.

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