रोना, याद करना और टूट जाना सही है... कथावाचक जया किशोरी ने की दिल की बात

जया किशोरी ने अपनी बुक 'जो है, ठीक है' के एक अध्याय में बताया है कि किसी को याद करना गलत नहीं बल्कि सही क्यों होता है. साथ ही उन्होंने इससे उबरने के कुछ तरीके भी बताए.

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जया किशोरी ने अपनी बुक में किसी की याद आने को सही बताया है. (Photo: Instagram/jaya kishori) जया किशोरी ने अपनी बुक में किसी की याद आने को सही बताया है. (Photo: Instagram/jaya kishori)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:14 PM IST

कथावाचक, मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक वक्ता जया किशोरी अपने भजन और अपनी कथाओं के कारण जानी जाती हैं. वह अक्सर ऐसे विषयों पर बात करना पसंद करती हैं जिससे लोग अपने आपको कनेक्ट कर सके. उन्होंने अपनी बुक 'जो है, ठीक है' में रिश्ते, ब्रेकअप और उनसे जुड़ी यादों पर खुलकर बताया है. जया किशोरी का मानना है कि किसी को याद करना न तो कमजोरी है और न ही गलत. टूटे रिश्तों के बाद मन में उठने वाली भावनाएं पूरी तरह मानवीय होती हैं.

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यादों से भागने या उन्हें दबाने की जरूरत नहीं

जया किशोरी ने बताया, 'यादों से भागने या उन्हें दबाने के बजाय उन्हें समझना और संतुलन के साथ स्वीकार करना ही आगे बढ़ने का सही रास्ता है. जो कुछ हम अपने लिए सोचते हैं, जिसकी कल्पना करते हैं, वैसा घटित नहीं होता. यह हमारे काम से जुड़ा हो सकता है, भविष्य की योजनाओं से, हमारी इच्छाओं से या फिर हमारे रिश्तों से. इन सब में सबसे अधिक पीड़ा हमें रिश्तों के टूटने-बिखरने से मिलती है.'

'कभी-कभी ऐसा होता है कि कोई बहुत करीबी या प्रेम-भरा रिश्ता टूट जाता है. वही रिश्ता, जिसमें हमारे जीवन की कुछ शानदार यादें बुनी होती हैं. इस रिश्ते का टूटना हमें बहुत कष्ट देता है. ऐसी यादों को भुलाना या मिटाना बहुत कठिन होता है और इन्हें भुलाने के प्रयास में हमें मानसिक तनाव और घुटन-सी होने लगती है. यह समस्या तब शुरू होती है, जब हम बार-बार अपने संबंध को याद करते हैं जो शायद हमें और दुखी कर देता है.'

'ऐसा इसलिए है क्योंकि यह भावना बिल्कुल स्वाभाविक है. जिनके साथ हमने अनगिनत पल बिताए हों, उन्हें भुला पाना सरल नहीं होता. समस्या तब शुरू होती है, जब इन दुखभरी यादों के साथ हमारे मन में यह चाहत फिर से सिर उठाने लगती है कि शायद हम वापस उसी रिश्ते में चले जाएं तो वे पल लौट आएं, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाता.'

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रिश्ते क्यों टूटते हैं?

जया किशोरी आगे कहती हैं, 'रिश्ते इसलिए टूटते हैं क्योंकि वे हमारे लिए सही नहीं होते, न ही हमारे भविष्य के लिए और न ही हमारे आत्म-विकास के लिए. लेकिन कई बार रिश्तों के मामले में हमारा मन एक अजीब प्रवृत्ति से ग्रस्त होता है. वह बस अच्छी बातों को ही याद करता है और उनमें उलझा रहता है. इसलिए हम बार-बार उन्हीं अच्छे पलों को याद करते रहते हैं और उन्हें भुला पाना हमारे लिए कठिन हो जाता है.' 

'इस स्थिति में अक्सर हमें सबसे पहले यह समझना होगा कि व्यक्ति में बिताए गए सुनहरे पलों की याद आना स्वाभाविक है. यह न तो गलत है और न ही अनुचित. अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ रहे हैं, जिसे आपने सच्चा चाहा हो, जिसके साथ यादगार पल बिताए हों, तो उन्हें याद करना मानवीय स्वभाव है. हम कोई मशीन नहीं हैं कि एक बटन दबाएँ और सारी यादें मिट जाएं. भावनाओं को दबाने से समाधान नहीं होता, बल्कि वे और भी तीव्रता के साथ वापस लौटती हैं.'

रोने से मन होगा हल्का

'अगर आपके जीवन में इस समय कुछ ऐसा ही नकारात्मक चल रहा है तो आपको 2 बातें अवश्य करनी चाहिए. पहली बात तो यह कि अगर आपको किसी की याद आ रही है, किसी की कमी सता रही है और रोने का जी कर रहा है तो अपने आपको समझाएं कि यह बिल्कुल ठीक है.'

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'मैं तो यही कहूंगी कि आप जितना चाहें उन पलों को याद कीजिए, जी भरकर रो लीजिए, इसमें कुछ भी गलत नहीं है और चिंता न करें. ऐसा करने से आप कमजोर नहीं हो जाते. सच कहूं तो यही एहसास भविष्य में आपको और भी मजबूत बनाएगा.'

'दूसरा कदम, जब आप किसी को याद करते-करते भावनाओं में बहने लगते हैं तो मन में यह मिल-जुली भावना भी जन्म लेती है कि काश वह व्यक्ति फिर से आपके जीवन में लौट आए. आपको यह भी लग सकता है कि शायद उस रिश्ते को समाप्त करना एक भूल थी. ऐसे में आपको दूसरा उपाय करना होगा.'

अच्छी यादें क्यों जहन में रहती हैं?

जया किशोरी का मानना है, 'जब हम पुरानी यादों में खो जाते हैं, तब हमें केवल अच्छे पल ही याद रहते हैं और जिन कारणों से हमें इतना बड़ा और कठिन निर्णय लेना पड़ा, हम उन्हें भूल जाते हैं. हम भूल जाते हैं वह अपमान, जो हमें सहना पड़ा, वह चोट, जो हमारे आत्म-सम्मान को लगी थी. इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपने आपके समय-समय पर उन वास्तविकताओं की याद दिलाएं, ताकि हम कोई अनुचित निर्णय न कर बैठें.'

'बहुत पास रह चुके किसी को याद करना स्वाभाविक है, जिसके साथ आपने सुंदर पल बिताए, प्यारी यादें संजोईं तो यह बिल्कुल ठीक है. लेकिन यह कहीं से भी ठीक नहीं है कि इन मीठी यादों में डूबकर आप उन अनुभवों को भूल जाएं जिन्होंने आपको पीड़ा दी थी.

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