पीरियड्स आमतौर पर 4 से 7 दिनों तक चलते है जो लगभग हर 28 दिनों में होता है. लेकिन इसके दूसरी ओर कई फीमेल्स ऐसी होती हैं जिनके पीरियड्स या तो कभी काफी जल्दी आ जाते हैं या कभी लेट आते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 2–3 दिन आगे-पीछे होना अक्सर नॉर्मल है लेकिन यदि हमेशा आपके साथ ऐसा होता है तो ये किसी फिजिकल कंडीशन का संकेत हो सकता है या फिर ये हार्मोन, लाइफस्टाइल या किसी छिपी मेडिकल कंडीशन की तरफ इशारा हो सकता है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि अनियमित पीरियड्स के क्या कारण होते हैं.
Mayoclinic के मुताबिक, नॉर्मल पीरियड्स का समय लगभग 21 से 35 दिन के बीच होता है और ये साइकिल करीब 28 दिन का होता है. हर महिला का 'नॉर्मल' पीरियड्स पैटर्न अलग हो सकता है क्योंकि किसी का मंथली साइकिल 24 दिन, किसी का 28 दिन तो किसी का 30-32 दिन भी हो सकता है.
जब किसी के पीरियड कभी बहुत जल्दी या कभी कभी बहुत लेट आएं या फिर पीरियड्स साइकिल की लंबाई बार-बार बदलती रहती है तो उसे अनियमित पीरियड (इर्रेग्युलर मेंस्ट्रुएशन) कहा जाता है.
एक्सपर्ट इसे चिंता का विषय तब मानते हैं, जब ये साइकिल लगातार बहुत छोटी (21 दिन से कम) या बहुत लंबी (35–40 दिन से ज्यादा) हो या पीरियड कई महीने तक मिस होता रहे.
हॉर्मोनल फ्लक्चुएशन: वैसे पीरियड्स की टाइमिंग पूरी तरह एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और दिमाग से निकलने वाले दूसरे हॉर्मोन्स के बैलेंस पर निर्भर करती है लेकिन अगर इनका ये संतुलन बिगड़ जाए तो ओव्यूलेशन भी आगे-पीछे हो सकता है जिससे पीरियड्स कभी जल्दी तो कभी लेट हो जाते हैं.
पीसीओएस, थायरॉइड डिसऑर्डर या प्रोलैक्टिन जैसे हॉर्मोन की गड़बड़ी अक्सर पीरियड्स साइकिल को लंबा, छोटा या बिल्कुल गायब कर सकती है. लाइफ स्टेज जैसे पीरियड्स की शुरुआत के शुरुआती साल और पेरिमेनोपॉज के दौर में हॉर्मोन खुद-ब-खुद फ्लक्चुएट करते हैं इसलिए उस समय अनियमित पीरियड्स बहुत कॉमन हैं.
Clevelandclinic के मुताबिक, यदि किसी को लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है जो दिमाग के हाइपोथैलेमस हिस्से को डिस्टर्ब कर सकता है जो पीरियड्स वाला हॉर्मोन सिस्टम कंट्रोल करता है. ऐसा होने से ओव्यूलेशन में देरी या रुकावट आ सकती है और पीरियड लेट या मिस हो सकते हैं.
इसके अलावा अचानक बहुत अधिक वजन बढ़ना या कम होना, क्रैश डाइटिंग या बहुत हैवी वर्कआउट भी हॉर्मोनल बैलेंस को बिगाड़कर साइकिल बदल सकते हैं.
जानकारी के मुताबिक, अक्सर कई फीमेल्स नाइट शिप्ट करती हैं या फिर जो नींद पूरी नहीं कर पातीं, रात तक जागती रहती हैं, बार–बार टाइम जोन बदलने वाली ट्रैवलिंग, शरीर की इंटरनल बॉडी क्लॉक (सर्केडियन रिद्म) को बिगाड़ देती है जिसका सीधा असर उनके रिप्रोडक्टिव हॉर्मोन्स और पीरियड्स की डेट पर पड़ सकता है.
Mayoclinic पर दी गई जानकारी के मुताबिक, पीरियड शुरू होने के शुरुआती कुछ सालों में पीरियड्स साइकिल का अनियमित होना कॉमन है क्योंकि उस समय ओव्यूलेशन हर महीने एक जैसा नहीं होता. जब मेनोपॉज करीब होता है तो उस स्थिति को पेरिमेनोपॉज स्टेज कहते हैं, उस समय भी पीरियड साइकिल लंबी या कभी-कभी छोटी हो सकती है.
प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान हॉर्मोन काफी बदल जाते हैं जिससे पीरियड रुक सकते हैं या काफी लंबे समय बाद वापिस आते हैं. इसके अलावा हार्मोनल बर्थ कंट्रोल पिल्स, इंजेक्शन, इम्प्लांट या आईयूडी शुरू या बंद करने पर भी कुछ महीनों तक पीरियड्स की डेट और फ्लो में बदलाव कॉमन होता है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क