गेहूं की रोटी से किन्हें करना चाहिए परहेज? इन बीमारी वाले लोग रहें बचकर

गेहूं की रोटी कई लोगों के लिए ब्लोटिंग, थकान, और पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकती है. ग्लूटेन से जुड़ी बीमारियां जैसे सीलिएक डिजीज और नॉन-सीलिएक ग्लूटेन सेंसिटिविटी कुछ लोगों को प्रभावित करती हैं. किन लोगों को गेहूं की रोटी से परहेज करना चाहिए, इस बारे में जानेंगे.

Advertisement
गेहूं की रोटी कुछ लोगों को नुकसान भी पहुंचा सकती है. (Photo: ITG) गेहूं की रोटी कुछ लोगों को नुकसान भी पहुंचा सकती है. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:50 PM IST

गेहूं की रोटी लगभग हर घर में खाई जाती है जिसे दाल, सब्जी या करी के साथ काफी चाव से खाई जाती है. लेकिन कई लोगों को गेहूं की ये रोटी परेशानी खड़ी कर सकती है क्योंकि ये ब्लोटिंग और थकान संबंधित खई समस्याएं पैदा करती है. हालांकि लोगों को जब से समस्या होती है तो वो सोचते भी नहीं हैं कि रोटी से ऐसा हो सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ लोगों को गेहूं की रोटी खाने से परहेज करना चाहिए नहीं तो उसमें मौजूद ग्लूटेन डाइजेस्टिव सिस्टम और इम्यून सिस्टम पर बुरा असर डाल सकता है. तो आइए जानते हैं, किन लोगों को ग्लूटेन की रोटी खाने से बचना चाहिए.

Advertisement

ग्लूटेन से जुड़ी समस्याएं

सीलिएक डिजीज, गेहूं में ग्लूटेन के प्रति एक ऑटोइम्यून रिएक्शन है जो आंत को नुकसान पहुंचाती है और लगभग 1 प्रतिशत भारतीयों को प्रभावित करती है. इस बीमारी का अक्सर लोगों को पता नहीं चलता.

मेयो क्लिनिक की रिपोर्ट का कहना है कि इससे न्यूट्रीएंट्स ठीक से अब्जॉर्ब नहीं हो पाते जिससे एनीमिया और ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या हो सकती है. उन लोगों  को रोटी की थोड़ी सी मात्रा भी नुकसान पहुंचा सकती है.

हेल्थलाइन के मुताबिक, नॉन-सीलिएक ग्लूटेन सेंसिटिविटी से पेट फूलना, सिरदर्द और थकान होती है.

ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा

गेहूं की रोटियों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स हाई होता है यानी कि वो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ाती हैं जो डायबिटीज के मरीज़ों के लिए खराब बोता है. गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. वात्स्या का कहना है कि जिन लोगों को डायबिटीज है, उन्हें गेहूं की रोटी खाने से बचना चाहिए और इंसुलिन रेजिस्टेंस से बचने के लिए ज्वार या बाजरा की रोटी खाएं.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अधिक रिफाइंड गेहूं खाने से वजन बढ़ता है और कोलेस्ट्रॉल की दिक्कतें सामने आती हैं. यदि केमिकल से उगाए गए गेहूं को रोजाना खाया जाए तो लिवर और आंत पर बोझ बढ़ जाता है.

Advertisement

पीसीओडी और हार्मोनल असंतुलन

आजकल महिलाओं में पीसीओडी (PCOD) और पीसीओएस (PCOS) की समस्या तेजी से बढ़ रही है. एक्सपर्ट्स कहते हैं, हार्मोनल असंतुलन से जूझ रही महिलाओं के लिए गेहूं का अधिक सेवन परेशानी बढ़ा सकता है. दरअसल, ग्लूटेन शरीर में सूजन पैदा कर सकता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या होती है और वजन घटाना मुश्किल हो जाता है. 

आईबीएस और पाचन संबंधी डिसऑर्डर

इरिटेबल बॉउल सिंड्रोम यानी आईबीएस (IBS) वाले लोग गेहूं की रोटी आसानी से नहीं पचा सकते क्योंकि गेहूं में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स होता है जो डाइजेस्टिव सिस्टम में फर्मेंटेशन पैदा करता है जिससे गैस, ब्लोटिंग (पेट फूलना) और कब्ज की समस्या होने लगती है. पेट में मरोड़ और दर्द वाले लोगों को गेहूं की रोटी खाने से बचना चाहिए. इसके लिए आप डॉक्टर से संपर्क करें.

गेहूं की जगह ज्वार, बाजरा, रागी, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की रोटी को आजमा सकते हैं, जो पेट पर हल्के होते हैं और आसानी से पच जाते हैं.

Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट में किसी भी बदलाव से पहले हमेशा अपने डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या डायटीशियन से सलाह जरूर लें.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement