Covid-19 New variants In India: सिंगापुर-अमेरिका के बाद भारत पहुंचा NB.1.8.1 सब-वैरिएंट...जानें कितना खतरनाक?

Covid-19 New variants NB.1.81 in India: भारत में कोरोना के मामलों में वृद्धि के साथ, भारत के SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) ने कोरोनावायरस के NB.1.81 सब-वैरिएंट का पता लगाया है. ये क्या है, कितना खतरनाक है, इस बारे में जानेंगे.

Advertisement
देश में एक नया सब-वैरिएंट मिला है जिसका नाम एनबी.1.8.1 है. देश में एक नया सब-वैरिएंट मिला है जिसका नाम एनबी.1.8.1 है.

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 28 मई 2025,
  • अपडेटेड 11:56 AM IST

COVID-19 cases in India: दक्षिण पूर्व एशिया में कोविड-19 के मामले एक बार फिर बढ़ रहे हैं और इसके बाद भारत में भी संक्रमण की वृद्धि देखी जा रही है. ये मामले भारत में कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में पाए गए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, कल (27 मई) तक भारत में कोविड-19 के कुल 1,010 सक्रिय मामले सामने आए. सबसे ज़्यादा मामले केरल में पाए गए, उसके बाद महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात और तमिलनाडु का स्थान है. हालांकि मुंबई, चेन्नई और अहमदाबाद जैसे शहरों में कोविड-19 के मामलों में मामूली लेकिन स्थिर वृद्धि दर्ज की गई है. जिसके कारण स्थानीय अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने और एहतियाती उपाय लागू करने की सलाह दी है.

वायरस का नया सब-वैरिएंट NB.1.8.1 भी भारत पहुंच चुका है. लेकिन विशेषज्ञों ने भरोसा दिलाया है कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. भारत में मिला नया वैरिएंट एनबी.1.8 क्या है, कितना संक्रामक है, इस बारे में भी जान लीजिए.

Advertisement

नए मामले के लिए जिम्मेदार है NB.1.8.1

सिंगापुर में स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया, JN.1 के दो वंशज वंश LF.7 और NB.1.8.1 अब स्थानीय रूप से दो-तिहाई से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार हैं. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बात का कोई संकेत नहीं है कि स्थानीय रूप से प्रसारित होने वाले वैरिएंट पहले फैलने वाले वैरिएंट की तुलना में अधिक संक्रामक हैं या अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनते हैं. इस महीने की शुरुआत में, जब सिंगापुर में मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही थी, तो अधिकारियों ने कहा कि पूरे साल कोविड-19 की आवधिक लहरों की उम्मीद की जा सकती है.

NB.1.8.1 की पहचान कैसे हुई?

NB.1.8.1 वैरिएंट की पहचान सबसे पहले चीन में हुई थी. यह ओमिक्रॉन वंश JN.1 का एक सब-वैरिएंट है और इसे हाल ही में COVID-19 मामलों में वृद्धि से जोड़ा गया है, विशेष रूप से एशिया में. सिंगापुर, हांगकांग और अमेरिका जैसे अन्य देशों में भी इसका पता चला था. भारत में इसकी पहचान पहली बार अप्रैल 2025 में तमिलनाडु में हुई थी. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा "वैरिएंट अंडर मॉनिटरिंग" (VUM) के रूप में वर्गीकृत किया गया है और इसका मतलब है कि इसे सावधानी से ट्रैक किया जा रहा है लेकिन अभी तक उन्हें चिंताजनक वैरिएंट (VOC) नहीं माना गया है.

Advertisement

NB.1.8.1में नए म्यूटेशन हैं

एनबी.1.8.1 का पहला ज्ञात मामला 22 जनवरी, 2025 को पाया गया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) NB.1.8.1 नामक एक नए COVID-19 वैरिएंट पर नज़र रख रहा है क्योंकि दुनिया भर में इसके मामले बढ़ रहे हैं. यह वैरिएंट वायरस के पुराने संस्करण XDV.1.5.1 से आया है. 

NB.1.8.1 में अलग जेनेटिक म्यूटेशन हैं जो उन्हें डेल्टा या ओमिक्रॉन जैसे वैरिएंट से अलग करते हैं. ये उत्परिवर्तन इस बात को प्रभावित कर सकते हैं कि वायरस कैसे फैलता है, यह प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ कैसे संपर्क करता है और और यह वैक्सीन पर कैसे प्रतिक्रिया करता है. हालांकि इस पर और अधिक रिसर्च की जरूरत है लेकिन  "वैरिएंट अंडर मॉनिटरिंग" के रूप में उनके वर्गीकरण का मतलब है कि उसकी निगरानी की जरूरत है.

NB.1.8 का फैलाव कैसा है?

जानकारी के मुताबिक,  एशिया में सिंगापुर, हांगकांग और अमेरिका में कोरोना के मामलों में उछाल के लिए NB.1.8 ही जिम्मेदार है इसलिए कह सकते हैं कि यह पुराने वैरिएंट्स की तुलना में तेजी से फैलता है. हालांकि इसमें डेल्टा या शुरुआती ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण होने वाली शुरुआती कोरोना की लहरों के विपरीत संक्रमण के मामले हल्के हैं और अभी इसके कारण हॉस्पिटल में भर्ती होने के मामलों में वृद्धि का अभी तक कोई सबूत नहीं है.

Advertisement

NB.1.8.1 कितना संक्रामक है?

शुरुआती रिपोर्ट बताती हैं कि NB.1.8.1 के संक्रमण से सामान्य फ्लू या हल्के COVID-19 जैसे लक्षण होते हैं. ज्यादातर मरीज अस्पताल में इलाज की ज़रूरत के बिना घर पर ही जल्दी ठीक हो जाते हैं. यह डेल्टा जैसे पहले के वैरिएंट से अलग है जो ज्यादा गंभीर बीमारी और ज्यादा मृत्यु दर का कारण बना था, खास तौर पर बिना वैक्सीनेशन वाले लोगों में. 

वर्तमान वैक्सीन कितनी इफेक्टिव?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वर्तमान टीके और उपचार इन नए वैरिएंट के खिलाफ़ प्रभावी बने हुए हैं. स्वास्थ्य अधिकारी सुरक्षा बनाए रखने के लिए टीकाकरण और बूस्टर के महत्व पर जोर देते हैं. इस बात का कोई संकेत नहीं है कि NB.1.8.1 वैक्सीन या पिछले संक्रमणों से प्राप्त इम्यूनिटी को चकमा दे सकते हैं. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि नए टीकों को LP.8.1 नामक संबंधित वैरिएंट पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो NB.1.8.1 से भी सुरक्षा प्रदान कर सकता है.

क्या भारत को चिंता करनी चाहिए?

भारत सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) जैसे जीनोमिक निगरानी कार्यक्रमों के माध्यम से स्थिति पर सक्रिय रूप से नज़र रख रही हैं. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा, 'अभी तक, गंभीरता आम तौर पर कम है. चिंता की कोई बात नहीं है. हमें सतर्क रहना चाहिए और हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए. लोगों को तत्काल कोई कार्रवाई करने की ज़रूरत नहीं है. उन्हें सामान्य सावधानियां बरतनी चाहिए. अभी कुछ खास करने की जरूरत नहीं है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement