जापान-चीन वाले जानते हैं चाय पीने का असली तरीका! भारतीय करते हैं ये एक गलती

चाय भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है और इसे पीने के कई तरीके हैं. जापान और चीन की चाय को भी काफी खास तरीके से बनाया जाता है. वो विधि क्या है जो काफी हेल्दी होती है, इस बारे में बताएंगे.

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भारत में अलग-अलग तरीकों से चाय बनाई जाती है. (Photo: FreePic) भारत में अलग-अलग तरीकों से चाय बनाई जाती है. (Photo: FreePic)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 12 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 4:41 PM IST

चाय सदियों से भारतीय संस्कृति और समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है. भारत में चाय को अक्सर आतिथ्य के प्रतीक के रूप में परोसा जाता है और यह सामाजिक समारोहों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. अब चाहे दोस्तों से गप्पे लड़ानी हो या बारिश का मजा लेना हो, परिवार में महफिल जमी हो या फिर मेहमानों का स्वागत करना हो, हर मौके पर चाय सबसे बेस्ट होती है. भारत में अलग-अलग जगह पर काफी किस्मों की चाय पी जाती है और उसे बनाने का तरीका भी अलग-अलग हो सकता है. टीचर अवध ओझा के वीडियोज सोशल मीडिया पर काफी शेयर होते हैं. उन्होंने एक वीडियो में बताया था कि चाय को पीने का सबसे अच्छा तरीका क्या है. तो आइए उन्होंने कौन सा तरीका बताया, इस बारे में भी जान लेते हैं.

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बेस्ट चाय बनाने का तरीका

अवध ओझा वीडियो में कह रहे हैं, 'चाय बड़ी प्यारी चीज है, बशर्ते उसमें दूध ना मिलाया जाए. चाय पीने का जो असली ढंग है वो दुनिया में दो ही लोग जानते हैं एक जापानी और एक चीनी. जापान में तो चाय का फेस्टिवल होता है.'

'भारत में 80 प्रतिशत लोग चाय के कारण गैस के पेशेंट है. क्योंकि जैसे ही चाय में दूध मिलाते हैं तो वो जहर की तरह हो जाती है. चाय में दालचीनी, नींबू, शहद मिलाइए वो अमृत की तरह काम करेगी. डायबिटीज के जो पेशेंट है वो शहद ना डालें.'

जापानी और चीनी चाय की खासियत-बनाने की विधि

जानकारी के मुताबिक, जापानी और चीनी चाय दोनों ही एशियाई संस्कृति, स्वास्थ्य और माइंडफुलनेस से जुड़ी हुई हैं. लेकिन इसके साथ ही दोनों को बनाने का तरीका और स्वाद अलग-अलग होता है.

जापान में माचा (Matcha), सेन्चा (Sencha), जेनमैचा (Genmaicha) और होजीचा (Hojicha) जैसी चाय मिलती हैं. जापान की चाय की सबसे बड़ी खासियत ये है कि वहां चाय की पत्तियों को भाप से स्टीम किया जाता है जिससे उसका रंग हरा ही रहता है और उसमें से एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा भी कम नहीं होती. वहां की चाय में मुख्य रूप से कैटेचिन्स और L-theanine नाम के कंपाउंड होते हैं तो स्ट्रेस कम करते हैं और फोकस बढ़ाते हैं. जापान में अधिकतर लोग चाय के पाउडर को कप में लेते हैं और उसके ऊपर गर्म पानी डालते हैं. कुछ लोगों का अगर मन होता है तो वो उसमें थोड़ा सा दूध भी जोड़ लेते हैं.

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चीनी चाय की बात करें तो वहां पर ग्रीन टी (Longjing / Dragon Well), ऊलोंग टी (Oolong), पुएर्ह टी (Pu-erh), व्हाइट टी (Bai Mudan) और ब्लैक टी (Keemun, Lapsang Souchong) मुख्य रूप से पी जाती हैं. चीनी चाय की विशेषता है कि वहां पर चाय की पत्तियों को भूना जाता है और फिर सुखाया जाता है. इससे उनका स्वाद थोड़ा स्मोकी हो जाता है. चीनी चाय इतनी स्ट्रांग होती है कि वहां की चाय को 4-5 बार उपयोग में लिया जा सकता है. चीनी चाय तो बनाने के लिए चाय की पत्ती को कप में डालें और उसमें गर्म पानी डाल दें. कलर और सुगंध आने के बाद उसे छान लें और पी लें.

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