मल्टीग्रेन आटे में भूलकर भी न मिलाएं ये चीजें, गलत कॉम्बिनेशन बिगाड़ सकता है सेहत

मल्टीग्रेन आटा पोषण का पावरहाउस है, लेकिन इसमें गलत अनाज या सामग्री मिलाने से इसके गुण खत्म हो सकते हैं और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. तो आइए सही मल्ट्रीग्रेन आटा बनाने का तरीका जान लीजिए.

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मल्टीग्रेन आटे में कई अनाज मिलाए जाते हैं. (Photo: ITG) मल्टीग्रेन आटे में कई अनाज मिलाए जाते हैं. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:52 AM IST

आजकल लोग गेहूं की रोटी की अपेक्षा मल्टीग्रेन रोटी का सेवन अधिक कर रहे हैं. बाजार में मिलने वाले रेडीमेड पैकेट हों या घर पर तैयार किया गया आटा, मल्टीग्रेन आटा न्यूट्रिशन का पावरहाउस माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसमें अनजाने में मिलाई गई कुछ चीजें इसके गुणों को खत्म कर सकती हैं. वहीं इस आटे का गलत कॉम्बिनेशन न केवल रोटी का स्वाद बिगाड़ सकता है बल्कि इससे डाइजेशन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. अगर आप भी घर पर आटे में चना, बाजरा या रागी मिला रहे हैं तो आपको थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है.

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गलत मिश्रण से घट जाती है न्यूट्रिशनल वैल्यू

मल्टीग्रेन आटा बनाने का असल मकसद शरीर को अधिक फाइबर, प्रोटीन और विटामिन्स देना होता है. अक्सर लोग इस आटे में 5-6 तरह के अनाज को एक साथ मिला देते हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि बहुत अधिक वैरायटी वाला आटा मिलाने से शरीर हर अनाज के पोषक तत्वों को सही तरह से एब्जॉर्ब नहीं पाता.

उदाहरण के लिए, अगर आप आटे में बहुत अधिक मात्रा में सोयाबीन मिला रहे हैं तो यह थॉयराइड या हार्मोनल इम्बैलेंस वाले लोगों को अधिक नुकसान हो सकता है. अनाज का अनुपात हमेशा सही होना चाहिए वरना यह फायदे की जगह पेट में भारीपन और गैस का कारण बन सकता है.

सोयाबीन और चने की ज्यादा मात्रा से बचें

लोग अक्सर प्रोटीन बढ़ाने के लिए आटे में अधिक मात्रा में काला चना या सोयाबीन मिलाकर पिसवा लेते हैं. हालांकि ये दोनों सेहतमंद हैं लेकिन इनका अधिक इस्तेमाल रोटी को कड़क बना देता है जिससे स्वाद भी कड़वा हो सकता है.

आयुर्वेद और मॉडर्न न्यूट्रिशन दोनों ही सुझाव देते हैं कि चने की मात्रा आटे के कुल वजन का केवल 10 से 15 प्रतिशत ही होनी चाहिए. अगर आप इसमें बहुत ज्यादा दालें मिला देते हैं तो इससे यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या भी हो सकती है.

सही तरीका यह है कि आप अपनी शारीरिक जरूरत और पाचन क्षमता के अनुसार ही अनाज चुनें.

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बाजरा और मक्का मिलाते समय रखें ध्यान

सर्दियों में बाजरा और मक्का सेहत के लिए अच्छे होते हैं लेकिन इन्हें गेहूं के साथ मिलाते समय मौसम का ध्यान रखना जरूरी है. बाजरे की तासीर गर्म होती है, इसलिए गर्मी के मौसम में इसकी अधिक मात्रा पेट की गर्मी और स्किन एलर्जी का कारण बन सकती है.

इसके अलावा मल्टीग्रेन आटे में ओट्स या सत्तू जैसी चीजें मिलाने से बचें क्योंकि इनकी शेल्फ लाइफ अलग होती है. अगर मिश्रण को लंबे समय तक रखा जाए, तो इसमें नमी आने लगती है और आटे की क्वालिटी खराब हो जाती है जिससे रोटी का टेक्सचर और स्वाद दोनों प्रभावित होते हैं.

नमक और तेल मिलाने की न करें गलती

कई लोग आटा पिसवाते समय ही उसमें नमक या मोयन के लिए तेल डाल देते हैं ताकि रोटियां नरम बनें. नमक मिलाने से आटे में मौजूद प्राकृतिक गुण प्रभावित होते हैं और यह जल्दी खराब होने लगता है. व

हीं, तेल या घी पहले से मिलाकर रखने से आटे में एक खास तरह की महक पैदा हो सकती है. अगर आप आटे की शेल्फ लाइफ और शुद्धता बनाए रखना चाहते हैं, तो इसमें किसी भी तरह के प्रिजर्वेटिव या अतिरिक्त सामग्री को मिलाने से बचें और इसे हमेशा एयरटाइट कंटेनर में ही स्टोर करें.

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