Raw onions with your meals: दाल-चावल हो या पराठे, रोटी-सब्जी हो या सलाद, अक्सर लोगों को इन चीजों के साथ कच्चा प्याज खाना काफी पसंद होता है. प्याज भारतीय घरों में एक ज़रूरी चीज़ है, जिसे अक्सर कुरकुरे सलाद के तौर पर या भारी खाने के साथ कच्चा परोसा जाता है. इसमें विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और सल्फ्यूरिक कंपाउंड अधिक होते हैं इसलिए इसे इम्यूनिटी बढ़ाने और दिल की सेहत सुधारने के लिए बहुत जाना जाता है. लेकिन कुछ लोगों के लिए, वही कच्चा प्याज़ सीने में जलन, गैस, माइग्रेन या एलर्जिक रिएक्शन भी हो सकता है. अब ऐसे में ये जानना भी जरूरी है कि कब, कितना और किसके लिए कच्चा प्याज खाना सही है.
WebMD के मुताबिक, एक कप कटे हुए कच्चे प्याज में लगभग 64 कैलोरी, लगभग 3 ग्राम फाइबर होता है. यह विटामिन C, विटामिन B6, पोटैशियम और दूसरे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का अच्छा सोर्स है जो पूरी हेल्थ को सपोर्ट करते हैं.
Healthline का कहना है, प्याज में क्वेरसेटिन और सल्फर कंपाउंड होते हैं जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं और ये LDL (खराब) कोलेस्ट्रॉल को कम करने, हेल्दी ब्लड प्रेशर को सपोर्ट करने और लंबे समय तक दिल की बीमारी के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं.
प्याज में मौजूद प्री-बायोटिक फाइबर अच्छे गट बैक्टीरिया को पोषण देते हैं जो रेगुलर रूप से कम मात्रा में खाने पर डाइजेशन, इम्यूनिटी और यहां तक कि मेटाबोलिक हेल्थ को भी सपोर्ट कर सकते हैं.
कुछ स्टडीज ने प्याज और लहसुन जैसी एलियम सब्जियों के रेगुलर सेवन को पेट और कोलोरेक्टल कैंसर सहित कुछ कैंसर के कम खतरे से जोड़ा है.
अधिकतर हेल्दी एडल्ट्स के लिए, सलाद, चटनी या गार्निश के रूप में खाने के साथ थोड़ी मात्रा में कच्चा प्याज शामिल करना स्वाद और न्यूट्रिएंट्स का सेवन बढ़ाने का एक आसान तरीका हो सकता है.
ज़्यादातर हेल्दी एडल्ट्स के लिए, सलाद, चटनी या गार्निश के तौर पर खाने में थोड़ी मात्रा में कच्चा प्याज़ शामिल करना स्वाद और न्यूट्रिएंट्स बढ़ाने का एक आसान तरीका हो सकता है. न्यूट्रिशनिस्ट का कहना है कि इसके फ़ायदे तो बहुत हैं, लेकिन इसे खाने का तरीका और व्यक्ति की पेट की सेहत इस बात में अहम भूमिका निभाती है कि यह सब्ज़ी इलाज का काम करती है या परेशानी का इसलिए कुछ लोगों को प्याज के सेवन से बचना चाहिए.
प्याज को वैसे तो सुरक्षित माना जाता है लेकिन डॉक्टर और डाइटीशियन का कहना है कि कुछ लोगों को प्याज के सेवन से बचना चाहिए.
WebMD के मुताबिक, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) या बहुत सेंसिटिव डाइजेशन वाले लोग यदि प्याज खाते हैं तो उसमें मौजूद फ्रुक्टेन पेट में फर्मेंट हो जाते हैं और गैस, ब्लोटिंग, ऐंठन या लूज़ स्टूल को ट्रिगर करते हैं.
Georestrictions का कहना है, जिन्हें गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) या बार-बार सीने में जलन होती है, उन लोगों को कच्चा प्याज एसिड इरिटेशन को बढ़ाकर सीने में जलन या खट्टी डकार को और बढ़ा देता है.
जिन लोगों को माइग्रेन की शिकायत है उन लोगों में भी कच्ची प्याज में मौजूद टायरामाइन जैसे कंपाउंड सेंसिटिव लोगों में सिरदर्द बढ़ा सकते हैं.
जिन लोगों को प्याज से एलर्जी होती है, उन्हें खुजली, रैशेज़, होंठों या जीभ में सूजन, आंखों से पानी आना, नाक में दिक्कत या कभी-कभी सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. ऐसे में उन्हें प्याज, खासकर कच्चा, नहीं खाना चाहिए.
लेकिन यदि आपको पाचन से जुड़ी कोई गंभीर समस्या नहीं है, तो दोपहर के खाने में सलाद के रूप में कच्ची प्याज खाना एक बेहतरीन विकल्प है.
हालांकि इसके लिए कोई तय ग्लोबल गाइडलाइन नहीं है, लेकिन न्यूट्रिशन एक्सपर्ट आमतौर पर टॉलरेंस और ओवरऑल डाइट क्वालिटी पर ध्यान देते हैं. WebMD के मुताबिक, खाने में रेगुलर प्याज शामिल करना चाहे पका हो या कच्चा, दिल और मेटाबोलिक हेल्थ के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन प्याज की सही 'डोज' हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होती है.
अधिकतर लोग जिन्हें पाचन या रिफ्लक्स की दिक्कत नहीं है,, उनके लिए दिन में 1 या 2 बार खाने के साथ एक छोटा ककुम्बर-स्टाइल सलाद (कुछ स्लाइस या दो बड़े चम्मच कटा हुआ कच्चा प्याज) आमतौर पर ठीक माना जाता है. अगर आपका सिस्टम ठीक है, तो रोजाना थोड़ी मात्रा आमतौर पर ठीक है.
Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट में किसी भी बदलाव से पहले हमेशा अपने डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या डायटीशियन से सलाह जरूर लें.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क