मथुरा जिला अदालत में कृष्ण जन्म भूमि विवाद में हिंदू पक्षकारों की ओर से दलील पूरी हो गई है. अगली सुनवाई अगले साल पांच जनवरी को तय हुई है जिसमें मुस्लिम पक्षकार यानी शाही ईदगाह को लेकर दलीलें दी जाएंगी. पिछले जिला जज का तबादला होने के बाद अब नए जज साहब के इजलास में ये पहली सुनवाई हुई है.
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद पर सुनवाई
याचिकाकर्ताओं के वकील हरि शंकर जैन के मुताबिक अब तो फिजिकल सुनवाई हो रही है. भगवान कृष्ण विराजमान की ओर से करीब सवा साल पहले दायर इस सिविल सूट की सुनवाई अब तक चार जजों के सामने हो चुकी है. दो तीन तारीखों पर सुनवाई के बाद जिला जज का तबादला हो जाता है. अब मौजूदा जिला जज ने याचिकाकर्ता भगवान कृष्ण विराजमान के अंतरंग सखाओं की दलील तो सुन ली है. अब विरोधी पक्ष यानी मुदालह की ओर से दलील होगी. भगवान कृष्ण विराजमान की ओर से श्री कृष्ण जन्म स्थान की 13.37 एकड़ जमीन वापस दिलाने की गुहार अदालत से लगाई गई है.
कौन से एक्ट को दी गई चुनौती?
इस याचिका में भी संसद से पारित धर्मस्थल कानून (प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट) 1991 को चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि धर्म स्थलों की संभाल और कानून व्यवस्था ये सब राज्य सूची का विषय है. इस बाबत कानून और नियम बनाने का अख्तियार राज्य सरकारों को ही है केंद्र को नहीं. ऐसे में संसद ने ये कानून बनाकर राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप किया है. केंद्र का ये अतिक्रमणकारी कदम संविधान के संघीय ढांचे की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला है. लिहाजा अदालत इसे अवैध घोषित कर रद्द करे.
हालांकि प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट 1991 इस मामले में आड़े आया हुआ है. इस एक्ट के जरिए अयोध्या में कभी विवादित रहे राम जन्मभूमि पर मालिकाना हक मामले को ही अदालती फैसले के मुताबिक बदलाव छूट मिली थी. अलबत्ता मथुरा काशी सहित सभी धार्मिक और आस्था उपासना स्थलों के विवाद या स्थिति पर 15 अगस्त 1947 जैसी ही स्थिति बहाल रखने का प्रावधान किया गया है. अब अदालत में इस कानून को ही चुनौती दी गई है.
संजय शर्मा