सुप्रीम कोर्ट पहुंचा एपस्टीन फाइल्स केस, कहा- भारतीय नेताओं की जांच कीजिए

एपस्टीन फाइल्स से जुड़े कथित दस्तावेजों के आधार पर मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. एक पत्र-याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि वह इस पूरे प्रकरण की निगरानी में जांच कराए. याचिका में दावा किया गया है कि इन फाइलों में कुछ भारतीय सार्वजनिक हस्तियों के नाम भी कथित रूप से शामिल हैं.

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एपस्टीन फाइल्स से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. (File photo) एपस्टीन फाइल्स से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. (File photo)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:20 PM IST

एपस्टीन फाइल्स से जुड़ा मामला अब भारत के सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. एक पत्र-याचिका के जरिए अदालत से मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की जांच कोर्ट की निगरानी में कराई जाए. याचिका में कहा गया है कि यह मामला संयुक्त राज्य अमेरिका के न्याय विभाग से जारी कथित दस्तावेजों पर आधारित है, जिन्हें जेफरी एपस्टीन फाइल्स कहा गया है.

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ये दस्तावेज दिवंगत जेफरी एपस्टीन से जुड़े बताए जाते हैं. याचिका में दावा किया गया है कि इन फाइलों में ईमेल, संपर्क सूचियां, उड़ान लॉग और अन्य रिकॉर्ड शामिल हैं. इन रिकॉर्ड में कुछ भारतीय सार्वजनिक हस्तियों के नाम कथित रूप से सामने आने की बात कही गई है.

पत्र-याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील

याचिकाकर्ता ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32, 129 और 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है. याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के किसी जज की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय या विशेष समिति गठित की जाए, जो इन रिपोर्टों और आरोपों की सत्यता की जांच कर सके.

याचिका में यह मांग भी की गई है कि कथित बैठकों और संपर्कों के आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं. इसके साथ ही विशेष रूप से हरदीप सिंह पुरी के संदर्भ में प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए पद से हटाने जैसे निर्देश देने की अपील की गई है.

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विशेष समिति गठित कर आरोपों की सत्यता जांचने का आग्रह

महत्वपूर्ण बात यह है कि दस्तावेजों में वर्णित बातें आरोप और दावों के रूप में प्रस्तुत की गई हैं. याचिका में कहा गया है कि इसका उद्देश्य किसी को दोषी ठहराना नहीं बल्कि एक स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराना है. याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह की जांच संविधान की गरिमा, सार्वजनिक नैतिकता और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है. अब यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस पत्र-याचिका पर क्या रुख अपनाता है और आगे किस तरह की कार्रवाई होती है.

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