'लोगों को मारें, मुआवजा दें और कहें हमारा काम हो गया', मद्रास HC ने ऐसा क्यों कहा?

एंटी-स्टरलाइट प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की मौत को लेकर मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने सख्त टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने कहा कि क्या हम लोगों को मारकर, उनको मुआवजा देकर, ये कह सकते हैं कि हमारा काम हो गया.

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मामले की अगली सुनवाई 9 अगस्त को होगी. (फाइल फोटो) मामले की अगली सुनवाई 9 अगस्त को होगी. (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • चेन्नई,
  • 26 जून 2021,
  • अपडेटेड 8:33 AM IST
  • मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच की तल्ख टिप्पणी
  • कहा, क्या पैसे देकर मामले को रफा-दफा करना संभव है?

मई 2018 में तूतीकोरिन में एंटी-स्टरलाइट प्रदर्शन में पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की मौत को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने बेहद ही सख्त टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने कहा, "क्या हम लोगों को मारकर उनको मुआवजा देकर कह सकते हैं कि हमारा काम हो गया. क्या हम यही समाज बनाना चाहते हैं."

ये टिप्पणी मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी ने हेनरी टिफागन की याचिका पर सुनवाई करते हुई कही. बेंच दूसरे जज जस्टिस टीएस शिवगननम ने नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) को इस मामले पर रिपोर्ट मांगी की.

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चीफ जस्टिस ने वेदांता कॉप स्मेलटर प्लांट को बंद करने की मांग को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन में मारे गए लोगों के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे का जिक्र करते हुए कहा, "क्या केवल प्रभावित लोगों को पैसे देकर मामले को रफा-दफा करना संभव है?"

चीफ जस्टिस बनर्जी ने आगे कहा, "ये चिंताजनक है कि राज्य अपनी पुलिस के जरिए निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला रहा है और तीन साल बाद भी किसी के खिलाफ मामला तक दर्ज नहीं किया गया है. संवैधानिक सिद्धांतों पर चलने वाले समाज के लिए ये अच्छा नहीं है कि हम पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा दे दें और पुलिस की कार्रवाई और उसकी संभावित क्रूरता को नजरअंदाज कर दें."

हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि "तथ्य सामने आने से पहले अभी किसी भी नतीजे पर पहुंचना सही नहीं होगा. लेकिन ये जरूरी है कि तथ्य सामने आएं और उसे सार्वजनिक किया जाए." 

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पुलिस फायरिंग में मारे गए लोगों का ये केस बंद कर दिया था, जिसके बाद एक एनजीओ पीपुल्स वॉच के डायरेक्टर हेनरी टिफागन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर केस को दोबारा खोलने की मांग की थी.

हेनरी टिफागन जो खुद भी एक वकील हैं, ने बेंच को बताया कि "NHRC की टीम ने प्रदर्शन स्थल पर जांच कर एक रिपोर्ट तैयार की थी, लेकिन उसे सार्वजनिक करने की बजाय इस केस को अक्टूबर 2018 में ही बंद कर दिया गया था. इसलिए इस केस को दोबारा खोला जाए."

उन्होंने बताया कि पीड़ितों के परिजनों को 'मुआवजा' देने, सरकार की ओर से शांति स्थापित करने के लिए कदम उठाने, ज्यूडिशियल कमीशन की नियुक्ति करने को आधार बनाकर NHRC ने अक्टूबर 2018 में आदेश दिया था कि "इस मामले में अब और जांच की जरूरत नहीं है."

बेंच ने NHRC को अक्टूबर 2018 में तैयार की गई अपनी रिपोर्ट देने को कहा है, साथ ही साथ 4 हफ्तों में एक हलफनामा दाखिल कर इस मामले पर अपना रूख स्पष्ट करने का आदेश भी दिया है. इस मामले को अब चेन्नई ट्रांसफर कर दिया गया है, जहां 9 अगस्त को इसकी सुनवाई होगी.

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तमिलनाडु की तूतीकोरिन में 22 मई 2018 को स्टरलाइट कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की थी. इस फायरिंग में 13 लोग मारे गए थे.

 

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