कर्नाटक विधानसभा में गुरुवार को फोन टैपिंग के मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ. विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायकों ने सरकार पर लोक भवन के फोन कॉल रिकॉर्ड कराने के आरोप लगाते हुए हंगामा किया. यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब कर्नाटक सरकार के कानून विभाग के मंत्री एचके पाटिल ने सदन में कहा कि राज्यपाल थावरचंद गहलोत नई दिल्ली से फोन पर निर्देश प्राप्त कर रहे थे.
एचके पाटिल के ही पास संसदीय कार्य विभाग का प्रभार भी है. दरअसल, कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी. धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बीजेपी के विधायक सुरेश कुमार ने जनवरी, 2011 की घटनाओं का जिक्र करते हुए सीएम सिद्धारमैया का नाम लिया.
उन्होंने कहा कि तब के राज्यपाल एचआर भारद्वाज ने एक मिसाल कायम की थी. एचआर भारद्वाज ने तत्कालीन विपक्ष के नेता सिद्धारमैया के कहने पर अभिभाषण पढ़े बिना ही वॉकआउट कर दिया था. इस पर एचके पाटिल ने आपत्ति की. एचके पाटिल ने कहा कि इस समय के राज्यपाल को दिल्ली से फोन आ रहे थे.
राज्यपाल केंद्र सरकार के कहने पर काम कर रहे थे. एचके पाटिल की इस बात पर बीजेपी विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया. बीजेपी विधायकों ने कानून और संसदीय कार्य विभाग के मंत्री के इस बयान पर कड़ा विरोध जताया. बीजेपी विधायक सुरेश कुमार ने पूछा कि क्या सरकार फोन टैप कर रही है? क्या लोक भवन का फोन टैप किया जा रहा है? कानून मंत्री को इसका जवाब देना चाहिए.
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इस पर कर्नाटक सरकार के आईटी विभाग के मंत्री प्रियंक खड़गे ने हस्तक्षेप किया और कहा कि लोक भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कर्नाटक के मुख्यालय केशव कृपा से भी फोन कॉल आते हैं. बीजेपी विधायक सुरेश कुमार ने इस पर कहा कि उन्होंने फिर दावा किया है कि लोक भवन में दिल्ली से फोन आते हैं. इसका मतलब है कि सरकार फोन टैप कर रही है.
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उन्होंने जोड़ा कि राज्यपाल के अभिभाषण वाले दिन भी मंत्री ने इसी तरह की टिप्पणी की थी. बीजेपी विधायक सुनील कुमार ने मांग की है कि एचके पाटिल अपने दावे को साबित करने के लिए रिकॉर्ड सदन में पेश करें.
सगाय राज