जब हम किसी वाहन की बात करते हैं तो सबसे पहले उसके का फ्यूल का ख्याल आता है. कार और बाइक में पेट्रोल या डीजल डलता है, हवाई जहाज में जेट फ्यूल इस्तेमाल होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि समुद्र में चलने वाले विशाल जहाज आखिर किस फ्यूल से चलते हैं? क्योंकि ये जहाज इतने बड़े होते हैं कि इनमें हजारों टन सामान और हजारों लोग एक साथ सफर करते हैं. ऐसे में इनको चलाने के लिए भी अलग तरह का ईंधन इस्तेमाल किया जाता है.चलिए जानते हैं बड़े-बड़े जहाजों में आखिर कौन सा तेल डाला जाता है और यह कैसे काम करता है.
जहाजों में कौन सा ईंधन इस्तेमाल होता है?
समुद्र में चलने वाले बड़े जहाजों में आमतौर पर हेवी फ्यूल ऑयल (Heavy Fuel Oil – HFO) या बंकर फ्यूल (Bunker Fuel) इस्तेमाल किया जाता है. यह पेट्रोल या डीजल की तरह साफ और हल्का ईंधन नहीं होता, बल्कि यह कच्चे तेल को रिफाइन करने के बाद बचा हुआ गाढ़ा और भारी तेल होता है.
दरअसल जब कच्चे तेल को रिफाइनरी में प्रोसेस किया जाता है तो उससे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और जेट फ्यूल जैसे हल्के ईंधन पहले निकाल लिए जाते हैं. इसके बाद जो भारी और गाढ़ा तेल बचता है, वही हेवी फ्यूल ऑयल कहलाता है. इसी का इस्तेमाल बड़े समुद्री जहाजों में किया जाता है.
बंकर फ्यूल क्या होता है?
जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन को आम भाषा में बंकर फ्यूल कहा जाता है. यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि जहाजों में ईंधन रखने के लिए जो टैंक होते हैं उन्हें “बंकर” कहा जाता है.
बंकर फ्यूल कई प्रकार का होता है, जैसे:
इनमें से सबसे ज्यादा इस्तेमाल हेवी फ्यूल ऑयल का होता है, क्योंकि यह बाकी ईंधनों के मुकाबले काफी सस्ता होता है.
इतना भारी तेल क्यों इस्तेमाल किया जाता है?
अब सवाल आता है कि जहाजों में इतना भारी और गाढ़ा तेल क्यों इस्तेमाल किया जाता है?
इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
1. लागत कम होती है
बड़े जहाजों को चलाने के लिए बहुत ज्यादा ईंधन की जरूरत होती है. अगर इनमें पेट्रोल या डीजल इस्तेमाल किया जाए तो लागत बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी. इसलिए कंपनियां सस्ता ईंधन इस्तेमाल करती हैं.
2. लंबे सफर के लिए जरूरी
समुद्री जहाज हजारों किलोमीटर की दूरी तय करते हैं और कई दिनों तक समुद्र में रहते हैं. ऐसे में उन्हें ऐसे ईंधन की जरूरत होती है जो बड़ी मात्रा में स्टोर किया जा सके और लंबे समय तक चल सके.
3. बड़े इंजन के लिए उपयुक्त
जहाजों में लगे इंजन सामान्य गाड़ियों के इंजन से कई गुना बड़े और शक्तिशाली होते हैं. ये इंजन भारी ईंधन को भी आसानी से जला सकते हैं.
जहाज का इंजन कितना बड़ा होता है?
जहाजों में लगे इंजन दुनिया के सबसे बड़े इंजनों में गिने जाते हैं. कुछ कंटेनर जहाजों में ऐसे इंजन होते हैं जिनकी ऊंचाई चार मंजिला इमारत जितनी होती है. इन इंजनों की खासियत यह है कि ये बहुत कम स्पीड पर भी बहुत ज्यादा ताकत पैदा करते हैं.इसी ताकत की मदद से हजारों टन वजनी जहाज समुद्र में आगे बढ़ते हैं.
जहाज में ईंधन कैसे इस्तेमाल होता है?
हेवी फ्यूल ऑयल बहुत गाढ़ा होता है, इसलिए इसे सीधे इंजन में नहीं डाला जाता. पहले इसे गर्म किया जाता है ताकि यह पतला हो जाए. इसके बाद इसे पाइप के जरिए इंजन तक पहुंचाया जाता है, जहां यह जलकर ऊर्जा पैदा करता है और जहाज आगे बढ़ता है. इस पूरी प्रक्रिया में कई तरह के फिल्टर और सिस्टम लगे होते हैं ताकि इंजन को नुकसान न पहुंचे.
क्या जहाजों में सिर्फ यही ईंधन इस्तेमाल होता है?
पहले ज्यादातर जहाज हेवी फ्यूल ऑयल पर ही चलते थे. लेकिन अब पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कई नए विकल्प भी अपनाए जा रहे हैं. आजकल कुछ जहाज इन ईंधनों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं:
जहाजों से कितना ईंधन खर्च होता है?
एक बड़ा कंटेनर जहाज रोजाना लगभग 150 से 250 टन तक ईंधन खर्च कर सकता है. यह मात्रा कई बार इससे भी ज्यादा हो सकती है, खासकर जब जहाज पूरी स्पीड से चल रहा हो. यही वजह है कि जहाज कंपनियां सस्ते ईंधन का इस्तेमाल करना पसंद करती हैं.
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