जब पेरिस में एफिल टावर का इनोग्रेशन हुआ, सिर्फ 2 वर्ष में पूरा हुआ था निर्माण

आज के दिन ही पेरिस के एफिल टावर का उद्घाटन हुआ था. आधुनिक युग की बेजोड़ संरचना तब लोगों के लिए आर्किटेक्टर का एक अदभुत उदाहरण था और आज भी यह लोगों को हैरान करता है.

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एफिल गुस्तोव ने बनाया था एफिल टावर (Photo - Pexels) एफिल गुस्तोव ने बनाया था एफिल टावर (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:55 PM IST

31 मार्च 1889 को पेरिस में एफिल टॉवर का उद्घाटन हुआ और यह लोगों के लिए खोल दिया गया. इस टॉवर के डिजाइनर गुस्ताव एफिल थे और इसके उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता उन्होंने की थी. इस मौके पर टावर को बनाने वाले 200 श्रमिक भी उपस्थित थे. 

1889 में, फ्रांसीसी क्रांति की शताब्दी के उपलक्ष्य में , फ्रांसीसी सरकार ने एक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का आयोजन किया और मध्य पेरिस के चैंप-डे-मार्स में बनने वाले एक स्मारक के लिए डिजाइन प्रतियोगिता की घोषणा की. 100 से अधिक प्रस्तुत डिजाइनों में से, समिति ने एफिल की खुली जालीदार लोहे की मीनार की प्लानिंग और डिजाइन को चुना. यह पेरिस की सबसे ऊंची संरचना बनने वाली थी और इसकी ऊंचाई लगभग 1,000 फीट होती. तब लोगों ने ये नहीं सोचा था कि निर्माण पूरा होने के साथ यह दुनिया की सबसे ऊंची मानव निर्मित संरचना होगी.

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एफिल, एक प्रसिद्ध पुल निर्माता थे. वह धातु की संरचना निर्माण में माहिर थे और उन्होंने स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का ढांचा भी डिजाइन किया था , जिसे तब न्यूयॉर्क हार्बर में स्थापित किया गया था. एफिल ने बिना विचलित हुए, अपने विशाल टावर को बजट से कम खर्च में, मात्र दो वर्षों में पूरा कर लिया. निर्माण के दौरान केवल एक मजदूर की जान गई, जो उस समय इतनी बड़ी परियोजना के लिए उल्लेखनीय रूप से कम थी. यह हल्का और हवादार ढांचा हर लिहाज से एक तकनीकी चमत्कार था और कुछ ही दशकों में इसे वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति का दर्जा मिल गया.

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एफिल टावर 984 फीट ऊंचा है और इसमें लोहे का ढांचा चार पत्थर के खंभों पर टिका है, जिनसे चार स्तंभ ऊपर उठते हैं और मिलकर एक टावर बनाते हैं. प्रत्येक प्लेटफॉर्म पर एक अवलोकन डेक है और ये तीन स्तरों पर स्थित हैं. लिफ्टें घुमावदार तरीके से खंभों पर ऊपर जाती हैं, और एफिल ने टावर की प्रसिद्ध कांच की पिंजरानुमा लिफ्टों को डिजाइन करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की ओटिस एलिवेटर कंपनी को ठेका दिया था.

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31 मार्च, 1889 तक लिफ्टों का निर्माण पूरा नहीं हो पाया था, इसलिए गुस्ताव एफिल अपने कुछ साहसी साथियों के साथ टावर की सीढ़ियों पर चढ़े और संरचना के ध्वजदंड पर एक विशाल फ्रांसीसी तिरंगा फहराया. इसके बाद दूसरे चबूतरे से आतिशबाजी की गई. एफिल और उनके साथी नीचे उतरे और वास्तुकार ने मेहमानों और लगभग 200 श्रमिकों को संबोधित किया.

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1930 में न्यूयॉर्क में क्रिसलर बिल्डिंग के पूरा होने तक एफिल टॉवर दुनिया की सबसे ऊंची मानव निर्मित संरचना बनी रही. हैरानी की बात यह है कि 1909 में जब अंतराष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए भूमि का 20 साल का पट्टा समाप्त हुआ, तो एफिल टॉवर को लगभग ध्वस्त कर देने की योजना थी, लेकिन रेडियो प्रसारण के लिए एक एंटीना के रूप में इसके महत्व ने इसे बचा लिया.

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