जब चेर्नोबिल के परमाणु रिएक्टर में विस्फोट हुआ, सालों तक फैलता रहा था रेडिएशन

आज के दिन ही सोवियत रूस के चेर्नोबिल में जो अब यूक्रेन में है. सबसे बड़ा परमाणु संकट पैदा हो गया था. जब चेर्नोबिल स्थित परमाणु रिएक्टर में अचानक विस्फोट हो गया.

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आज ही चेर्नोबिल में दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संकट गहराया था (Photo - Pexels) आज ही चेर्नोबिल में दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संकट गहराया था (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:59 AM IST

26 अप्रैल 1986 को सोवियत संघ के चेर्नोबिल परमाणु रिएक्टर में विस्फोट हुआ था. यह दुनिया की सबसे भीषण परमाणु त्रासदी मानी जाती है. इस परमाणु संकट के शुरुआती दिनों में 32 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों लोग रेडिएशन से झुलस गए थे. स्वीडिश अधिकारियों द्वारा इसके प्रभाव की रिपोर्ट के बाद ही सोवियत अधिकारियों ने इसे स्वीकार किया कि दुर्घटना हुई थी.

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चेर्नोबिल स्टेशन यूक्रेन में कीव से लगभग 65 मील उत्तर में स्थित प्रिपीट बस्ती में था. 1970 के दशक के अंत में प्रिपीट नदी के किनारे निर्मित चेर्नोबिल में चार रिएक्टर थे. इनमें से प्रत्येक 1,000 मेगावाट विद्युत उत्पादन करने में सक्षम था.

 25 अप्रैल, 1986 की शाम को, इंजीनियरों के एक समूह ने रिएक्टर नंबर 4 पर एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एक्सपेरिमेंट शुरू किया. रिएक्टर फिजिक्स के बारे में कम जानकारी रखने वाले ये इंजीनियर यह देखना चाहते थे कि क्या रिएक्टर का टरबाइन इंटिरियल पावर से इमरजेंसी में वाटर पंप चला सकता है.

अपने खराब ढंग से डिजाइन किए गए प्रयोग के तहत, इंजीनियरों ने रिएक्टर के इमरजेंसी सेफ्टी सिस्टम और पावर रेगुलेटिंग सिस्टम को डिस्कनेक्ट कर दिया. इसके बाद, उन्होंने कई गलतियां करके इस लापरवाही को और बढ़ा दिया. उन्होंने रिएक्टर को इतनी कम बिजली पर चलाया कि रिएक्शन अस्थिर हो गई और फिर इसे दोबारा चालू करने के प्रयास में रिएक्टर की बहुत सारी कंट्रोल रॉड निकाल दीं.

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रिएक्टर का उत्पादन 200 मेगावाट से अधिक हो गया, लेकिन इसे नियंत्रित करना लगातार मुश्किल होता जा रहा था. फिर भी, 26 अप्रैल को सुबह 1:23 बजे, इंजीनियरों ने अपना प्रयोग जारी रखा और टरबाइन जनरेटर को बंद कर दिया, ताकि यह देखा जा सके कि क्या इसकी इंटिरियल स्पिनिंग रिएक्टर के वाटर पंपों को पावर दे सकता है. वास्तव में, इसने वाटर पंपों को पावर नहीं दी और कूलिंग वाटर के बिना रिएक्टर में बिजली का स्तर अचानक बढ़ गया.

पिघलने से बचाने के लिए, संचालकों ने लगभग 200 कंट्रोल रॉड को एक साथ रिएक्टर में वापस डाल दिया. रॉड डालने का मकसद रिएक्शन को कम करना था, लेकिन उनमें एक खामी थी. ग्रेफाइट के सिरे. इसलिए, कंट्रोलिंग रॉड की पांच मीटर लंबी ऑब्जर्वेंट मैटेरियल कोर में प्रवेश करने से पहले ही, 200 ग्रेफाइट के सिरे एक साथ अंदर चले गए. इससे रिएक्शन तेज हो गई और एक विस्फोट हुआ, जिसने रिएक्टर के भारी स्टील और कंक्रीट के ढक्कन को उड़ा दिया.

 यह परमाणु विस्फोट नहीं था, क्योंकि परमाणु ऊर्जा संयंत्र ऐसे रिएक्शन उत्पन्न करने में असमर्थ होते हैं, बल्कि यह रासायनिक विस्फोट था, जो अनियंत्रित अभिक्रिया से उत्पन्न गैसों और भाप के जलने के कारण हुआ था. विस्फोट और उसके बाद लगी आग में, 50 टन से अधिक रेडियोधर्मी पदार्थ वायुमंडल में फैल गया.

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27 अप्रैल को सोवियत अधिकारियों ने प्रिपीट के 30,000 निवासियों को निकालना शुरू किया. मामले को दबाने की कोशिश की गई, लेकिन 28 अप्रैल को चेर्नोबिल से 800 मील से अधिक उत्तर-पश्चिम में स्थित स्वीडिश रेडिएशन मॉनिरिंग स्टेशनों ने सामान्य से 40 प्रतिशत अधिक रेडिएशन लेवल की सूचना दी. उसी दिन बाद में, सोवियत समाचार एजेंसी ने स्वीकार किया कि चेर्नोबिल में एक बड़ी परमाणु दुर्घटना हुई थी.

संकट के शुरुआती दिनों में चेर्नोबिल में 32 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग रेडिएशन से झुलस गए. वायुमंडल में फैला रेडिएशन, जो हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बमों से कई गुना अधिक था. हवा के साथ उत्तरी और पूर्वी यूरोप में फैल गया. इससे लाखों एकड़ जंगल और खेत दूषित हो गए. अनुमान है कि चेर्नोबिल रेडिएशन के संपर्क में आने से लगभग 5,000 सोवियत नागरिकों की कैंसर और अन्य रेडिएशन से होने वाली  बीमारियों से मृत्यु हो गई और लाखों अन्य लोगों का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हुआ.

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