लंबे समय से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का पद संभाल रहे सीनियर आईएएस अफसर रमा रमण को सभी पदों से हटा दिया गया है. फिलहाल सरकार ने उन्हें वेटिंग में रखा है. इसके साथ ही प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा और कड़ी रही मोनिका गर्ग को नोएडा के सीइओ का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है.
दरअसल रमा रमण पिछले 6 सालों से नोएडा में थे. इनकी तैनाती को लेकर में याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें अभी भी सुनवाई चल रही है. पिछले दिनों इन्हे अध्यक्ष पद से हटाया गया था. लेकिन सीओ का चार्ज इन्हीं के पास बरकरार था.
रमा रमण को हाई कोर्ट से लगा था झटका
उत्तर प्रदेश में तमाम ऐसे आईएएस अफसर हैं, जिनका जलवा सभी सरकारों पर कायम रहता है. रमा रमण उन्ही में से एक हैं. लेकिन गुरुवार को को यूपी सरकार ने सभी पदों से हटा दिया. अभी हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सीईओ के रूप में रमा रमण के काम करने पर रोक लगा दी थी. यही नहीं, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने सख्त निर्देश में रमा रमण के अधिकार जब्त करने के भी आदेश दिए थे. हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि प्रदेश सरकार को रमा रमण का ट्रांसफर गौतम बुद्ध नगर जिले से बाहर करना होगा.
6 सालों से पद पर थे रमा रमण कायम
जानकारी के मुताबिक ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के चेयरमैन पद पर रमा रमण काफी लंबे समय से तैनात थे. रमा रमण पिछले 6 सालों से नोएडा अथॉरिटी और यमुना एक्सप्रेस-वे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के मुख्य अधिशासी के पद पर जमे थे. हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रमा रमण के एक साथ 3 पोस्ट संभालने पर दर्ज की थी. सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र गोयल की याचिका पर हाईकोर्ट का ये फैसला आया था. रमा रमण 2009 में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के सीईओ बने थे, फिर 2011 में ग्रेटर नोएडा, नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी के चेयरमैन भी बनाए गए.
हाई कोर्ट ने 2 हफ्ते में तबादले का दिया था आदेश
कुछ दिन पूर्व इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि प्रदेश सरकार रमा रमण का 2 हफ्ते में ट्रांसफर करे. खास बात यह है कि चाहे मायावती सरकार हो या फिर अखिलेश यादव सरकार, सभी पर आईएएस रमा रमण का जादू हमेशा चलता रहा. नोएडा, ग्रेटर नोएडा या फिर यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण में चाहे जितने भी बड़े घोटाले हुए हो, लेकिन रमा रमण की कुर्सी नहीं हिली थी.
अनूप श्रीवास्तव