विकास दुबे एनकाउंटर की जांच से पूर्व DGP को हटाने की मांग, SC ने खारिज की याचिका

याचिकाकर्ता अनूप अवस्थी ने कहा कि के एल गुप्ता ने एक इंटरव्यू में कहा है कि पुलिस के बयान को हमें फेस वैल्यू पर लेना चाहिए. उन्होंने कहा है कि एनकाउंटर किए नहीं जाते हैं, हो जाते हैं. ऐसे में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कैसे हो सकती है.

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उज्जैन पुलिस की गिरफ्त में विकास दुबे (फाइल फोटो- पीटीआई) उज्जैन पुलिस की गिरफ्त में विकास दुबे (फाइल फोटो- पीटीआई)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 28 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 2:44 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की कमेटी के सदस्यों की बदलने की मांग
  • याचिकाकार्ता ने केएल गुप्ता को कमेटी से की थी हटाने की अपील

कानपुर के अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर की जांच के लिए बनी कमेटी से पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता को हटाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है.

बता दें कि अनूप अवस्थी नाम के शख्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके केएल गुप्ता को जांच कमेटी से हटाने की मांग की थी. इसके बजाय इस शख्स ने यूपी के किसी अन्य पूर्व डीजीपी को कमेटी में शामिल करने की अपील की थी. याचिकाकर्ता ने तर्क दिया केएल गुप्ता जांच को प्रभावित कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है.

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इस याचिका में पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता के अलावा हाइकोर्ट के जज शशिकांत अग्रवाल को भी बदलने की मांग की गई है.

केएल गुप्ता ने पहले ही क्लीन चिट दे दी है

याचिकाकर्ता ने कहा है कि पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता ने अपने मीडिया इंटरव्यू में पहले ही पुलिस को क्लीन चिट दे दिया है. ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे हो सकती है.

याचिकाकर्ता अनूप अवस्थी ने कहा कि के एल गुप्ता ने एक इंटरव्यू में कहा है कि पुलिस के बयान को हमें फेस वैल्यू पर लेना चाहिए. उन्होंने कहा है कि एनकाउंटर किए नहीं जाते हैं, हो जाते हैं. ऐसे में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कैसे हो सकती है.

कमेटी में SC और HC के भी जज

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े ने कहा कि जांत कमेटी में एक सुप्रीम कोर्ट के जज हैं और एक HC के जज भी हैं. एक अधिकारी के कारण जांच आयोग को बदला नहीं जा सकता है.

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बता दें कि केएल गुप्ता 2 अप्रैल 1998 से लेकर 23 दिसंबर 1999 तक उत्तर प्रदेश के डीजीपी रहे हैं. वे कई जिलों में एसपी भी रह चुके हैं.

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