चौरी चौरा की घटना के 100 साल, 4 फरवरी को PM मोदी करेंगे कार्यक्रम की शुरुआत

साल था 1922. महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन पूरे उफान पर था. इसी दौरान यूपी के गोरखपुर के चौरी चौरा में अंग्रेजी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा था. 4 फरवरी को भीड़ चौरी चौरा पहुंची तो आंदोलनकारी बेकाबू हो गए.

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चौरी चौरा स्मारक चौरी चौरा स्मारक

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 1:36 PM IST
  • 4 फरवरी 1922 को हुई थी चौरी चौरा की घटना
  • आंदोलनकारियों ने पुलिस चौकी में लगाई थी आग
  • साल भर उत्तर प्रदेश में होगा कार्यक्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 फरवरी 2021 को ऐतिहासिक चौरी चौरा घटना के शताब्दी समारोह का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे. चौरी चौरा की घटना को याद करने के लिए यूपी सरकार इस वर्ष चौरी चौरा की घटना का शताब्दी समारोह मना रही है. साल 1922 में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने चौरी चौरा में एक पुलिस चौकी में आग लगा दी थी. इस घटना में 22 पुलिसकर्मी मारे गए थे. 

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प्रधानमंत्री मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे. इस दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ भी वहां मौजूद रहेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मौके पर एक टिकट भी जारी करेंगे. 

इसी के साथ उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलो में इस घटना को याद करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत होगी जो कि 4 फरवरी 2022 तक चलेगी. 

क्या है चौरी चौरा की घटना

देश की आजादी के लिए आंदोलन चल रहा था. साल था 1922. महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन पूरे उफान पर था. इसी दौरान यूपी के गोरखपुर के चौरी चौरा में में अंग्रेजी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा था. 4 फरवरी को भीड़ चौरी चौरा पहुंची तो आंदोलनकारी बेकाबू हो गए. 

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आंदोलनकारियों ने बिट्रिश सरकार की एक पुलिस चौकी में आग लगा दी. इस घटना में इस पुलिस चौकी में छिपे हुए 22 पुलिस कर्मचारी जिन्दा जलकर मर गए थे. इसी घटना को इतिहास में चौरी चौरा कहा जाता है.  इस हिंसा के बाद महात्मा गांधी बेहद दुखी हुए उन्होंने इस घटना के बाद असहयोग आन्दोलन को वापस ले लिया. 

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इस घटना में अंग्रेजों ने 222 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिसमें से 19 लोगों को दो जुलाई, 1923 को फांसी की सजा हुई थी.

 

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