राम मंदिर के पक्षकार रहे, गोडसे के पुजारी, जानें कौन थे कमलेश तिवारी

पैगंबर साहब पर विवादित टिप्पणी कर सुर्खियों में आए तिवारी हिंदू महासभा से जुड़े रहे और कुछ समय के लिए अयोध्या के राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में पक्षकार भी रहे. पैगंबर साहब पर टिप्पणी के बाद सरकार ने उन पर रासुका लगाया गया था.

कमलेश तिवारी (फाइल फोटोः indiatoday.in)
aajtak.in
  • लखनऊ,
  • 18 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 8:11 PM IST

  • राम मंदिर के पक्षकार भी रहे कमलेश तिवारी
  • पैगंबर पर टिप्पणी से आए थे विवादों में
  • गोडसे का मंदिर बनवाने का किया था ऐलान

हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बदमाशों ने उनके कार्यालय में घुसकर हत्या कर दी. राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में भी निरूद्ध रहे कमलेश तिवारी अपने बयानों से हमेशा विवादों में रहे. तिवारी को अपनी जान पर मंडरा रहे खतरे का अंदेशा था और वह सरकार से सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी कर रहे थे.

पैगंबर साहब पर विवादित टिप्पणी कर सुर्खियों में आए तिवारी हिंदू महासभा से जुड़े रहे और कुछ समय के लिए अयोध्या के राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में पक्षकार भी रहे. पैगंबर साहब पर टिप्पणी के बाद सरकार ने उन पर रासुका लगाया गया था. तब तिवारी के खिलाफ लाखों मुसलमान सड़कों पर उतर आए थे और विरोध प्रदर्शन किया था.

कहा जाता है कि बिजनौर के उलेमा अनवारुल हक और मुफ्ती नईम कासमी ने तिवारी का सिर कलम करने का फतवा भी जारी किया था. तिवारी ने पैगंबर साहब पर की गई टिप्पणी के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हाथ बताते हुए दावा किया था कि यह बयान मेरा नहीं, संघ का था. हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रासुका हटा दी थी.

संघ और भाजपा का भी किया था विरोध

कमलेश तिवारी पैगंबर साहब को लेकर दिए अपने बयान के बाद हुए विवाद और उससे संघ की दूरी से आहत होकर संघ से भी दूर हो गए थे. उन्होंने कई अवसरों पर संघ और भाजपा के खिलाफ भी खुलकर बोला. तिवारी ने संघ को दोहरे चरित्र वाला संगठन बताया था. तिवारी ने भाजपा की भी आलोचना करते हुए उसे भी कांग्रेस और सपा, बसपा जैसी पार्टी बताते हुए सवाल किया था कि चुनाव के समय क्यों चिल्लाते हो कि हिंदू अस्मिता खतरे में है.

तलवार की नोंक पर राम मंदिर निर्माण का दिया था बयान

राम मंदिर के पक्षकार रहे तिवारी मंदिर निर्माण पर अपने बयान से भी सूर्खियों में रहे थे. उन्होंने कहा था कि जिस दिन अयोध्या में पांच लाख हिंदू इकट्ठा हो गया, उस दिन राम मंदिर का निर्माण हो जाएगा. कमलेश तिवारी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण होकर रहेगा चाहे वह तलवार के दम पर क्यों न हो.

तिवारी ने मोदी सरकार को अगस्त तक का अल्टीमेटम देते हुए आंदोलन की चेतावनी दी थी. उन्होंने छह दिसंबर 2018 को विवादित स्थल पर कार सेवा करने की घोषणा की थी. इसके बाद तीन दिसंबर 2018 को उन्हें अयोध्या में गिरफ्तार भी किया गया था. तिवारी ने कहा था कि अयोध्या में क्या होगा यह कोई न्यायालय या सरकार तय नहीं कर सकती. यह सिर्फ हिंदुओं की हुंकार तय कर सकती है.

गोडसे का मंदिर बनवाने का किया था ऐलान

कमलेश तिवारी ने नाथूराम गोडसे को देश का सच्चा सपूत बताते हुए सीतापुर में अपनी पैतृक जमीन पर गोडसे का मंदिर बनवाने का भी ऐलान किया था और भाजपा की आलोचना की थी. तीन दिसंबर 2018 को उन्होंने कहा था कि इस देश में जिन्ना की पूजा की जा सकती है तो गोडसे की क्यों नहीं. भाजपा यदि हिंदुओं की सरकार होने का दावा करती है तो गोडसेवाद का विरोध क्यों करती है.

उन्होंने घर-घर से गोडसे निकालने की बात करते हुए कहा था कि जिन्ना और गांधी अब जहां भी दिखेंगे, उन्हें गोली मार दी जाएगी. तिवारी ने कहा था कि इस देश में बढ़ती जिन्ना की सोच गोडसे का मंदिर बनवाने को विवश कर रही है. सीतापुर, लखनऊ और अहमदाबाद के साथ ही 100 जिलों में हिंदू समाज पार्टी गोडसे की प्रतिमा स्थापित कराएगी.

शिवसेना का प्रदेश अध्यक्ष बताने पर आपत्ति के बाद बनाई पार्टी

कमलेश तिवारी खुद को शिवसेना का प्रदेश अध्यक्ष बताते थे. इस पर शिवसेना की आपत्ति के बाद उन्होंने हिंदू समाज पार्टी बनाई. तिवारी ने रासुका की कार्रवाई के बाद भाजपा की सरकारों के खिलाफ भी हमलावर रुख अपना लिया. उन्होंने नए मोटर व्हीकल एक्ट का भी विरोध किया था.

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