नोबेल पुरस्कार विजेता और जापान के मशहूर वैज्ञानिक प्रोफेसर तकाकी कजीता को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के 64 वें दीक्षान्त समारोह में डॉक्टर ऑफ साइंस की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया. प्रोफेसर कजीता को यह उपाधि न्यूकिलयर फिजिक्स के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दी गई है.
एएमयू के 64 वें दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता एएमयू चांसलर सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के भाई डाक्टर कायद जौहर इज्जुद्दीन ने की और मुख्य अतिथि के तौर पर दीक्षान्त भाषण भी दिया.
इस मौके पर अपने भाषण में प्रोफेसर तकाकी कजीता ने मानद उपाधि के लिए एएमयू कुलपति लैफ्टीनेंट जनरल जमीर उद्दीन शाह (सेवानिवृत) का धन्यवाद देते हुए कहा कि वह एएमयू के लिये आभारी हैं और वह इस विश्वविद्यालय के मूलभूत ढ़ांचे और आदर सत्कार से बहुत प्रभावित हुए हैं.
प्रोफेसर कजीता ने एएमयू शिक्षकों एवं शोधार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्हें मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पोस्ट डाक्टोरल रिसर्च में अपना स्थान बनाना चाहिये तथा इस क्षेत्र में आपसी सहयोग की संभावनायें ढ़ूंढ़नी चाहिये. उन्होंने कहा कि जापान का न्यूट्रीनों समुदाय व्यापक रूप से भारत तथा विशेष रूप से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के साथ सहयोग के अवसर को विकसित करने का इच्छुक है.
कार्यक्रम में दीक्षान्त भाषण प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि डाक्टर कायद जोहर इज्जुद्दीन ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खां के शैक्षणिक प्रयास उनके व्यक्तित्व को दर्शाते हैं तथा उन्होंने मुसलमानों में पश्चिमी शिक्षा पद्धति को विकसित करने के क्षेत्र में जो काम कर दिखाये वह हमारे देश के इतिहस में स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाने योग्य हैं. उन्होंने कहा कि हमारा कर्तव्य है कि हम सर सैयद के पद चिन्हों पर चलें. उन्होंने कहा कि आधुनिक तथा साइंटिफिक शिक्षा के विकास के लिए सर सैयद को हिन्दू तथा मुस्लिम सभी वर्गो में आदर सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। उन्होंने विश्विद्यालय के छात्रों से कहा कि वह सर सैयद के पद चिन्हों पर चलकर न केवल अपने लिए बल्कि समस्त कौम एवं देश के लिए अमूल्य काम अंजाम दें.
प्रिंस कायद जोहर इज्जुद्दीन ने कहा कि आज शिक्षा पूर्ण करने वाले छात्र व छात्रायें जीवन के एक नये युग में कदम रख रहे हैं। तथा उन्हें देश के भविष्य के निर्माण में मुख्य भूमिका निभानी है.
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टीनेंट जनरल जमीर उद्दीन शाह (सेवानिवृत) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने से पूर्व विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सय्यदना डॉ मुफद्दल सैफुद्दीन का संदेश पढ़कर सुनाया जिसमें कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय की डिग्रियां प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की.
जनरल शाह ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए विश्वविधालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला. जनरल जमीर उद्दीन शाह ने कहा कि कई राष्ट्रीय एवं अंर्तराष्ट्रीय रैंकिंग एजेंसियों ने एएमयू को भारतीय विश्वविद्यालयों में दूसरे स्थान पर रखा है जिनमें यूएसन्यूस एण्ड वर्ल्ड रिपोर्ट, दी टाइम्स हायर एजूकेशन, इंडिया टुडे, आउट लुक तथा वीक-हंनसा रैंकिंग सर्वे शामिल हैं. उन्होंने कहा कि हाल ही में इंडिया टुडे ने बैस्ट कालिजों के अपने सर्वे में यूनिवर्सिटी की फैकल्टी ऑफ लॉ, फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग, मेडीकल कॉलेज और फाइन आर्टस विभाग को क्रमशः छठे, इक्कीसवें, बारहवें तथा दसवें स्थान पर रखा है.
जनरल शाह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि भारत सरकार ने नेशनल हैल्थ मिशन के अंतर्गत विश्वविद्यालय के पैडियाट्रिक्स कार्डियोलोजी तथा कार्डिएक सर्जरी के लिए 16 करोड़, पैडियाट्रिक विभाग के अर्ली इंटरवेंशन सैंटर के लिए 8 करोड़ रूपये की राशि प्रदान की है जब कि आई0एम0आर0 ने माइक्रोबायोलोजी विभाग में वायरोलोजी लैब की स्थापना के लिए 6 करोड़ का सहयोग प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में पी0एम0एस0एस0वाई0 सुविधाओं के अंतर्गत शीघ्र ही एनजियोग्राफी तथा एनजियोप्लास्टी की सुविधायें प्राप्त होंगी। उन्होंने कहा कि मेडीकल कालिज में कैथलैब की स्थापना के अंतर्गत 9 करोड़ की लागत से हार्ट लंग मशीन उलब्ध कराई गई है।
जनरल शाह ने कहा कि विश्वविद्यालय में आठ विभागों पर आधारित फैकल्टी आॅफ इंटरनेशनल स्टडी की स्थापना के अतिरिक्त फैकल्टी आॅफ एंवायरलमिंटल स्टडीज और इंस्टीटयूट आॅफ फार्मेसी की स्थापना को मंजूरी प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में नैनोटैक्नालोजी के केन्द्र को स्वावलंबी बना दिया गया है ताकि इस क्षेत्र में हमारे वैज्ञानिक स्वतंत्रता पूर्वक काम कर सकें। उन्हांेने कहा कि विश्वविद्यालय के शोधार्थी नैनोफर्टीलाइजर को विकसित करने के अतिरिक्त समुद्री जल से खारापन को समाप्त करने तथा पानी के कचरे की बगैर किसी खर्च के सफाई के क्षेत्र में विशेष सफलता प्राप्त करने के करीब हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक गंगा तथा यमुना की सफाई से सम्बन्धित केन्द्रीय सरकार के प्रोजेक्ट में शामिल हैं।
जनरल शाह ने कहा कि विश्वविद्यालय में कई विभागों को यूजीसी के डीएसटी पर्स तथा बिल्डर प्रोग्रामों के अंतर्गत सीएएस एवं डीएसए का दर्जा दिया गया है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने 19 पेटेटेंस के लिए प्रार्थना पत्र दिया है जब कि लगभग 80 करोड़ की 102 शोध परियोजनायें विश्वविद्यालय के अध्यापकों ने प्राप्त की हैं। इसके अतिरिक्त 74 अध्यापकों तथा छात्रों ने विभिन्न विदेशी विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक उद्देश्यों के अंतर्गत स्टडी टूर किये.
कुलपति ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक एवं शोधीय सहयोग के लिए कई विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ समझौते किये हैं, जिनमें ईरान के अल-मुस्तफा यूनिवर्सिटी, मालदीप विश्वविद्यालय तथा अमरीका के ओहायो विश्वविद्यालय के नाम उल्लेखनीय हैं।
इस मौके पर विश्वविद्यालय से शिक्षा पूर्ण करने वाले लगभग पाॅच हजार अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, एफ.फिल तथा पी.एच.डी. छात्र-छात्राओं को डिग्रियों तथा 215 को स्वर्ण पदकों से विभूषित किया गया। बी.यू.एम.एस. की हिना मुखतार ने सर्वाधिक 5 स्वर्ण पद प्राप्त किये जब कि बी.ए.एल.एल.बी. की समीरा खान को चार स्वर्ण पदक प्रदान किये गये. हाल ही में स्थापित जस्टिस गुलाम मुस्तफा वाहनवति एवार्ड के अंर्तगत 50 हजार रूपये का चैक श्रीमती नफीसा वाहनवति ने समीरा खान को प्रदान किया। इसके अतिरिक्त डॉ. शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिये पी.जी.डिप्लोमा इन हाइड्रोलोजी की छात्रा लता उदसिया को दिया गया.
कुलपति ने अंत में कहा कि एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप की बहाली को गंभीरता के साथ सुप्रीम कोर्ट में पेश कर रहा है. और उन्हें पूरा भरोसा है कि उन्हें कामयाबी मिलेगी.
अहमद अजीम