तेलंगाना के हैदराबाद की ओल्ड सिटी में इन दिनों एक अनोखा और रंगीन नजारा देखने को मिल रहा है. मकर संक्रांति और अन्य मौकों तक सीमित रहने वाली पतंगबाजी अब रात के समय भी बड़े पैमाने पर की जा रही है. खासतौर पर गोशामहल और बेगमबाजार इलाके में यह ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जहां हर रात हजारों लोग पतंग उड़ाने के लिए जुट रहे हैं.
आसमान की ओर तेज लाइट्स
सूरज ढलते ही इस पूरे इलाके का दृश्य बदल जाता है. इमारतों और घरों की छतों पर तेज रोशनी की व्यवस्था की गई है, जो सीधे आसमान की ओर की जाती है ताकि पतंगें साफ दिखाई दें. अंधेरे आसमान में चमकती रोशनी के बीच रंग-बिरंगी पतंगें एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती हैं. यह नजारा न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि शहर के अन्य हिस्सों से आने वाले युवाओं और परिवारों को भी आकर्षित कर रहा है.
लाखों रुपये में किराए पर ली जा रही छतें
इस बढ़ते क्रेज का असर रियल एस्टेट पर भी साफ नजर आ रहा है. कई मकान मालिकों ने अपनी छतें रात की पतंगबाजी के लिए किराए पर दे दी हैं, जिनका किराया लाखों रुपये तक पहुंच गया है. छतें अब सिर्फ घर का हिस्सा नहीं रहीं, बल्कि मनोरंजन और उत्सव का प्रमुख केंद्र बन गई हैं.
त्योहार जैसा लाइट्स, खाना, म्यूजिक और वॉलंटीयर व्यवस्था
रात की पतंगबाजी में सुरक्षा और सुविधा का भी खास ध्यान रखा जा रहा है. कई स्थानों पर वॉलंटीयर व्यवस्था संभालते नजर आते हैं, वहीं स्थानीय दुकानदारों को भी इससे अच्छा खासा फायदा हो रहा है. पतंग, मांझा, लाइटिंग उपकरण और खाने-पीने की चीजों की बिक्री में तेजी आई है.
इस पहचान के लिए 15 सालों का प्रयास
गोशामहल के विधायक राजा सिंह ने इस ट्रेंड को वर्षों की मेहनत का नतीजा बताया. उन्होंने कहा कि लगभग 15 वर्षों के निरंतर प्रयासों के बाद बेगमबाजार और गोशामहल क्षेत्र में रात की पतंगबाजी को पहचान मिली है. उनके अनुसार, यहां की नाइट काइट फ्लाइंग अब दिन की पतंगबाजी से कहीं ज्यादा जोशीली और कंपटीटिव हो गई है.
कुल मिलाकर, हैदराबाद के ओल्ड सिटी में रात की पतंगबाजी न सिर्फ एक नया शौक बन चुकी है, बल्कि यह सांस्कृतिक उत्सव, सामाजिक मेलजोल और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा दे रही है.
अब्दुल बशीर