जब वाजपेयी ने की सोनिया को चाट खिलाने की पेशकश, सहज हो गया माहौल

पीएम के अपने कार्यकाल के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने साल 2003 में महिलाओं के लिए एक चाट पार्टी रखी थी. इस पार्टी में सोनिया काफी असहज महसूस कर रही थीं, लेकिन वाजपेयी की एक पेशकश से उनकी असहजता दूर हो गई.

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अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धा सुमन अर्पित करतीं कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धा सुमन अर्पित करतीं कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी

दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2018,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST

साल 2003 की बात है. अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे. उन्होंने महिला दिवस के दिन अपने आवास पर महिलाओं के लिए एक चाट पार्टी रखी थी. इस पार्टी में सोनिया काफी असहज महसूस कर रही थीं, लेकिन वाजपेयी ने अपनी चिर-परिचित शैली में सोनिया के सामने ऐसी पेशकश की कि उनकी सारी असहजता दूर हो गई.

8 मार्च, 2003 को दोपहर के दिन प्रधानमंत्री निवास 7 रेस कोर्स रोड (RCR, जिसे अब लोक कल्याण मार्ग कहा जाता है) पर हर क्षेत्र से जुड़ी दिग्गज महिलाएं जुटी थीं. कई महिलाएं रेशमी साड़ियों और ज्यूलरी से सज-संवर कर भी आई थीं. लेकिन इस पार्टी की दो सबसे बड़ी आकर्षण थी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनकी करीबी दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्ष‍ित, जो अलग-थलग कोने में एक लंबे बेंत के सोफे पर बैठी हुई थीं. कोने में बैठे होने के बावजूद सभी की नजरें इन पर ही थीं.

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सोनिया के बॉडी लैंग्वेज से ऐसा लग रहा था, जैसे वे पार्टी किसी तरह निपटा कर जल्दी से जाना चाहती हों. वे थोड़ी अधीर और रक्षात्मक दिख रही थीं. असल में सोनिया गांधी थोड़े संकोच में थीं. साल 1999 में संख्या नहीं थी, लेकिन वाजपेयी की 13 महीने की सरकार गिरा दी गई थी. बीजेपी ने सोनिया गांधी पर यह आरोप लगाए थे कि उन्होंने देश पर चुनाव थोप दिए. इस वजह से सोनिया सहज नहीं थीं.

लेकिन वाजपेयी के लिए तो यह बात पुरानी हो गई थी. गहरे बंद गले के सूट में फब रहे वाजपेयी सोफे के पास ही दूसरे कोने में एक कुर्सी पर बैठे हुए थे. वह मुस्करा रहे थे और ऐसा लग रहा था कि सोनिया की असहजता का कुछ मजे लेने के मूड में थे. आखिरकार दोनों के बीच बनी चुप्पी उन्होंने ही तोड़ी. उन्होंने अपने मेहमानों की ओर मुखातिब होते हुए कहा, 'अरे, इनके लिए कुछ चाट लाओ, महिलाओं को चाट पसंद होता है.'

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आसपास पत्रकार भी थे. यह कहने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी जोर से हंस पड़े और सोनिया, शीला भी मुस्काए बिना नहीं रह पाईं. वाजपेयी यह जानते थे कि विरोधियों का दिल कैसे जीता जाता है.

उनके बारे में पूर्व वित्त मंत्री ने सही ही कहा है, 'सच यह नहीं है कि वाजपेयी जी के बहुत दोस्त थे, सच तो यह है कि उनका कोई दुश्मन नहीं था.'

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