रविदास मंदिर दलितों के संघर्ष का प्रतीक, इसे फिर से बनाना चाहिए: ममता बनर्जी

दिल्ली के तुगलकाबाद में रविदास मंदिर तोड़े जाने के खिलाफ बुधवार को दलित समाज के लोगों के समर्थन में अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी उतर आई हैं.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की फाइल फोटो (तस्वीर-IANS)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 11:25 PM IST

दिल्ली के तुगलकाबाद में रविदास मंदिर तोड़े जाने के खिलाफ बुधवार को दलित समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया. इस दौरान वहां पर हिंसा भी हुई. इस बीच पूरे मामले पर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने ट्वीट किया है. उन्होंने कहा कि मैं प्रदर्शनकारियों की पीड़ा को समझ सकती हूं. गुरु खुद उस मंदिर में गए थे और वहां पर रुके भी थे. संत रविदास के प्रति हमारे मन में बहुत सम्मान है. मंदिर दलितों के संघर्ष का प्रतीक है और इसे फिर से बनाया जाना चाहिए.

बता दें तुगलकाबाद मंदिर हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर समेत सभी 96 लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर ने कहा कि उनकी तरफ से कोई हिंसा नहीं की गई. साजिश में फंसाया गया. हम बाबा साहब के संविधान को मानते हैं, हिंसा पर भरोसा नहीं करते.

पुलिस का दावा है कि लगभग 90 पुलिसकर्मी इस हिंसा में घायल हुए हैं. दलित कार्यकर्ताओं ने गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया है. पुलिस ने कहा है कि चूंकि हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है इसलिए पुलिस स्टेशन में ही कार्रवाई पूरी की जाए.

क्या है पूरा मामला?

तुगलकाबाद इलाके में रविदास मंदिर तोड़े जाने के खिलाफ बुधवार शाम दलित समाज के लोगों ने रामलीला मैदान में बड़ा प्रदर्शन किया था. इस आंदोलन में दलित समुदाय के नेता और भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर मौजूद थे. इस विरोध प्रदर्शन में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से दलित समुदाय के सैकड़ों लोग भी शामिल हुए.

इसके बाद कई घंटे तक जमकर बवाल हुआ. रामलीला मैदान में रैली के बाद हजारों की संख्या में दलित समुदाय के लोग तुगलकाबाद पहुंचे और पत्थरबाजी शुरू कर दी. हिंसा के दौरान कई पुलिसकर्मी समेत दर्जनभर लोग जख्मी हो गए. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने लाठियां भांजी और कई राउंड हवाई फायरिंग की थी.

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