दलाई लामा के सीने में संक्रमण, दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती

कुछ दिन पहले ही दलाई लामा दिल्ली में थे. 6 अप्रैल को ग्लोबल लर्निंग कांफ्रेन्स में उन्होंने हिस्सा भी लिया था. कांफ्रेन्स में शामिल होने के बाद दलाई लामा सोमवार को दिल्ली से धर्मशाला के लिए रवाना हो गए थे.

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धर्मगुरु दलाई लामा दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती (फाइल) धर्मगुरु दलाई लामा दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती (फाइल)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 10:52 AM IST

तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को सीने में संक्रमण के चलते मंगलवार को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 83 वर्षीय आध्यात्मिक नेता की स्थिति अभी स्थिर है.

अस्पताल से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दलाई लामा को स्वास्थ्य संबंधी कुछ दिक्कतें होने के कारण उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में जांच के लिए लाया गया. उन्होंने बताया कि बुजुर्ग धार्मिक नेता की तबीयत गड़बड़ होने के बाद धर्मशाला ने चेकअप के लिए दिल्ली के साकेत में स्थित मैक्स अस्पताल लाया गया.

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सूत्रों ने बताया कि अस्पताल में उनका चेकअप कराया गया है. वह चेकअप के लिए नियमित तौर पर अस्पताल आते रहे हैं. हालांकि अस्पताल में उनके भर्ती होने के बाद तुरंत उनके एडमिट होने की बात की पुष्टि नहीं की जा सकती थी. इससे पहले भी दलाई लामा दिल्ली आकर अपना उपचार करवा चुके हैं.

कुछ दिन पहले ही दलाई लामा दिल्ली में थे. 6 अप्रैल को ग्लोबल लर्निंग कांफ्रेन्स में उन्होंने हिस्सा भी लिया था. कांफ्रेन्स में शामिल होने के बाद दलाई लामा सोमवार को दिल्ली से धर्मशाला के लिए रवाना हो गए थे.

तिब्बतियों के 14वें दलाई लामा 1959 की शुरुआत में चीनी शासन के खिलाफ एक विद्रोह के बाद अपने प्रशंसकों के साथ तिब्बत से भागकर भारत आ गए थे और तब से यहां पर निर्वासित जीवन जी रहे हैं. उन्होंने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला को अपना ठिकाना बनाया. चीन ने 1950 में तिब्बत को अपने कब्जे में ले लिया था और वह 14वें दलाई लामा को अलगाववादी मानता है.

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पिछले महीने अगले बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक नेता के बारे में दलाईलामा ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा था कि उनका अगला अवतार भारत से हो सकता. साथ ही उन्होंने आगाह भी किया कि चीन की ओर से घोषित अन्य उत्तराधिकारी को सम्मान न दिया जाए. हालांकि जानकारों का मानना है कि चीन की तरफ से अगला दलाई लामा घोषित होने की वजह से भारत के लिए बड़ी असहज स्थिति पैदा होने के आसार हैं जो नेहरू युग से भी बुरी हो सकती है.

दलाई लामा के इस ऐलान को खारिज करते हुए चीन ने कहा है कि पुनर्अवतार की तिब्बती बौद्ध धर्म में सदियों पुरानी रीति रही है. एक निश्चित अनुष्ठान और परंपरा है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हम तिब्बती बौद्ध धर्म के इन परंपराओं का सम्मान और संरक्षण करते हैं. 14वें दलाई लामा की मान्यता भी धार्मिक रीति-रिवाज से हुई थी और इसे चीनी सरकार ने अपनी मान्यता दी थी.

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