तीन विदेशी दौरे, तीनों अफ्रीका में, राष्ट्रपति के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा PM का अफ्रीका एजेंडा

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 7 से 13 अप्रैल तक अफ्रीका महाद्वीप के इक्वेटोरियल गिनी और स्वाजीलैंड के दौरे पर जा रहे हैं.

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राष्ट्रपि‍त रामनाथ कोविंद के मेडागास्कर दौरे की तस्वीर (पीटीआई फाइल फोटो) राष्ट्रपि‍त रामनाथ कोविंद के मेडागास्कर दौरे की तस्वीर (पीटीआई फाइल फोटो)

दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 29 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 12:24 PM IST

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 7 से 13 अप्रैल तक अफ्रीका महाद्वीप के इक्वेटोरियल गिनी और स्वाजीलैंड के दौरे पर जा रहे हैं. यह 25 जुलाई, 2017 को कार्यभार ग्रहण करने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तीसरी विदेश यात्रा होगी.

राष्ट्रपति कोविंद का पहला विदेश दौरा पिछले साल अक्टूबर में दिजिबूती और इथियोपिया का था. इसके बाद वह इस साल 11 मार्च को मारीशस और मेडागास्कर के दौरे पर गए थे. सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति कोविंद का अफ्रीका महाद्वीप के साथ खास लगाव है. उनको लगता है कि अफ्रीका की उपेक्षा की गई है. इसलिए वह लगातार इस महाद्वीप के देशों के दौरे पर जा रहे हैं.

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इसके अलावा राष्ट्रपति कोविंद इस बात के प्रति भी सचेत लगते हैं कि भारतीय विदेश नीति के लिए अफ्रीका और हिंद महासागर के इलाके काफी महत्वपूर्ण हैं. आर्थिक और सामरिक वजहों से पीएम मोदी भी अफ्रीकी देशों के साथ मजबूत रिश्तों पर जोर देते रहे हैं.

वैसे एक सांसद के रूप में रामनाथ कोविंद थाइलैंड, नेपाल, पाकिस्तान, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, यूके और अमेरिका जैसे 9 देशों की यात्रा कर चुके हैं. लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रपति के रूप में अभी तक उन्होंने सिर्फ दो विदेश दौरे किए हैं और दोनों अफ्रीकी देशों के. मेडागास्कर में तो पहली बार कोई भारतीय राष्ट्रपति पहुंचा.

अफ्रीका ही क्यों

राष्ट्रपति का लगातार अफ्रीका के दौरे पर जाना यह साबित करता है कि मोदी सरकार इस महाद्वीप को कितना महत्व दे रही है. भारत के अफ्रीकी देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी रिश्ते लगातार गहरे हो रहे हैं और भारत उनकी आर्थ‍िक तरक्की और राष्ट्रीय विकास में सहयोग कर रहा है्. भारत में अक्टूबर 2015 में इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट का आयोजन किया गया था. इसमें अफ्रीकी महाद्वीप के वे सभी 54 देश शामिल हुए थे, जिनके भारत के साथ राजनयिक रिश्ते हैं. खुद पीएम मोदी भी कई अफ्रीकी देशों की यात्रा कर चुके हैं और उन्होंने कई अफ्रीकी देशों की मेजबानी भी की है.

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अफ्रीकी विकास बैंक की पिछले साल मई में गुजरात में सालाना बैठक हुई थी. अफ्रीका के करीब 46 देशों में भारतीय मूल के करीब 30 लाख लोग रहते हैं. दूसरी तरफ, चीन भी अफ्रीका में काफी सक्रिय है और उनके खजिन संसाधनों के लिए दोहन के लिए आक्रामकता के साथ काम कर रहा है.

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