दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दावा किया था कि केंद्र से दिल्ली सरकार को 2014 में 36,776 करोड़ रुपए मिलते थे और अब 2018 में 48 हजार करोड़ रुपए मिले हैं. मनोज तिवारी ने 4 अक्टूबर को अपने ट्विटर हैंडल पर अरविंद केजरीवाल के ट्वीट के जवाब में ये ट्वीट किया था.
इस ट्वीट के जब फैक्ट चेक किए गए तो सामने आया कि उनका दावा फैक्ट के आधार पर झूठा है. ये ट्वीट 2200 बार से ज्यादा रीट्वीट हो चुका है.
इंडिया टुडे फैक्ट चेक टीम ने पाया कि 2014-15 का देश के वर्तमान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 18 जुलाई 2014 को पेश किया था जिसमें सेंट्रल टैक्स के रूप में दिल्ली सरकार को 325 करोड़ रुपए मिले थे. वहीं, 2018 में जब दिल्ली सरकार के वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने 22 मार्च 2018 को पेश किया तो उसमें केंद्र की तरफ से 775 करोड़ रुपए मिले थे. इसमें भी सेंट्रल टैक्स के रूप में 325 करोड़ ही थे, बाकी के 450 करोड़ रुपए सामान्य केंद्रीय सहायता थी.
स्त्रोत: दिल्ली सरकार का बजट 2014-15
जब इस बारे में मनोज तिवारी से पूछा गया कि आपके क्लेम का सोर्स क्या है तो जवाब मिला , "दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश है और यहां का सारा फंड केंद्र सरकार का होता है. मोदी सरकार ने 36 हजार करोड़ रुपए के कैपिटल बजट को बढ़ाकर 48 हजार करोड़ रुपए कर दिया है. इसलिए आप पार्टी की सरकार ये कहकर बच नहीं सकती कि उनके पास नगर निगम के कर्मचारियों को पेमेंट करने के लिए पैसे नहीं हैं."
दिल्ली सरकार के बजट दस्तावेजों को देखने से साफ पता चलता है कि दिल्ली सरकार 95 फीसदी रेवेन्यू अपने सोर्स ही पैदा करती है जिसमें कई तरह के टैक्स और एक्साइज ड्यूटी की इनकम शामिल है. ऐसे में मनोज तिवारी का दावा तथ्यों के आधार पर संदेहास्पद नजर आया.
स्त्रोत: दिल्ली सरकार का बजट 2018-19
दिल्ली सरकार ने रोज उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए एक जारी की है जिसमें फंडिंग के दावों पर प्रकाश डाला है.
गौरतलब है कि दिल्ली में आप पार्टी की सरकार है और दिल्ली नगर नगर में बीजेपी का वर्चस्व है. दोनों में फंड को लेकर फाइट चल रही है. पूर्वी दिल्ली नगर निगम के कर्मचारी सैलरी न मिलने के कारण 11 सितंबर से हड़ताल पर हैं. बुधवार को दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि हमें 500 करोड़ रुपए, केंद्र सरकार से रिलीज करवाए जाएं. पिछले कुछ सालों में सेंट्रल पूल में टैक्स की राशि बढ़ी तो है लेकिन ये फंडिंग दिल्ली सरकार को नहीं मिली है.
जावेद अख़्तर