स्वच्छता अभियान: टॉयलेट बनाने थे, 500 घरों में गड्ढा खोदकर भूल गए अफसर

बस्तर में लोगों के लिए प्रधानमंत्री का स्वच्छता अभियान मुसीबत बन गया है. गांव के 500 घर ऐसे हैं, जहां शौचालय बनाने के लिए गड्ढे तो खोद दिए गए, लेकिन शौचालय नहीं बन पाए.

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गड्ढे में गिरी भैंस गड्ढे में गिरी भैंस

केशवानंद धर दुबे / सुनील नामदेव

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2017,
  • अपडेटेड 1:32 PM IST

बस्तर में लोगों के लिए प्रधानमंत्री का स्वच्छता अभियान मुसीबत बन गया है. गांव के 500 घर ऐसे हैं, जहां शौचालय बनाने के लिए गड्ढे तो खोद दिए गए, लेकिन शौचालय नहीं बन पाए. एक साल से गांव के लोग सरकारी दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी मुसीबतें जस की तस हैं.

इन गड्ढो की वजह से कई हादसे भी सामने आए हैं. कहीं बच्चे गिरने की घटनाएं सामने आईं, तो कहीं गड्ढों में गिरने से मवेशियों की मौत हो रही है. गांववालों की चिंता है कि बारिश के पहले अगर इन गड्ढों को नहीं भरा गया तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है.

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500 घरों में शौचालय
बस्तर की दरभा घाटी के दर्जनों गांव में प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान का जोर-शोर से प्रचार प्रसार हुआ. अफसरों ने स्वच्छता का संदेश दिया और हर घर परिवार में शौचालय निर्माण के लिए गड्ढे खोदे गए. अकेले लेन्द्रा गांव में लगभग 500 घरों में गड्ढे खोदे गए. इसी गांव के किसान गंगा राम के घर में भी शौचालय के लिए गड्ढा खोदा गया था. गड्ढे में उसकी भैंस गिर गई. गड्ढा काफी गहरा था, जिसके चलते भैंस उसमें फंस गई. गांववालों की तमाम कोशिशों के बावजूद भैंस को नहीं बचाया जा सका. 

एक साल से परेशान हैं लोग
सिर्फ गंगाराम ही नहीं इस गांव में रहने वाले लगभग 500 परिवारों का बुरा हाल है. तमाम लोगों के यहां पंचायत विभाग ने शौचालय निर्माण के नाम पर भद्दा मजाक किया है. लेकिन मामला सिर्फ गड्ढों तक सीमित नहीं रहा है. ना तो यहां शौचालय निर्माण के लिए ग्रामीणों को स्वीकृत रकम दी गई, और ना ही निर्माण की जवाबदारी पंचायत विभाग ने ली. साल भर से ज्यादा वक्त बीत गया. लेकिन इस गांव के किसी भी घर में ना तो शौचालय का निर्माण हुआ और ना ही गड्ढों को भरने के लिए किसी ने कोई रूचि दिखाई. ऐसे में ये गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे है. कभी इनमें गिर का बच्चे घायल हो रहे है. तो कभी मवेशियों की मौत हो रही है.

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इस गांव के तमाम लोगों ने गड्ढे भरने की इजाजत मांगी है. लेकिन पंचायत विभाग ने इसकी भी इजाजत नहीं दी. चूंकि सरकारी निर्देश और सरकारी भुगतान के जरिऐ इन गड्ढों को खोदा गया है. लिहाजा सरकारी काम में हस्तक्षेप के अपराध से बचने के लिए ग्रामीण इन गड्ढों को भरने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे है.

लोगों ने की हर्जाने की मांग
इलाके के लोगों ने लगातार साल भर तक अधिकारियों को मामले की शिकायत की. लेकिन कोई हल नहीं निकला. अब ग्रामीणों ने कलेक्टर से शिकायत कर मवेशियों की हुई मौत का हर्जाना मांगा है. यही नहीं मांग भी दोहराई है, क्योंकि बारिश आते ही इन गड्ढो में पानी भर जाएगा. ऐसे में ये गड्ढे खतरनाक साबित होंगे. हालांकि पंचायत विभाग जल्द कार्रवाई करने की बात कह रहा है.

12 हजार रूपये की रकम की गई थी स्वीकृत
दरभा विकास खंड के दो दर्जन गांव को ODF घोषित करने के लिए प्रशासन ने एड़ी चोटी का जोर लगाया हुआ है. प्रशासन के निर्देश पर ही इन गड्ढों को खोदा गया. ग्रामीणों से वादा किया गया था कि एक महीने के भीतर पूरा हो जाएगा. शौचालय निर्माण के लिए प्रत्येक घरों के लिए 12 हजार रूपये की रकम स्वीकृत की गई थी, लेकिन ये रकम ग्रामीणों के हाथ नहीं लगी.

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