समलैंगिकता कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

आमतौर पर सुधारात्मक याचिकाओं पर जस्टिस अपने चैंबर में ही विचार करते हैं लेकिन इस मामले की सुनवाई ओपन कोर्ट में करने का फैसला लिया गया है.

Advertisement

ब्रजेश मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 02 फरवरी 2016,
  • अपडेटेड 1:11 PM IST

देश में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी में रखने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली समलैंगिक कार्यकर्ताओं की सुधारात्मक याचिका पर में मंगलवार को ओपन कोर्ट सुनवाई होगी.

चीफ जस्टिस टी.एस. ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ सुप्रीम कोर्ट के 11 दिसंबर, 2013 के फैसले के खिलाफ समलैंगिक अधिकारों के लिए प्रयत्नशील कार्यकर्ताओं और गैर सरकारी संगठन नाज फाउंडेशन की पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई. कोर्ट ने इस फैसले में अप्राकृतिक यौन अपराधों से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 377 की वैधता बरकरार रखी थी. न्यायालय ने इसके बाद जनवरी, 2014 में इस निर्णय पर पुनर्विचार के लिए दायर याचिकाए भी खारिज कर दी थीं.

Advertisement

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में पेश की ये दलील
सुधारात्मक याचिका कोर्ट के माध्यम से अन्याय के निदान हेतु उपलब्ध अंतिम है. आमतौर पर सुधारात्मक याचिकाओं पर जस्टिस अपने चैंबर में ही विचार करते हैं लेकिन बिरले मामलों में ही कोर्ट में इन पर सुनवाई की जाती है.

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में दलील दी है कि शीर्ष अदालत का 11 दिसंबर, 2013 का फैसला त्रुटिपूर्ण है क्योंकि यह पुराने कानून पर आधारित है. याचिका में कहा गया कि मामले पर सुनवाई 27 मार्च, 2012 को पूरी हुई थी और निर्णय करीब 21 महीने बाद सुनाया गया और इस दौरान कानून में संशोधन सहित अनेक बदलाव हो चुके थे, जिन पर फैसला सुनाने वाली पीठ ने विचार नहीं किया.

'हजारों लोगों ने जाहिर कर दी है पहचान'
कार्यकर्ताओं ने कहा था कि हाई कोर्ट के निर्णय के बाद पिछले चार चाल के दौरान इस समुदाय के हजारों लोगों ने अपनी यौन पहचान सार्वजनिक कर दी थी. इस वर्ग का तर्क है कि समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखने से इस समुदाय के मौलिक अधिकारों का हनन होता है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »