जब शरद पवार से बोले थे बाला साहेब ठाकरे, सुप्रिया मेरी भी बेटी

शरद पवार ने आत्मकथा 'ऑन माइ टर्म्स' में लिखा है कि बाला साहेब का उसूल था कि अगर आप एक बार उनके दोस्त बन गए तो वे उसे जीवन भर निभाते थे.

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बाला साहेब ठाकरे की फाइल फोटो बाला साहेब ठाकरे की फाइल फोटो

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 8:40 AM IST

  • शिवसेना को समर्थन देने को लेकर एनसीपी और कांग्रेस पसोपेश में
  • बालासाहेब ठाकरे कई मौकों पर कांग्रेस-एनसीपी की कर चुके हैं मदद

महाराष्ट्र में शिवसेना की सरकार बनाने को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और पसोपेश में हैं लेकिन शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे का अध्यक्ष शरद पवार के साथ अच्छे संबंध थे. जिस कांग्रेस से विचारधारा के मामले में बाल ठाकरे का 36 का आंकड़ा रहा, उसका भी उन्होंने कई बार समर्थन किया है. मुस्लिम विरोध के तेवर ने शिवसेना के संस्थापक को हिंदू हृदय सम्राट बना दिया और बीजेपी का स्वाभाविक दोस्त लेकिन इस दोस्ती के समानांतर बाल ठाकरे की एक दोस्ती एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के साथ चलती रही. आज वही शरद पवार शिवसेना की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा के खेवनहार बने हुए हैं.

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पवार ने आत्मकथा 'ऑन माइ टर्म्स' में क्या लिखा?

बाल ठाकरे से का संबंध बड़ा अजीब रहा. वे सार्वजनिक रूप से पवार को आटे की बोरी कहकर उनका मजाक उड़ाते थे लेकिन रात में उनको परिवार के साथ खाने पर भी बुला लेते थे. शरद पवार ने आत्मकथा 'ऑन माइ टर्म्स' में लिखा है कि बाला साहेब का उसूल था कि अगर आप एक बार उनके दोस्त बन गए तो वे उसे जीवन भर निभाते थे. पवार के मुताबिक, 'सितंबर 2006 में जब मेरी बेटी सुप्रिया ने राज्यसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की तो बाला साहेब ने मुझे फोन करके कहा- शरद बाबू मैं सुन रहा हूं, हमारी सुप्रिया चुनाव लड़ने जा रही है और तुमने मुझे इसके बारे में बताया ही नहीं. मुझे यह खबर दूसरों से क्यों मिल रही है? मैंने कहा कि शिव सेना-बीजेपी गठबंधन ने पहले ही उसके खिलाफ अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है. ऐसे में मैंने सोचा कि आपको क्यों परेशान करूं. इस पर बाल ठाकरे बोले कि मैंने सुप्रिया को तब से देखा है जब वो मेरे घुटनों के बराबर हुआ करती थी. मेरा कोई भी उम्मीदवार सुप्रिया के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेगा क्योंकि तुम्हारी बेटी मेरी बेटी है. मैंने उनसे पूछा कि आप का क्या करेंगे, जिनके साथ आपका गठबंधन है? ठाकरे ने तुरंत जवाब दिया कि कमलाबाई की चिंता मत करो. वो वही करेगी जो मैं कहूंगा.'

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कांग्रेस को शिवसेना का समर्थन

इससे अंदाजा लगाना आसान है कि ठाकरे परिवार से पवार का कैसा नाता है. 2007 में चुनाव में बाल ठाकरे ने एनडीए के उम्मीदवार भैरों सिंह शेखावत की जगह यूपीए की उम्मीदवार प्रतिभा देवी पाटील का समर्थन किया. 2012 में भी एनडीए समर्थित उम्मीदवार पीए संगमा की जगह शिवसेना ने यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया. वैसे ही इमरजेंसी के समय जब समूचा विपक्ष इंदिरा सरकार के खिलाफ खड़ा था, तब ठाकरे इमरजेंसी के पक्ष में खड़े थे. 1978 में जनता पार्टी सरकार ने को गिरफ्तार करवाया तो ठाकरे इंदिरा के पक्ष में खड़े थे. कहते हैं कि महाराष्ट्र और खासकर मुंबई में कम्युनिस्ट आंदोलन को तोड़ने के लिए शुरुआती दिनों में कांग्रेस ने को मदद दी, मदद ली. उन दिनों मजाक में शिवसेना को महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री वसंतराव नायक और वसंतदादा पाटिल के नाम पर वसंत सेना तक कहा जाता था.

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